Kumhari Fire Accident — कैसे हुई वह भयावह घटना?

Kumhari Fire Accident — दुर्ग जिले के कुम्हारी क्षेत्र के खपरी गांव में 12 मई 2026 की दोपहर एक ऐसी घटना घटी जिसने पूरे इलाके को हिलाकर रख दिया।

एक ही परिवार के चार लोग जिंदा जलकर राख हो गए। बांस, खपरैल और तिरपाल से बनी एक छोटी सी झोपड़ी में लगी आग ने कुछ ही मिनटों में सब कुछ खत्म कर दिया।

शुरुआती जांच में शॉर्ट सर्किट को कारण बताया गया, लेकिन अब जांच प्रक्रिया पर ही गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। पीड़ित परिवार ने धमकी और जबरदस्ती के आरोप लगाए हैं।

रायपुर, भिलाई, दुर्ग और बिलासपुर में इस Kumhari Fire Accident की चर्चा हर तरफ है।


12 मई की दोपहर — खपरी गांव की उस गली में अचानक धुआं उठने लगा। देखते ही देखते बांस, खपरैल और तिरपाल से बनी पूरी छत आग की लपटों में आ गई।

पड़ोसियों ने बताया कि आग इतनी तेज गति से फैली कि अंदर मौजूद लोगों को बाहर निकलने तक का मौका नहीं मिला।

जो लोग मदद के लिए दौड़े, उन्होंने पानी के पाइप से आग बुझाने की कोशिश की। लेकिन तभी सिलेंडर में जोरदार ब्लास्ट हुआ और पूरे मोहल्ले में अफरा-तफरी मच गई।

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राख में बदला एक पूरा परिवार — मृतकों का परिचय

Kumhari Fire Accident में जान गंवाने वालों में शामिल हैं:

  • अनिल उर्फ होमदास वैष्णव — परिवार के मुखिया
  • लक्ष्मी वैष्णव — उनकी बड़ी बेटी
  • चांदनी वैष्णव — उनकी छोटी बेटी
  • गोपिका — महज डेढ़ साल की मासूम नातिन

इस हादसे के बाद पूरे घर में अब केवल दो लोग बचे हैं — मृतक का बेटा गौतम वैष्णव और उसके बुजुर्ग दादा राधेश्याम वैष्णव।

झोपड़ी के बाहर एक पुरानी कुर्सी पर बैठे राधेश्याम की आंखें बार-बार उस जले हुए कमरे की तरफ जाती हैं। शब्द बहुत कम निकलते हैं — बस इतना: “सब खत्म हो गया साहब…”



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Kumhari Fire Accident — जांच प्रक्रिया पर उठे गंभीर सवाल

घटना के बाद दुर्ग कलेक्टर अभिजीत सिंह ने 6 सदस्यीय जांच कमेटी गठित की और 3 दिन के भीतर रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए।

लेकिन अब यही जांच प्रक्रिया सवालों के घेरे में आ गई है।

पीड़ित परिवार का आरोप है कि:

  • जांच के दौरान बिना पूरी जानकारी दिए दस्तखत करवाए गए
  • बयान बदलने पर धमकाया गया
  • आग की दिशा को जानबूझकर बदलने की कोशिश की जा रही है

इस पर अधिकारियों ने क्रॉस वेरीफाई कराने की बात कही है।


बिना जानकारी के करवाए गए दस्तखत — गौतम की आपबीती

Kumhari Fire Accident के एकमात्र युवा गवाह गौतम वैष्णव की आवाज में डर साफ झलकता है।

आठवीं तक पढ़े गौतम ने बताया:

“जांच वाले आए थे… मुझे अलग ले गए… बोले यहां साइन करो। मैंने पूछा क्या लिखा है तो ठीक से नहीं बताया। फिर एक मैडम बोलीं कि बयान बदला तो थप्पड़ मारूंगी…”

आत्महत्या बताने की कोशिश का आरोप

गौतम का दावा है कि जांच टीम के कुछ सदस्य लगातार यह साबित करने पर जोर दे रहे थे कि यह शॉर्ट सर्किट नहीं बल्कि आत्महत्या का मामला है।

जबकि गौतम का स्पष्ट कहना है:

“मीटर के पास से आग निकली थी। खंभे से नहीं… घर के बिजली मीटर के पास से चिंगारी आई थी।”

