दुर्ग में जमीन की सरकारी दरों में 300% बढ़ोतरी पर संग्राम, कोर्ट जाने की तैयारी तेज

CG News, Durg: दुर्ग जिले में कलेक्टर गाइडलाइन के तहत जमीन की सरकारी दरों में एकमुश्त 300 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी के बाद विवाद लगातार गहराता जा रहा है। जहां जमीन कारोबारी और क्रेडाई पहले ही इस फैसले का विरोध कर रहे थे, वहीं अब इस मुद्दे को अदालत तक ले जाने की तैयारी शुरू हो गई है। विरोधी पक्ष का आरोप है कि नई गाइडलाइन बनाने में वैधानिक प्रक्रियाओं का पालन नहीं किया गया।

🔹 नई सरकारी दरों से बढ़ा रजिस्ट्री शुल्क

केंद्रीय मूल्यांकन बोर्ड की अनुशंसा पर लागू की गई नई दरों के अनुसार कई क्षेत्रों में जमीन-मकान की कीमतें चार गुना तक बढ़ा दी गई हैं। इससे खरीदारों पर रजिस्ट्री शुल्क का बोझ अत्यधिक बढ़ गया है।
लगातार विरोध के बावजूद शासन-प्रशासन की ओर से समीक्षा न किए जाने पर कारोबारी अब कानूनी हस्तक्षेप की मांग कर रहे हैं।


🔹 आरोप: वैधानिक प्रक्रिया का पालन नहीं

याचिका में इन प्रमुख बिंदुओं को आधार बनाया जा सकता है:

1️⃣ प्रस्तावित दरों की जांच नहीं

प्रावधान के अनुसार, जिला स्तर से भेजे गए ड्राफ्ट की केंद्रीय मूल्यांकन बोर्ड द्वारा जमीनी हकीकत की पड़ताल अनिवार्य है।
आरोप: यह प्रक्रिया पूरी तरह नजरअंदाज कर दी गई।

2️⃣ बिना मैदानी सर्वेक्षण के दरें तय

नियमों के मुताबिक दरों को प्रस्तावित करने से पहले सर्वे आवश्यक है।
आरोप: इस बार बिना सर्वे सीधे दरें बढ़ा दी गईं।


🔹 दावा-आपत्ति प्रक्रिया नहीं अपनाई गई

प्रावधान: नई गाइडलाइन से पहले दरों का सार्वजनिक प्रकाशन, दावा-आपत्ति और उनका निस्तारण अनिवार्य है।
आरोप: इस बार न तो आपत्तियां मंगाई गईं और न ही निराकरण किया गया। सीधे 300% तक की बढ़ोतरी कर दी गई।


🔹 बाजार मूल्य का सही आधार नहीं

प्रावधान: दर बढ़ाने का आधार पिछले वर्ष की रजिस्ट्री और उनका औसत मूल्य होना चाहिए।
आरोप: कई क्षेत्रों में पिछले वर्ष रजिस्ट्री नगण्य थी, फिर भी दरें तीन गुना तक बढ़ा दी गईं।


🔹 कृषि भूमि को मनमाने ढंग से आवासीय/व्यावसायिक घोषित किया

प्रावधान: बिना डायवर्सन भूमि का मूल्यांकन कृषि दर पर होना चाहिए।
आरोप: शहर से लगे गांवों में खसरा नंबरों को मनमाने तरीके से आवासीय/व्यावसायिक श्रेणी में डालकर दरें बढ़ा दी गईं।


🔹 प्रदर्शन जारी, कारोबारियों में नाराज़गी

शुक्रवार को भी आंदोलन जारी रहा। कारोबारियों ने हिंदी भवन के सामने प्रदर्शन किया और बाद में सरदार पटेल चौक पर मंत्री ओपी चौधरी के प्रतीकात्मक पुतले का दहन किया। पुतला जलाने के दौरान पुलिस से हल्की झड़प भी हुई।

एडवोकेट और राजस्व विशेषज्ञ कौशल किशोर सिंह ने कहा कि केवल राजस्व बढ़ाने के लिए ऐसी अव्यावहारिक वृद्धि उचित नहीं है। यदि मामला अदालत पहुंचता है, तो नियमों के आधार पर राहत मिल सकती है।

एस्टेट कारोबारी राजा जैनरियल ने कहा कि बिना सर्वे और बिना उचित आधार के दरें बढ़ाना अनुचित है।
उन्होंने बताया—
“पहले कम दाम में बिके प्लॉट की अब भारी कीमत पर रजिस्ट्री करानी पड़ रही है। इनकम टैक्स की परेशानियां भी बढ़ गई हैं, कारोबार लगभग ठप है। जरूरत पड़ी तो कोर्ट जाएंगे।”

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