Chhattisgarh DGP Appointed — 17 महीने बाद मिली स्थायी जिम्मेदारी

Chhattisgarh DGP Appointed — छत्तीसगढ़ में पुलिस प्रशासन के लिहाज से 16 मई 2026 एक ऐतिहासिक दिन रहा। गृह विभाग की प्रमुख सचिव निहारिका बारिक सिंह ने आधिकारिक आदेश जारी करते हुए आईपीएस अरुणदेव गौतम को छत्तीसगढ़ का स्थायी पुलिस महानिदेशक (DGP) नियुक्त किया।

गौरतलब है कि सरकार ने करीब 17 महीने पहले उन्हें प्रभारी डीजीपी की जिम्मेदारी सौंपी थी। अब वे पूर्णकालिक और स्थायी DGP के रूप में छत्तीसगढ़ पुलिस का नेतृत्व करेंगे।

रायपुर, भिलाई, दुर्ग, बिलासपुर सहित पूरे छत्तीसगढ़ में इस Chhattisgarh DGP Appointed की खबर चर्चा का केंद्र बनी हुई है।


Chhattisgarh DGP Appointed की यह खबर पूरी तरह नई नहीं थी। दैनिक भास्कर डिजिटल ने करीब एक महीने पहले ही यह जानकारी दे दी थी कि IPS अरुणदेव गौतम ही स्थायी DGP बनेंगे।

यह खबर तब सुर्खियों में आई थी जब सुप्रीम कोर्ट की सख्ती के बाद संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) ने गृह मंत्रालय को नोटिस भेजा था।

अब 16 मई 2026 को गृह विभाग के आधिकारिक आदेश से उस खबर पर पूरी तरह मुहर लग गई है।



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IPS अरुणदेव गौतम कौन हैं? — शानदार शैक्षणिक और पेशेवर करियर

Chhattisgarh DGP Appointed के नायक आईपीएस अरुण देव गौतम मूलतः उत्तरप्रदेश के कानपुर के रहने वाले हैं। उनका जन्म 2 जुलाई 1967 को कानपुर के निकट स्थित गांव अभयपुर में हुआ।

उनकी प्रारंभिक शिक्षा गांव के ही सरकारी स्कूल में हुई। इसके बाद उन्होंने राजकीय इंटर कॉलेज इलाहाबाद से 10वीं और 12वीं की पढ़ाई पूरी की।

उच्च शिक्षा और UPSC की तैयारी

इलाहाबाद विश्वविद्यालय से आर्ट्स में बीए और राजनीति शास्त्र में एमए करने के बाद उन्होंने जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU), नई दिल्ली से अंतरराष्ट्रीय कानून में एमफिल की प्रतिष्ठित डिग्री हासिल की।

इस मजबूत शैक्षणिक नींव के बाद उन्होंने UPSC परीक्षा उत्तीर्ण की और 1992 बैच के IPS अधिकारी बने।

12 अक्टूबर 1992 को उन्होंने IPS सेवा में योगदान दिया। प्रारंभ में उन्हें मध्यप्रदेश कैडर मिला था, जहां प्रशिक्षु IPS के रूप में जबलपुर में पोस्टिंग हुई।


संयुक्त राष्ट्र पदक से लेकर राष्ट्रपति पुरस्कार तक

Chhattisgarh DGP Appointed के रूप में नियुक्त अरुण देव गौतम की उपलब्धियां असाधारण हैं। उन्हें कई प्रतिष्ठित सम्मान प्राप्त हो चुके हैं:

  • 2002 — संघर्षग्रस्त कोसोवा में सेवाओं के लिए संयुक्त राष्ट्र पदक (UN Medal)
  • 2010 — सराहनीय सेवाओं के लिए भारतीय पुलिस पदक
  • 2018 — विशिष्ट सेवा के लिए राष्ट्रपति पुलिस पदक

कोसोवा जैसे युद्धग्रस्त क्षेत्र में शांति स्थापना के लिए संयुक्त राष्ट्र का पदक पाना किसी भी पुलिस अधिकारी के लिए गर्व की बात होती है।


