Chhattisgarh में “जन भागीदारी” अभियान — क्या है उद्देश्य?

Chhattisgarh सरकार ने राज्य के सबसे दूरदराज और वंचित आदिवासी गांवों तक सरकारी योजनाओं की पहुंच सुनिश्चित करने के लिए एक महत्वाकांक्षी अभियान की घोषणा की है।

आदिम जाति विकास विभाग द्वारा 18 मई से 25 मई 2026 तक “जन भागीदारी–सबसे दूर, सबसे पहले” अभियान चलाया जाएगा।

यह अभियान रायपुर को छोड़कर छत्तीसगढ़ के सभी जिलों में एक साथ संचालित होगा। इसका मुख्य लक्ष्य है — जंगल, पहाड़ और दूरस्थ इलाकों में रहने वाले आदिवासी भाई-बहनों तक सरकारी योजनाओं का लाभ सीधे पहुंचाना।


Chhattisgarh के मंत्रालय महानदी भवन, नवा रायपुर से जारी आधिकारिक आदेश के अनुसार इस अभियान का मूल उद्देश्य है — “सबसे दूर के गांव को सबसे पहले सेवा।”

यह सोच उस परंपरागत व्यवस्था को तोड़ती है जिसमें शहरों और सड़क किनारे के गांवों को पहले और दूरस्थ आदिवासी बस्तियों को बाद में सेवाएं मिलती थीं।

अब Chhattisgarh सरकार ने तय किया है कि अधिकारी खुद गांवों में जाएंगे, जन सुनवाई करेंगे और “आदि सेवा केन्द्रों” के माध्यम से शिकायतों का मौके पर निराकरण करेंगे।



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किन गांवों में चलेगा यह अभियान?

Chhattisgarh सरकार का यह अभियान दो प्रमुख राष्ट्रीय कार्यक्रमों के अंतर्गत चिह्नित गांवों में संचालित होगा:

1. प्रधानमंत्री जनजातीय आदिवासी न्याय महा अभियान (PM-JANMAN)

  • इस कार्यक्रम के अंतर्गत चिह्नित 1,544 गांवों में अभियान चलेगा

2. धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान

  • इस कार्यक्रम के अंतर्गत 6,691 गांवों में अभियान संचालित होगा

कुल मिलाकर Chhattisgarh के 8,235 से अधिक आदिवासी गांवों में यह ऐतिहासिक अभियान एक साथ चलाया जाएगा।


Chhattisgarh के आदिवासी गांवों में मिलेंगी ये सुविधाएं

इस 8 दिवसीय अभियान के दौरान Chhattisgarh के पात्र आदिवासी हितग्राहियों को निम्नलिखित क्षेत्रों में सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाया जाएगा:

  • स्वास्थ्य — सिकल सेल, TB सहित अन्य बीमारियों की जांच और इलाज
  • शिक्षा — बच्चों के नामांकन और छात्रवृत्ति से संबंधित सुविधाएं
  • सामाजिक सुरक्षा — पेंशन, राशन कार्ड और अन्य कल्याणकारी योजनाएं
  • पोषण — कुपोषण से लड़ने के लिए पोषण संबंधी कार्यक्रम
  • पेयजल — स्वच्छ और सुरक्षित पानी की उपलब्धता सुनिश्चित करना

आदि सेवा केन्द्र — शिकायत का मौके पर होगा समाधान

Chhattisgarh के इस अभियान की सबसे खास बात यह है कि अधिकारी स्वयं गांवों में पहुंचकर जन सुनवाई करेंगे।

“आदि सेवा केन्द्रों” की स्थापना की जाएगी, जहां ग्रामीण अपनी शिकायतें और समस्याएं सीधे अधिकारियों के सामने रख सकेंगे। शिकायतों का मौके पर ही निराकरण करने की कोशिश की जाएगी।

यह व्यवस्था Chhattisgarh के उन आदिवासियों के लिए वरदान साबित होगी जो अपनी समस्याओं के समाधान के लिए मीलों दूर जिला मुख्यालय तक जाने में असमर्थ थे।


सिकल सेल और TB जांच — स्वास्थ्य शिविरों की व्यवस्था

Chhattisgarh के आदिवासी क्षेत्रों में सिकल सेल एक गंभीर और पीढ़ी-दर-पीढ़ी चलने वाली बीमारी है। इसके अलावा टीबी (क्षय रोग) भी इन क्षेत्रों में एक बड़ी स्वास्थ्य चुनौती है।

इस अभियान के दौरान विशेष स्वास्थ्य शिविर लगाए जाएंगे जिनमें:

