Chhattisgarh News की सबसे बड़ी खबर गुरुवार को रायपुर से आई, जब छत्तीसगढ़ विधानसभा ने ऐतिहासिक Chhattisgarh Dharm Swatantraya Vidheyak, 2026 (धर्म स्वातंत्र्य विधेयक, 2026) को ध्वनि मत से पारित कर दिया।
यह विधेयक गृह मंत्री विजय शर्मा द्वारा सदन में पेश किया गया। इसका मुख्य उद्देश्य धर्मांतरण को — चाहे वो बल, दबाव, प्रलोभन, धोखाधड़ी, विवाह, या सोशल मीडिया जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए हो — पूरी तरह नियंत्रित करना है।
विधेयक के अनुसार, छत्तीसगढ़ में धर्मांतरण अब एक पारदर्शी, सरकारी प्रक्रिया के तहत ही संभव होगा।
धर्मांतरण से पहले क्या करना होगा? — सार्वजनिक घोषणा अनिवार्य
Chhattisgarh News में यह प्रावधान सबसे चर्चित है। अब धर्मांतरण करने का इरादा रखने वाले किसी भी व्यक्ति को एक निर्धारित प्रारूप में “सक्षम प्राधिकारी” — यानी जिला मजिस्ट्रेट या उनके द्वारा अधिकृत अतिरिक्त जिला मजिस्ट्रेट — के समक्ष घोषणापत्र दाखिल करना होगा।
आवेदन मिलने के सात दिनों के भीतर अधिकारी को आवेदक का नाम, वर्तमान धर्म और प्रस्तावित धर्म — तहसीलदार कार्यालय, ग्राम पंचायत और स्थानीय थाने पर सार्वजनिक नोटिस के रूप में प्रदर्शित करने होंगे।
इसके बाद 30 दिनों के भीतर आपत्तियां दर्ज की जा सकती हैं, जांच होगी और फिर आदेश पारित किया जाएगा।
धर्मांतरण प्रमाण पत्र — पहचान का प्रमाण नहीं
विधेयक में यह भी स्पष्ट किया गया है कि धर्मांतरण के बाद जारी प्रमाण पत्र पहचान या नागरिकता का प्रमाण नहीं माना जाएगा।
अनुमोदन के 90 दिनों के भीतर यदि धर्मांतरण नहीं हुआ, तो आवेदन स्वतः समाप्त हो जाएगा।
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विवाह और धर्मांतरण — नया कानून क्या कहता है?
Chhattisgarh News में यह मुद्दा भी काफी चर्चा में है। नए विधेयक के अनुसार, केवल विवाह करने से धर्मांतरण नहीं माना जाएगा। लेकिन यदि केवल विवाह के उद्देश्य से धर्मांतरण किया गया हो, या कानून के प्रावधानों के अनुसार न किया गया हो, तो वह अवैध करार दिया जाएगा।
विवाह के मामलों में प्रस्तावित तिथि से 60 दिन पहले घोषणापत्र देना अनिवार्य होगा, जिसे सार्वजनिक किया जाएगा। अधिकारी यह जांच करेंगे कि विवाह में अवैध धर्मांतरण तो नहीं हो रहा।
सजा के प्रावधान — Mass Conversion पर उम्रकैद तक की सजा
यह Chhattisgarh News का सबसे कड़ा और चौंकाने वाला पहलू है।
Mass Conversion पर सजा
विधेयक के अनुसार, “Mass Conversion” यानी एक ही आयोजन में दो या दो से अधिक व्यक्तियों के धर्मांतरण को 10 साल से लेकर आजीवन कारावास — जो कि दोषी के स्वाभाविक जीवनकाल तक होगा — की सजा मिलेगी। साथ में कम से कम ₹25 लाख का जुर्माना भी लगाया जाएगा।
कमजोर वर्गों के मामले में सजा
यदि पीड़ित नाबालिग, मानसिक रूप से अस्वस्थ व्यक्ति, महिला, OBC, SC या ST वर्ग से हो, तो सजा 10 से 20 साल की कठोर कारावास होगी और न्यूनतम ₹10 लाख जुर्माना लगेगा।
पीड़ितों को — जिसमें तत्काल परिवार के सदस्य भी शामिल हैं — ₹10 लाख तक का मुआवजा देने का प्रावधान भी रखा गया है।
विशेष अदालत में सुनवाई