CCTV फुटेज और घटनास्थल के साक्ष्य भी इसी दिशा में इशारा करते हैं।


सिलेंडर ब्लास्ट और भगदड़ — पड़ोसी की दर्दनाक गवाही

Kumhari Fire Accident की चश्मदीद गवाह पड़ोसी बैदू सिन्हा ने उस दिन का दर्दनाक मंजर बयान किया।

वे कहती हैं:

“मैं घर पर थी। अचानक धुआं उठता दिखा तो हम दौड़कर बाहर आए। फिर घर से पानी का पाइप निकालकर आग बुझाने लगे। लेकिन तभी सिलेंडर ब्लास्ट हुआ। आवाज इतनी तेज थी कि हम डरकर भागे। उसी दौरान मैं गिर गई और हाथ में फ्रैक्चर हो गया।”

बैदू ने प्लास्टर चढ़ा हाथ दिखाते हुए बताया कि आग और धमाके के बाद पूरे मोहल्ले में भगदड़ जैसी स्थिति बन गई थी।

लपटें इतनी भयावह थीं कि कोई भी अंदर नहीं जा सका।



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Kumhari Fire Accident के बाद भी जारी है बिजली की लापरवाही

Kumhari Fire Accident में अपनी डेढ़ साल की बेटी गोपिका को खोने वाले नंदकिशोर वैष्णव की आंखों में आज भी पछतावा साफ दिखता है।

रायपुर की एक फैक्टरी में काम करने वाले नंदकिशोर बताते हैं कि बेटी की आंखों का इलाज कराने के लिए ही वे कुम्हारी आए थे। हादसे से पहले वे करीब 15 दिनों से काम पर नहीं गए थे।

उस दिन फैक्टरी गया — और सब बदल गया

नंदकिशोर कहते हैं:

“अगर उस दिन घर पर रहता तो शायद मेरी बेटी बच जाती… शायद सबको बाहर निकाल लेते।”

वे बार-बार उस जली हुई जगह की तरफ देखते हैं जहां उनकी मासूम बच्ची आखिरी बार थी।

नंदकिशोर का यह भी आरोप है कि हादसे के बाद भी घर में जो अस्थायी मीटर लगाया गया है, उसमें भी करंट आ रहा है।

“डर लगता है, कहीं फिर कुछ ना हो जाए।”


3 बार शॉर्ट सर्किट — फिर भी नहीं सुनी गई शिकायत

Kumhari Fire Accident कोई अचानक आई आपदा नहीं थी — यह बिजली विभाग की लंबे समय से चली आ रही लापरवाही का नतीजा था।

मोहल्ले में रहने वाले अभय मालवीय ने बताया:

“पूरे इलाके के लोग बिजली की समस्या से परेशान हैं। इसी हफ्ते तीन बार शॉर्ट सर्किट जैसी स्थिति बन चुकी है। बिजली विभाग में कॉल करके शिकायत करो तो कोई नहीं आता।”

अभय का यह भी दावा है कि जिस झोपड़ी में हादसा हुआ, उसके पास के बिजली के खंभे में पिछले साल भी शॉर्ट सर्किट हुआ था। शिकायत की गई थी, लेकिन स्थायी समाधान नहीं किया गया।

अब पूरे मोहल्ले में डर का माहौल

Kumhari Fire Accident के बाद से महामाया पारा के लोग रात को बिजली के तारों और मीटर के पास सोने से डरते हैं।

कई परिवार रात भर जागते हैं। बच्चों को उन कमरों में सुलाने से बचाते हैं जहां तारों का झुंड नजदीक है।

यह डर बताता है कि Kumhari Fire Accident केवल एक परिवार की त्रासदी नहीं — यह पूरे इलाके की बिजली व्यवस्था की विफलता की कहानी है।

Kumhari Fire Accident एक ऐसी दुखद घटना है जो कई गंभीर सवाल छोड़ गई है। एक ही परिवार के चार लोगों का जिंदा जल जाना, उसके बाद जांच प्रक्रिया में धमकी और जबरदस्ती के आरोप, और इस सबके बाद भी बिजली विभाग की जारी लापरवाही — यह सब मिलकर एक बेहद चिंताजनक तस्वीर पेश करते हैं।

दुर्ग प्रशासन को चाहिए कि Kumhari Fire Accident की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच सुनिश्चित करे। पीड़ित परिवार को न्याय मिले, बिजली विभाग की लापरवाही पर कड़ी कार्रवाई हो और महामाया पारा समेत पूरे कुम्हारी क्षेत्र की बिजली व्यवस्था को तत्काल दुरुस्त किया जाए — ताकि कोई और परिवार इस दर्द से न गुजरे।

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