मुंबई।
Maharashtra Municipal Elections: महाराष्ट्र में स्थानीय निकाय चुनावों के नतीजों ने सियासी तस्वीर साफ कर दी है। बीजेपी, शिवसेना और एनसीपी की सत्तारूढ़ महायुति गठबंधन ने 288 नगर परिषदों और नगर पंचायतों में से 207 नगराध्यक्ष पदों पर जीत दर्ज कर एकतरफा बढ़त बना ली है। राज्य निर्वाचन आयोग (SEC) द्वारा रविवार को जारी अंतिम आंकड़ों में यह जानकारी सामने आई।
करीब एक दशक बाद हुए इन चुनावों में महायुति की यह जीत न केवल विपक्ष के लिए झटका मानी जा रही है, बल्कि इसे आने वाले विधानसभा और लोकसभा चुनावों का संकेतक भी माना जा रहा है।
चुनाव नतीजों का पूरा गणित
राज्य निर्वाचन आयोग के मुताबिक:
- बीजेपी ने सबसे अधिक 117 नगराध्यक्ष पद जीते
- शिवसेना (शिंदे गुट) को 53 पद मिले
- एनसीपी (अजित पवार गुट) ने 37 पदों पर कब्जा किया
वहीं विपक्षी महा विकास आघाड़ी (MVA) को करारी हार का सामना करना पड़ा:
- कांग्रेस – 28
- एनसीपी (शरद पवार गुट) – 7
- शिवसेना (उद्धव ठाकरे गुट) – 9
इसके अलावा,
- मान्यता प्राप्त अन्य दलों को 4
- गैर-मान्यता प्राप्त दलों को 28
- और निर्दलीयों को 5 पद मिले।
विपक्ष का आरोप: चुनाव आयोग ने मदद की
नतीजों के बाद विपक्ष ने तीखी प्रतिक्रिया दी। कांग्रेस और शिवसेना (UBT) ने सीधे तौर पर राज्य निर्वाचन आयोग पर पक्षपात का आरोप लगाया।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल ने कटाक्ष करते हुए कहा,
“मैं राज्य निर्वाचन आयोग को महायुति की जीत में मदद करने के लिए बधाई देता हूं।”
उन्होंने बीजेपी के सहयोगी दलों को चेतावनी भी दी और कहा कि
“बीजेपी की यह जीत एक चेतावनी है। वह समय आने पर अपने सहयोगियों को बाहर का रास्ता दिखा सकती है।”
वहीं शिवसेना (UBT) नेता अंबादास दानवे ने आरोप लगाया कि
“महायुति ने सत्ता, धन और प्रभाव का जमकर इस्तेमाल किया।”
महायुति में जश्न, शीर्ष नेताओं का बयान
जीत के बाद महायुति खेमे में उत्साह का माहौल है।
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा कि यह जीत
“प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में केंद्र और राज्य सरकार की जनकल्याणकारी नीतियों पर जनता की मुहर है।”
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी महाराष्ट्र की जनता का आभार जताया।
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा,
“इस बार मैंने पूरी तरह सकारात्मक प्रचार किया। किसी पर आरोप नहीं लगाए, सिर्फ योजनाओं की बात की। जनता ने उसी पर भरोसा जताया।”
कठिन हालात में भी सत्ता को समर्थन
खास बात यह रही कि
- राज्य में कृषि संकट,
- महिलाओं और किसानों की योजनाओं में आंशिक भुगतान,
- और आर्थिक मदद को लेकर नाराजगी
के बावजूद महायुति को जनता का व्यापक समर्थन मिला। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, यह जीत संगठनात्मक मजबूती और सकारात्मक अभियान का परिणाम है।
कब और कैसे हुए चुनाव
- 264 नगर परिषदों और नगर पंचायतों के लिए मतदान: 2 दिसंबर
- शेष 20 से अधिक निकायों में मतदान: 20 दिसंबर
- मतगणना शुरू: रविवार सुबह 10 बजे
लगभग 10 साल बाद हुए इन चुनावों को राजनीतिक रूप से बेहद अहम माना जा रहा था।