6 जिलों के SP — एक अनुभवी और साहसी अधिकारी

Chhattisgarh DGP Appointed के पद पर पहुंचने से पहले अरुण देव गौतम का करियर सफर बेहद समृद्ध और चुनौतीपूर्ण रहा।

छत्तीसगढ़ राज्य बनने के बाद 2000 में उन्होंने छत्तीसगढ़ कैडर का चुनाव किया। इसके बाद वे छत्तीसगढ़ के 6 जिलों के पुलिस अधीक्षक (SP) रहे:

  1. कोरिया
  2. रायगढ़
  3. जशपुर
  4. राजनंदगांव
  5. सरगुजा
  6. बिलासपुर

राजनांदगांव — सबसे कठिन जिम्मेदारी

2009 में राजनांदगांव में हुए एक भयावह नक्सली हमले में 29 पुलिसकर्मी और जिले के SP शहीद हो गए थे।

इस दुखद और संवेदनशील परिस्थिति में अरुण देव गौतम को राजनांदगांव का SP बनाकर भेजा गया। यह निर्णय ही उनकी क्षमता और साहस पर सरकार के अटूट भरोसे को दर्शाता है।



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झीरम कांड के बाद बस्तर IG — सबसे कठिन जिम्मेदारी

25 मई 2013 को छत्तीसगढ़ में झीरम नक्सली हमला हुआ, जिसमें कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेता और कार्यकर्ता मारे गए।

इस हमले के बाद बस्तर में अमन-चैन बहाल करना सबसे बड़ी चुनौती थी। सरकार ने अरुण देव गौतम को बस्तर का IG नियुक्त किया।

उनके कुशल नेतृत्व में झीरम कांड के कुछ ही महीनों बाद नवंबर-दिसंबर 2013 में विधानसभा चुनाव सफलतापूर्वक संपन्न हुए। इस दौरान वोटिंग प्रतिशत में भी उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई।

DIG से DGP तक — लंबी और प्रभावशाली यात्रा

DIG बनने के बाद वे पुलिस हेडक्वार्टर, CID, वित्त एवं योजना, प्रशासन और मुख्यमंत्री सुरक्षा जैसे महत्वपूर्ण विभागों में पदस्थ रहे।

हाल के वर्षों में वे छत्तीसगढ़ के गृह सचिव के अलावा जेल और परिवहन विभाग का भी दायित्व संभाल रहे थे। साथ ही नगर सेना और अग्निशमन सेवाओं का अतिरिक्त प्रभार भी उनके पास था।


Chhattisgarh DGP Appointed — सुप्रीम कोर्ट के निर्देश क्या हैं?

Chhattisgarh DGP Appointed की प्रक्रिया सुप्रीम कोर्ट के 2006 के ऐतिहासिक फैसले के अनुसार हुई है।

सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुसार:

  • राज्य सरकार UPSC द्वारा सूचीबद्ध 3 सबसे वरिष्ठ अधिकारियों में से अपने DGP का चयन करे
  • चयनित अधिकारी को सेवानिवृत्ति की तारीख की परवाह किए बिना कम से कम 2 साल का कार्यकाल पूरा करना होगा

इसी प्रक्रिया के तहत UPSC ने गृह मंत्रालय को नोटिस भेजा था, जिसके बाद छत्तीसगढ़ सरकार ने स्थायी DGP की नियुक्ति को अंतिम रूप दिया।


DGP बनने के लिए क्या है योग्यता?

Chhattisgarh DGP Appointed की प्रक्रिया को समझने के लिए यह जानना जरूरी है कि DGP पद के लिए क्या मानदंड हैं:

  • सामान्य नियम: DGP बनने के लिए 30 साल की पुलिस सेवा अनिवार्य है
  • विशेष मामलों में: भारत सरकार 30 साल से पहले भी DGP बनाने की अनुमति दे सकती है
  • छोटे राज्यों के लिए: IPS कैडर छोटा होने के कारण भारत सरकार ने 25 साल की सेवा पर DGP नियुक्ति की छूट दी है, लेकिन यह बड़े राज्यों पर लागू नहीं होती

1992 बैच के IPS अरुण देव गौतम के पास 30 से अधिक वर्षों की अनुभवी सेवा है, जो उन्हें इस पद के लिए पूरी तरह योग्य बनाती है।

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