  • सिकल सेल की निःशुल्क जांच
  • TB की स्क्रीनिंग और इलाज
  • अन्य सामान्य बीमारियों की जांच और दवाइयां

यह स्वास्थ्य शिविर Chhattisgarh के दूरस्थ आदिवासी गांवों तक पहुंचकर उन लोगों की मदद करेंगे जो अब तक बुनियादी स्वास्थ्य सुविधाओं से वंचित थे।



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Chhattisgarh में डिजिटल मॉनिटरिंग — आदि प्रसारण पोर्टल

Chhattisgarh सरकार ने इस अभियान को पारदर्शी और जवाबदेह बनाने के लिए डिजिटल मॉनिटरिंग की व्यवस्था की है।

“आदि प्रसारण” पोर्टल पर प्रतिदिन अपलोड किया जाएगा:

  • फोटो — गांवों में हो रही गतिविधियों की तस्वीरें
  • वीडियो — जन सुनवाई और शिविरों का वीडियो दस्तावेजीकरण
  • लाभार्थियों के बयान — सीधे आदिवासियों की आवाज़ में उनका अनुभव

यह डिजिटल निगरानी प्रणाली सुनिश्चित करेगी कि Chhattisgarh के हर कोने में अभियान वास्तव में जमीन पर काम कर रहा है — केवल कागजों पर नहीं।

सुशासन तिहार से जुड़ेगा अभियान

Chhattisgarh सरकार की यह पहल राज्य के “सुशासन तिहार” और “जनजातीय गरिमा उत्सव” से भी समन्वित की जाएगी।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साई के नेतृत्व में चल रहे सुशासन तिहार की भावना के अनुरूप यह अभियान सरकार को जनता के और करीब लाने का एक और प्रयास है।


जनप्रतिनिधियों और स्वयंसेवी संगठनों की होगी भागीदारी

Chhattisgarh शासन ने यह भी सुनिश्चित किया है कि यह अभियान केवल सरकारी अमले तक सीमित न रहे। इसमें समाज के हर वर्ग की सक्रिय भागीदारी होगी।

शासन के निर्देशों के अनुसार निम्नलिखित संगठनों और व्यक्तियों को अभियान में जोड़ा जाएगा:

  • जनप्रतिनिधि — विधायक, सरपंच और पंचायत प्रतिनिधि
  • स्वयंसेवी संगठन (NGO) — आदिवासी क्षेत्रों में काम कर रहे संगठन
  • एनएसएस (NSS) — राष्ट्रीय सेवा योजना के स्वयंसेवक
  • एनसीसी (NCC) — राष्ट्रीय कैडेट कोर के युवा
  • स्व-सहायता समूह (SHG) — महिला स्व-सहायता समूह

यह व्यापक भागीदारी अभियान को Chhattisgarh के कोने-कोने तक प्रभावी ढंग से पहुंचाने में सहायक होगी।


सुशासन तिहार और जनजातीय गरिमा उत्सव से होगा समन्वय

Chhattisgarh में यह अभियान अकेला नहीं चलेगा। इसे राज्य सरकार के दो अन्य महत्वपूर्ण कार्यक्रमों के साथ समन्वित किया जाएगा:

1. सुशासन तिहार — जिसके तहत सरकार सीधे जनता के बीच जाकर उनकी समस्याएं सुनती है और समाधान देती है।

2. जनजातीय गरिमा उत्सव — जो आदिवासी संस्कृति, परंपरा और पहचान को सम्मान देने का उत्सव है।

इन तीनों कार्यक्रमों का एक साथ संचालन Chhattisgarh के आदिवासी समाज को विकास और सम्मान — दोनों एक साथ देने का एक अभूतपूर्व प्रयास है।

Chhattisgarh सरकार का “जन भागीदारी–सबसे दूर, सबसे पहले” अभियान राज्य के उन आदिवासी भाई-बहनों के लिए एक ऐतिहासिक पहल है, जो दशकों से सरकारी योजनाओं की परिधि से बाहर रहे। 8,235 से अधिक गांवों में स्वास्थ्य, शिक्षा, पोषण और पेयजल जैसी बुनियादी सुविधाएं पहुंचाने का यह संकल्प Chhattisgarh को सच्चे अर्थों में एक जनकल्याणकारी राज्य बनाता है।

18 से 25 मई 2026 के बीच चलने वाला यह 8 दिवसीय अभियान केवल एक सरकारी कार्यक्रम नहीं है — यह Chhattisgarh के हर आदिवासी नागरिक को यह भरोसा दिलाने की कोशिश है कि “सरकार आपके पास आएगी, आपको सरकार के पास नहीं आना होगा।”

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