Cyber Fraud Gang से जुड़ा एक चौंकाने वाला मामला छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले से सामने आया है। पुरानी भिलाई थाना क्षेत्र में अपहरण का मामला दर्ज होने के बाद पुलिस ने तेजी से कार्रवाई की। इसके बाद विशेष टीम गठित कर झारखंड और ओडिशा भेजी गई। लगातार खोजबीन के बाद पुलिस ने अपहृत बालक को झारखंड के धनबाद से सकुशल बरामद कर लिया। इसी दौरान जांच में एक बड़े Cyber Fraud Gang का खुलासा भी हुआ। पुलिस ने दो आरोपियों और एक अपचारी बालक को गिरफ्तार किया। साथ ही बैंक खातों के अवैध उपयोग से साइबर धोखाधड़ी करने के मामले में कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है।
Cyber Fraud Gang का खुलासा, तीन आरोपी गिरफ्तार
Cyber Fraud Gang के खिलाफ यह कार्रवाई पुरानी भिलाई थाना पुलिस ने की। दरअसल, 5 मार्च 2026 को थाना पुरानी भिलाई में अपहरण का मामला दर्ज किया गया था। यह मामला भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 137(2) के तहत दर्ज हुआ।
जैसे ही मामला सामने आया, पुलिस ने तुरंत जांच शुरू की। पुलिस टीम ने तकनीकी साक्ष्यों और स्थानीय सूचना के आधार पर बालक की तलाश शुरू की। इसके बाद टीम को झारखंड और ओडिशा भेजा गया।
जांच के दौरान पता चला कि कुछ लोग बैंक खातों और पासबुक का अवैध उपयोग कर रहे थे। वे इन खातों को साइबर धोखाधड़ी के लिए उपलब्ध कराते थे। इसी नेटवर्क के जरिए वे लोगों से ठगी कर पैसा कमाते थे।
पुलिस ने बताया कि बालक के संपर्क में आए लोगों से पूछताछ करने पर इस Cyber Fraud Gang की जानकारी मिली। इसके बाद पुलिस ने झारसुगुड़ा और धनबाद में दबिश दी।
कार्रवाई के दौरान पुलिस ने दो आरोपियों को गिरफ्तार किया। गिरफ्तार आरोपियों में रितेश कुमार शर्मा (36 वर्ष) निवासी झारसुगुड़ा, ओडिशा और आकाश कुमार रवानी (22 वर्ष) निवासी धनबाद, झारखंड शामिल हैं। इसके अलावा एक अपचारी बालक को भी पकड़ा गया है।
पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 318(4), 62 और 3(5) के तहत मामला दर्ज किया है।
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साइबर अपराध से बचाव की जानकारी के लिए सरकारी पोर्टल देखें:
अपहरण से साइबर फ्रॉड तक का खुलासा
इस पूरे मामले की शुरुआत 1 मार्च 2026 से जुड़ी बताई जा रही है। जांच के दौरान सामने आया कि बैंक खाते से जुड़े लेनदेन को लेकर विवाद हुआ था। इसी विवाद के कारण बालक धनबाद चला गया था।
धनबाद पहुंचने के बाद कुछ लोगों ने उससे पैसों की मांग की। हालांकि बाद में बालक को छोड़ दिया गया।
इस बीच बालक के परिवार ने उसकी गुमशुदगी और अपहरण की शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने तुरंत कार्रवाई शुरू की और अलग-अलग राज्यों में तलाश शुरू की।
लगातार प्रयास के बाद पुलिस टीम ने 5 मार्च 2026 को धनबाद से बालक को सुरक्षित बरामद कर लिया।
जांच के दौरान पुलिस को कई बैंक खातों से जुड़े दस्तावेज और साक्ष्य मिले। इससे यह साफ हुआ कि आरोपी एक संगठित Cyber Fraud Gang से जुड़े हुए थे।
Key Facts: Cyber Fraud Gang केस
- पुरानी भिलाई थाना में 5 मार्च 2026 को अपहरण का मामला दर्ज हुआ।
- पुलिस टीम ने झारखंड और ओडिशा में जाकर जांच की।
- धनबाद से अपहृत बालक को सकुशल बरामद किया गया।
- दो आरोपी और एक अपचारी बालक को गिरफ्तार किया गया।
- आरोपियों पर भारतीय न्याय संहिता की कई धाराओं में केस दर्ज हुआ।
Image Alt Text: Cyber Fraud Gang
पुलिस की अपील
Cyber Fraud Gang के इस मामले ने एक बार फिर साइबर अपराध के बढ़ते खतरे को उजागर किया है। पुलिस का कहना है कि कई लोग लालच या दबाव में अपने बैंक खाते दूसरों को इस्तेमाल करने देते हैं। यही खाते बाद में साइबर ठगी में इस्तेमाल होते हैं।
दुर्ग पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि वे अपने बैंक खाते, एटीएम कार्ड या पासबुक किसी भी व्यक्ति को न दें। अगर कोई ऐसा करता है, तो वह भी कानूनी कार्रवाई का सामना कर सकता है।
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, साइबर अपराध के खिलाफ लगातार अभियान चलाया जा रहा है। साथ ही अन्य राज्यों की पुलिस के साथ समन्वय भी बढ़ाया जा रहा है।
इस मामले में पुरानी भिलाई थाना की टीम की सराहनीय भूमिका रही। टीम ने दूसरे राज्यों में जाकर समन्वय स्थापित किया और बालक को सुरक्षित वापस लाने में सफलता पाई।
Cyber Fraud Gang के खिलाफ यह कार्रवाई पुलिस की सक्रियता का उदाहरण है। अपहृत बालक को सुरक्षित बरामद करना पुलिस के लिए बड़ी सफलता मानी जा रही है।
साथ ही इस मामले में साइबर धोखाधड़ी से जुड़े नेटवर्क का खुलासा भी हुआ। इससे साफ है कि Cyber Fraud Gang देश के अलग-अलग राज्यों में सक्रिय हैं। इसलिए नागरिकों को भी सतर्क रहना होगा। बैंक खातों की सुरक्षा और जागरूकता ही ऐसे अपराधों को रोकने का सबसे बड़ा तरीका है।
