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छत्तीसगढ़-आंध्र सीमा पर बड़ी सफलता: एक करोड़ का इनामी नक्सली हिड़मा मुठभेड़ में ढेर, पत्नी राजे का भी एनकाउंटर

छत्तीसगढ़ से मंगलवार को एक बड़ी खबर सामने आई है। राज्य और आंध्र प्रदेश की सीमा पर पुलिस और नक्सलियों के बीच हुई भीषण मुठभेड़ में खूंखार नक्सली कमांडर हिड़मा को मार गिराया गया है।
सरकार ने हिड़मा पर एक करोड़ रुपये का इनाम घोषित किया था। उसे नक्सलियों की सबसे खतरनाक और सक्रिय टीम — बटालियन नंबर 1 — का कमांडर माना जाता था।

सूत्रों के अनुसार, मुठभेड़ में हिड़मा के साथ उसकी पत्नी राजे उर्फ रजक्का को भी मार गिराया गया। सोशल मीडिया पर दोनों के शवों की तस्वीरें भी सामने आई हैं, हालांकि पुलिस और प्रशासन ने अब तक आधिकारिक पुष्टि नहीं की है।
फिर भी, सुरक्षाबल इस मुठभेड़ को नक्सल मोर्चे पर साल की सबसे बड़ी सफलता मान रहे हैं।


कौन था एक करोड़ का इनामी हिड़मा?

हिड़मा मूल रूप से सुकमा जिले के पूर्वती गांव का रहने वाला था। उसका जीवन कम उम्र में ही नक्सली गतिविधियों से जुड़ गया था।
स्थानीय लोगों का कहना है कि हिड़मा बचपन से ही संगठन के संपर्क में आ गया और धीरे-धीरे नक्सलियों का टॉप लीडर बन गया।

सुरक्षा एजेंसियों के रिकॉर्ड के अनुसार, हिड़मा:

  • नक्सलियों की बटालियन नंबर 1 का कमांडर था
  • कई बड़े नक्सली हमलों का मास्टरमाइंड माना जाता था
  • पहले एयर एरिया कमेटी में भी सक्रिय रहा
  • सुकमा में हुए कई हमलों की प्लानिंग उसकी देखरेख में होती थी
  • उसकी रणनीति में हुए एक हमले में 21 जवान शहीद हुए थे

बस्तर के ग्रामीण इलाकों में उसका नाम डर का पर्याय बन चुका था। उसकी पकड़ इतनी मजबूत थी कि सुरक्षा बल उसकी तलाश वर्षों से कर रहे थे।


कैसे हुई मुठभेड़?

प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, छत्तीसगढ़-आंध्र प्रदेश की सरहद पर स्थित घने जंगलों में सोमवार रात से सर्च ऑपरेशन चल रहा था।
जंगलों में संदिग्ध गतिविधियों के बाद सुरक्षा बलों ने इलाके को घेरा। जैसे ही नक्सलियों ने फायरिंग शुरू की, पुलिस ने जवाबी कार्रवाई की।

मुठभेड़ काफी देर तक चली और अंततः हिड़मा और उसकी पत्नी राजे मार गिराए गए। अब इलाके में कॉम्बिंग ऑपरेशन जारी है क्योंकि आशंका है कि कुछ नक्सली अभी भी जंगलों में छिपे हो सकते हैं।


हिड़मा के मारे जाने का क्या मतलब?

विशेषज्ञों का मानना है कि हिड़मा का मारा जाना नक्सली संगठन के लिए तगड़ा झटका है।
उसकी रणनीति, जमीन पर पकड़ और टीम पर नियंत्रण के कारण वह नक्सली हमलों की रीढ़ माना जाता था।

यह कार्रवाई आने वाले समय में नक्सली नेटवर्क को कमजोर कर सकती है, खासकर दक्षिण बस्तर में।