इस कानून के तहत सभी मामले Cognisable और Non-Bailable होंगे। जांच कम से कम सब-इंस्पेक्टर रैंक के पुलिस अधिकारी द्वारा की जाएगी। मामले विशेष अदालत में और उसके अभाव में सत्र न्यायालय में चलेंगे — चार्जशीट दाखिल होने के 6 महीने के भीतर कार्यवाही पूरी करना अनिवार्य होगा।
पुजारी, मौलवी और धर्म प्रचारकों पर नई जिम्मेदारी
Chhattisgarh News में इस प्रावधान ने सबका ध्यान खींचा है। धर्मांतरण संपन्न कराने वाले पुजारी, मौलवी या किसी भी व्यक्ति को सक्षम प्राधिकारी को आशय की घोषणा (Declaration of Intent) देनी होगी।
धर्मांतरण में शामिल संस्थाओं और व्यक्तियों को प्रत्येक वित्तीय वर्ष के 60 दिनों के भीतर वार्षिक रिपोर्ट देनी होगी, जिसमें धर्मांतरण की संख्या, व्यक्तिगत विवरण और देशी-विदेशी फंड का विवरण शामिल होगा।
विधेयक में यह भी प्रावधान है कि कानून का उल्लंघन करने वाले व्यक्तियों या संस्थाओं को सरकारी वित्तीय सहायता, अनुदान या इंफ्रास्ट्रक्चर सपोर्ट वापस ली या रद्द की जा सकती है।
पुराने कानून से कितना अलग है नया विधेयक?
गृह मंत्री विजय शर्मा ने बताया कि यह विधेयक Chhattisgarh Freedom of Religion Act, 1968 को प्रतिस्थापित करेगा।
1968 के कानून की कमियां
पुराने कानून में धर्मांतरण के बाद केवल सूचना देना अनिवार्य था और जबरन धर्मांतरण को Cognisable और Bailable अपराध माना जाता था, जिसमें सजा भी हल्की थी।
शर्मा के अनुसार — “छत्तीसगढ़ की भौगोलिक, सामाजिक और आर्थिक परिस्थितियों और तकनीकी विकास को देखते हुए पुराना कानून अपर्याप्त हो गया था।”
नए कानून में महत्वपूर्ण परिभाषाएं
विधेयक में “Allurement” (प्रलोभन) की स्पष्ट परिभाषा दी गई है — जिसमें नकद लाभ, उपहार, नौकरी, मुफ्त शिक्षा, मुफ्त चिकित्सा, बेहतर जीवनशैली का वादा और विवाह शामिल हैं।
“Coercion” (जबरदस्ती) में मनोवैज्ञानिक दबाव, शारीरिक बल, धमकी और सामाजिक बहिष्कार शामिल किए गए हैं।
विधेयक में Ancestral Religion (पूर्वज धर्म) में वापसी को धर्मांतरण नहीं माना गया है — ऐसे मामलों में कोई भी प्रमाण पत्र रद्द कर दिया जाएगा।
विपक्ष का विरोध — Walkout और Select Committee की मांग
Chhattisgarh News में विपक्ष की प्रतिक्रिया भी उतनी ही महत्वपूर्ण रही। विधेयक विपक्ष की अनुपस्थिति में ध्वनि मत से पारित हुआ, क्योंकि विपक्ष ने इसे Select Committee को भेजे जाने की मांग करते हुए सदन से वॉकआउट कर लिया।
विपक्षी दलों का कहना था कि इतने संवेदनशील और व्यापक विधेयक को बिना गहन विचार-विमर्श के पास करना उचित नहीं है।
Chhattisgarh News में यह विधेयक एक ऐतिहासिक और निर्णायक कदम के रूप में देखा जा रहा है। Chhattisgarh Dharm Swatantraya Vidheyak, 2026 न केवल धर्मांतरण को पारदर्शी बनाता है, बल्कि कमजोर वर्गों — SC, ST, OBC, महिलाओं और नाबालिगों — को विशेष सुरक्षा प्रदान करता है।
Mass Conversion पर उम्रकैद जैसी कड़ी सजा और डिजिटल माध्यमों पर लगाई गई रोक इस कानून को आधुनिक तकनीकी युग के लिए प्रासंगिक बनाती है। अब देखना यह होगा कि इसके क्रियान्वयन में प्रशासन किस हद तक सक्षम और निष्पक्ष साबित होता है।
