Eye Donation की एक भावुक और प्रेरणादायक कहानी दुर्ग से सामने आई है। खंडेलवाल कॉलोनी की रहने वाली स्वर्गीय बिमलाबेन सोनी अब इस दुनिया में नहीं हैं, लेकिन उनका दिया हुआ जीवनदान आज भी दो परिवारों को रोशनी दे रहा है। उनके निधन के बाद परिवार ने नेत्रदान का फैसला लिया। यह निर्णय आसान नहीं था, लेकिन इंसानियत के लिए उठाया गया यह कदम आज मिसाल बन गया है। इस घटना ने पूरे समाज को एक मजबूत संदेश दिया है।
Eye Donation: परिवार ने निभाया मानवता का सबसे बड़ा धर्म
Eye Donation के जरिए बिमलाबेन सोनी का जीवन आज भी दूसरों के लिए रोशनी बन गया है। उनके निधन के बाद उनके पुत्र जितेंद्र सोनी, महेंद्र सोनी और शैलेन्द्र सोनी ने परिवार के अन्य सदस्यों के साथ मिलकर यह निर्णय लिया। बहुएं और बेटी ने भी इस फैसले का पूरा समर्थन किया।
इस भावुक पल में नवदृष्टि फाउंडेशन की टीम तुरंत सक्रिय हुई। कुलवंत भाटिया और उनकी टीम मौके पर पहुंची। उन्होंने पूरी प्रक्रिया को व्यवस्थित तरीके से पूरा किया। साथ ही श्री शंकराचार्य मेडिकल कॉलेज की विशेषज्ञ टीम ने समय पर पहुंचकर कॉर्निया संकलित किए।
डॉ. श्रीया पंजवानी, डॉ. नीलांजना टोप्पो और अन्य डॉक्टरों ने पूरी जिम्मेदारी के साथ यह कार्य किया। इस दौरान परिवार के सदस्य भावुक थे, लेकिन उन्होंने साहस दिखाया।
पुत्र जितेंद्र सोनी ने कहा कि मां के जाने का दुख बहुत बड़ा है। लेकिन उनके नेत्रदान से दो लोगों को रोशनी मिलेगी। यही हमारे लिए सबसे बड़ी सांत्वना है।
यह भी पढ़ें: पीएमएमवीवाई योजना 7 प्रमुख उपलब्धियां, छत्तीसगढ़ बना नंबर 1
👉 अधिक जानकारी के लिए देखें:
https://www.who.int

Background
Eye Donation भारत में धीरे-धीरे जागरूकता का विषय बन रहा है। पहले लोग इस बारे में ज्यादा जानकारी नहीं रखते थे। लेकिन अब सामाजिक संस्थाएं और सरकार मिलकर जागरूकता फैला रही हैं।
नेत्रदान का मतलब होता है मृत्यु के बाद आंखों का दान करना। इससे कॉर्निया ट्रांसप्लांट के जरिए नेत्रहीन व्यक्ति को दृष्टि मिल सकती है।
भारत में लाखों लोग कॉर्निया डोनेशन का इंतजार करते हैं। ऐसे में हर एक नेत्रदान बेहद महत्वपूर्ण हो जाता है।
नवदृष्टि फाउंडेशन जैसी संस्थाएं इस दिशा में लगातार काम कर रही हैं। वे लोगों को प्रेरित करती हैं और जरूरत के समय पूरी प्रक्रिया को आसान बनाती हैं।
मुख्य बिंदु
- Eye Donation से दो नेत्रहीनों को नई रोशनी मिलेगी
- बिमलाबेन सोनी के परिवार ने लिया बड़ा निर्णय
- नवदृष्टि फाउंडेशन ने प्रक्रिया पूरी कराई
- मेडिकल टीम ने समय पर कॉर्निया संकलित किया
- समाज में जागरूकता का मजबूत संदेश गया
प्रभाव और प्रतिक्रिया
Eye Donation की इस घटना ने समाज में गहरा असर डाला है। लोग इस फैसले की सराहना कर रहे हैं। कई लोग इसे प्रेरणा के रूप में देख रहे हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसी कहानियां लोगों की सोच बदलती हैं। जब लोग वास्तविक उदाहरण देखते हैं, तो वे भी आगे बढ़कर नेत्रदान का संकल्प लेते हैं।
नवदृष्टि फाउंडेशन के कुलवंत भाटिया ने कहा कि सोनी परिवार हमेशा सामाजिक कार्यों में आगे रहा है। उनका यह कदम और लोगों को प्रेरित करेगा।
इसके अलावा स्थानीय लोगों ने भी परिवार को श्रद्धांजलि देते हुए उनके साहस की सराहना की।
अंत में कहा जा सकता है कि Eye Donation सिर्फ एक दान नहीं, बल्कि जीवन देने का माध्यम है। बिमलाबेन सोनी भले ही इस दुनिया में नहीं हैं, लेकिन उनकी रोशनी अब भी जीवित है।
अगर समाज में ऐसे और उदाहरण सामने आएंगे, तो Eye Donation के जरिए हजारों लोगों की जिंदगी बदल सकती है।
