Aadi Parab Festival छत्तीसगढ़ की जनजातीय संस्कृति, परंपरा और पहचान का अनोखा उत्सव बनकर सामने आया। नवा रायपुर स्थित आदिम जाति अनुसंधान एवं प्रशिक्षण संस्थान परिसर में आयोजित दो दिवसीय ‘आदि परब’ का समापन उत्साह और गौरव के माहौल में हुआ। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने इस अवसर पर जनजातीय समाज के भविष्य को लेकर बड़ा संदेश दिया। उन्होंने कहा कि सरकार जनजातीय समाज के विकास और सम्मान के लिए दृढ़ संकल्प के साथ काम कर रही है। कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ सहित कई राज्यों के आदिवासी कलाकारों ने अपनी कला और परंपरा का शानदार प्रदर्शन किया।
Aadi Parab Festival: परंपरा से पहचान तक
Aadi Parab Festival की थीम “परंपरा से पहचान तक” रखी गई थी। इस आयोजन का उद्देश्य जनजातीय समाज की समृद्ध संस्कृति को साझा मंच देना था। कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ के साथ तेलंगाना, ओडिशा, महाराष्ट्र और झारखंड के कलाकारों ने भाग लिया।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि प्रदेश की 43 जनजातियां एक मंच पर एकत्रित हुईं। यह हमारी सांस्कृतिक विविधता और एकता का प्रतीक है। उन्होंने विभाग की पूरी टीम को सफल आयोजन के लिए बधाई दी।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने टीआरटीआई परिसर में 5 करोड़ रुपये की लागत से बने 100 सीटर छात्रावास का लोकार्पण भी किया। यह छात्रावास जनजातीय युवाओं को शिक्षा और शोध के बेहतर अवसर देगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि बस्तर क्षेत्र लंबे समय तक नक्सल प्रभाव से प्रभावित रहा। लेकिन अब हालात तेजी से बदल रहे हैं। सरकार विकास, शिक्षा और रोजगार के जरिए क्षेत्र में खुशहाली लाने के लिए काम कर रही है।
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सरकारी योजनाओं की जानकारी के लिए
https://tribal.nic.in
और
https://www.india.gov.in
पर भी विवरण उपलब्ध है।

जनजातीय संस्कृति और विकास
छत्तीसगढ़ देश के प्रमुख जनजातीय बहुल राज्यों में से एक है। यहां की संस्कृति, परंपरा और जीवनशैली बेहद समृद्ध मानी जाती है। हालांकि लंबे समय तक बस्तर और आसपास के क्षेत्र विकास से दूर रहे।
इसी कारण सरकार ने जनजातीय समाज को मुख्यधारा से जोड़ने के लिए कई योजनाएं शुरू की हैं। धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान के तहत प्रदेश की 6691 बसाहटों का विकास किया जा रहा है।
इसके अलावा पीएम जनमन योजना के माध्यम से विशेष पिछड़ी जनजातियों को सड़क, आवास और अन्य सुविधाएं दी जा रही हैं। इस योजना से प्रदेश के 56 हजार से अधिक परिवार लाभान्वित हो रहे हैं।
सरकार नियद नेल्लानार योजना के जरिए नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाएं पहुंचाने पर भी विशेष ध्यान दे रही है।
Key Facts: Aadi Parab Festival
- कार्यक्रम में 43 जनजातियों की भागीदारी
- 5 करोड़ रुपये से बना 100 सीटर छात्रावास
- विभिन्न राज्यों के आदिवासी लोक कलाकारों की प्रस्तुति
- ‘आदि परब’ चित्रकला और परिधान को गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड सम्मान
- यूपीएससी और आईआईटी-एनआईटी में चयनित विद्यार्थियों का सम्मान
Aadi Parab Festival ने जनजातीय समाज के बीच नई ऊर्जा और आत्मविश्वास पैदा किया है। कार्यक्रम में पारंपरिक चित्रकला, शिल्प, हाट बाजार और जनजातीय व्यंजनों का अद्भुत संगम देखने को मिला।
मुख्यमंत्री ने कहा कि आधुनिकता की दौड़ में हमें अपनी सांस्कृतिक विरासत को बचाना होगा। उन्होंने बताया कि नवा रायपुर में बने जनजातीय संग्रहालयों में जनजातीय जीवन की परंपराओं को जीवंत रूप में प्रदर्शित किया गया है।
कार्यक्रम में आदिम जाति विकास मंत्री रामविचार नेताम और वन मंत्री केदार कश्यप ने भी जनजातीय संस्कृति को बढ़ावा देने की सराहना की।
इसके साथ ही मुख्यमंत्री ने यूपीएससी में सफल हुए जनजातीय युवाओं और प्रयास विद्यालय के विद्यार्थियों को सम्मानित किया। इससे युवाओं में नई प्रेरणा देखने को मिली।
कुल मिलाकर Aadi Parab Festival ने छत्तीसगढ़ की जनजातीय संस्कृति, कला और परंपराओं को नई पहचान दी है। यह आयोजन केवल सांस्कृतिक उत्सव नहीं बल्कि जनजातीय समाज के आत्मसम्मान और विकास का प्रतीक बन गया है। सरकार की योजनाओं और प्रयासों से शिक्षा, रोजगार और बुनियादी सुविधाओं में तेजी से सुधार हो रहा है। आने वाले समय में Aadi Parab Festival जनजातीय संस्कृति को राष्ट्रीय और वैश्विक मंच तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
