ईडी मेडिकल घोटाला उजागर: ₹80 करोड़ की संपत्ति जब्त

ED Medical Scam ने छत्तीसगढ़ की स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने इस मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए ₹80.36 करोड़ की संपत्तियां अस्थायी रूप से अटैच की हैं।

दरअसल यह मामला मेडिकल उपकरण और री-एजेंट की खरीद से जुड़ा है। जांच एजेंसी के अनुसार टेंडर प्रक्रिया में भारी हेरफेर किया गया। इससे राज्य सरकार को करोड़ों का नुकसान हुआ।

वहीं जांच में यह भी सामने आया कि इस घोटाले से मिली रकम को मनी लॉन्ड्रिंग के जरिए अलग-अलग कंपनियों में घुमाया गया। इसलिए अब इस केस में कार्रवाई तेज हो गई है।


ED Medical Scam: रायपुर में ईडी की बड़ी कार्रवाई

ईडी के रायपुर जोनल कार्यालय ने मनी लॉन्ड्रिंग निवारण अधिनियम (PMLA) 2002 के तहत यह कार्रवाई की है। एजेंसी ने लगभग ₹80.36 करोड़ की अचल संपत्तियों को अटैच किया।

जांच के अनुसार यह मामला मोक्शित कॉरपोरेशन (M/s Mokshit Corporation), छत्तीसगढ़ मेडिकल सर्विसेज कॉरपोरेशन लिमिटेड (CGMSCL) और स्वास्थ्य सेवाएं निदेशालय के अधिकारियों से जुड़ा है।

दरअसल ईडी ने यह जांच ACB/EOW रायपुर की एफआईआर और चार्जशीट के आधार पर शुरू की। बाद में एजेंसी ने मनी लॉन्ड्रिंग के एंगल से पूरा केस टेकओवर किया।

जांच में आरोप है कि कंपनी के पार्टनर शशांक चोपड़ा ने अधिकारियों के साथ मिलकर टेंडर प्रक्रिया में हेरफेर किया। फर्जी मांग तैयार की गई और मेडिकल उपकरणों को अत्यधिक कीमत पर सप्लाई किया गया।

इसके अलावा प्रशिक्षण और मेंटेनेंस सेवाओं के नाम पर फर्जी एग्रीमेंट भी किए गए। इसी माध्यम से करोड़ों रुपये अलग-अलग कंपनियों में ट्रांसफर किए गए।

ईडी के अनुसार इस रकम को बाद में नकद निकाला गया और संपत्तियां खरीदने में लगाया गया।
इस प्रकार सरकारी धन का दुरुपयोग कर आरोपियों ने अवैध लाभ कमाया।

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सरकारी योजनाओं और कानून से जुड़ी जानकारी के लिए आधिकारिक वेबसाइट
https://www.pib.gov.in और https://www.india.gov.in पर भी विवरण उपलब्ध है।


घोटाले का बैकग्राउंड और जांच की शुरुआत

इस मेडिकल उपकरण घोटाले की शुरुआत राज्य की जांच एजेंसियों की जांच से हुई थी।
ACB और EOW ने सबसे पहले इस मामले में एफआईआर दर्ज की।

गौरतलब है कि स्वास्थ्य विभाग के लिए बड़ी मात्रा में मेडिकल उपकरण और री-एजेंट खरीदे गए थे। हालांकि बाद में आरोप लगे कि इनकी कीमत वास्तविक बाजार दर से कई गुना अधिक थी।

इसके अलावा टेंडर प्रक्रिया में नियमों का पालन नहीं किया गया।
यही वजह है कि जांच एजेंसियों ने इस मामले में भ्रष्टाचार और धोखाधड़ी की आशंका जताई।

इसी बीच ईडी ने भी मनी लॉन्ड्रिंग के एंगल से जांच शुरू की।
जांच के दौरान कई कंपनियों और बैंक लेन-देन की पड़ताल की गई।


ED Medical Scam: प्रमुख तथ्य

  • घटना और कार्रवाई – ईडी ने 2026 में जांच तेज करते हुए ₹80.36 करोड़ की संपत्तियां अटैच कीं।
  • कितने प्रभावित – टेंडर हेरफेर से राज्य सरकार को करोड़ों रुपये का नुकसान हुआ।
  • प्रशासन की कार्रवाई – PMLA की धारा 5 के तहत संपत्तियां अस्थायी रूप से अटैच की गईं।
  • अधिकारी का बयान – ईडी के अनुसार अपराध से अर्जित धन को कई कंपनियों में घुमाया गया।
  • आगे की कार्रवाई – जांच जारी है और अन्य संपत्तियों की भी जांच की जा रही है।

जनता और राजनीतिक प्रतिक्रिया

इस मामले के सामने आने के बाद राज्य में राजनीतिक बहस तेज हो गई है।
विपक्ष ने स्वास्थ्य विभाग में पारदर्शिता पर सवाल उठाए हैं।

वहीं सोशल मीडिया पर भी लोग इस कार्रवाई पर प्रतिक्रिया दे रहे हैं।
कई यूजर्स ने कहा कि मरीजों के नाम पर भ्रष्टाचार बेहद गंभीर मामला है।

दूसरी ओर सरकार का कहना है कि जांच एजेंसियां स्वतंत्र रूप से काम कर रही हैं।
इसलिए दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होगी।

गौरतलब है कि इससे पहले भी ईडी ने इस केस में कई ठिकानों पर छापेमारी की थी।
तलाशी के दौरान लगभग ₹43 करोड़ की संपत्तियां जब्त या फ्रीज की गई थीं।

इनमें पोर्शे, मर्सिडीज और मिनी कूपर जैसी लग्जरी गाड़ियां भी शामिल थीं।


ED Medical Scam मामले में अब तक कुल लगभग ₹123 करोड़ की संपत्तियां अटैच, जब्त या फ्रीज की जा चुकी हैं। इससे साफ है कि जांच एजेंसी इस केस को गंभीरता से देख रही है।

हालांकि जांच अभी जारी है और आने वाले दिनों में नए खुलासे हो सकते हैं।
इसलिए लोगों की नजर अब इस बात पर है कि आखिर इस घोटाले में और कौन-कौन शामिल है।

वहीं विशेषज्ञ मानते हैं कि इस तरह की सख्त कार्रवाई से सिस्टम में पारदर्शिता बढ़ेगी।
अब देखना होगा कि ED Medical Scam की जांच आगे किस दिशा में बढ़ती है।

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