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छत्तीसगढ़ में 16 जून से नया शिक्षा सत्र प्रारंभ: मुख्यमंत्री ने शाला प्रवेश उत्सव में भागीदारी की अपील की

रायपुर, 14 जून 2025

छत्तीसगढ़ में आगामी 16 जून 2025 से नया शिक्षा सत्र प्रारंभ होने जा रहा है। इस अवसर पर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने प्रदेश के सभी जनप्रतिनिधियों को पत्र लिखकर ‘शाला प्रवेश उत्सव’ में सक्रिय भागीदारी की अपील की है। मुख्यमंत्री ने इसे शिक्षा के क्षेत्र में क्रांतिकारी पहल बताया और सभी वर्गों से इसमें योगदान देने का आग्रह किया।

मुख्यमंत्री ने अपने पत्र में कहा कि प्रदेश को शत-प्रतिशत साक्षर बनाना एक चुनौतीपूर्ण कार्य जरूर है, लेकिन यह असंभव नहीं है। उन्होंने लिखा कि समाज के हर वर्ग को मिलकर यह सुनिश्चित करना होगा कि कोई भी बच्चा विद्यालय से वंचित न रहे और समय पर उसका नामांकन हो।

उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि राज्य में शिक्षा का अधिकार अधिनियम (RTE) प्रभावशील है और राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के तहत कक्षा 12वीं तक ड्रॉपआउट दर को शून्य करने का लक्ष्य रखा गया है। इसके लिए शैक्षणिक अवरोधों की पहचान कर उन्हें दूर करना सभी हितधारकों की सामूहिक जिम्मेदारी है।

मुख्यमंत्री साय ने जानकारी दी कि राज्य सरकार द्वारा मुख्यमंत्री शिक्षा गुणवत्ता अभियान शुरू किया जा रहा है, जिसका उद्देश्य शासकीय विद्यालयों में शिक्षा की गुणवत्ता को सुधारना है। इसके तहत शिक्षकों का युक्तियुक्तकरण कर शिक्षकविहीन और एकल शिक्षकीय स्कूलों में प्राथमिकता से शिक्षकों की पदस्थापना की जा रही है।

मुख्यमंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि स्कूल शिक्षा की अधोसंरचना एवं मूलभूत सुविधाओं का विकास सरकार की शीर्ष प्राथमिकताओं में शामिल है। उन्होंने जनप्रतिनिधियों से आग्रह किया कि वे अपने क्षेत्रों में शाला प्रवेश उत्सव में सक्रिय भूमिका निभाएं और यह सुनिश्चित करें कि कोई भी बच्चा स्कूल से बाहर न रहे।

मुख्यमंत्री ने अपने पत्र में कहा, “हमने बनाया है, हम ही संवारेंगे”—इस सोच को साकार करने के लिए सामूहिक प्रयासों और जनसहभागिता की आवश्यकता है। उन्होंने आशा जताई कि सभी जनप्रतिनिधि इस अभियान का नेतृत्व कर छत्तीसगढ़ को एक शिक्षित, सशक्त और आत्मनिर्भर राज्य बनाने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

विशेषज्ञों का मानना है कि मुख्यमंत्री का यह पत्र राज्य में शिक्षा के क्षेत्र में एक जनांदोलन की शुरुआत का संकेत है, जिससे न केवल नामांकन दर में वृद्धि होगी, बल्कि शिक्षा की गुणवत्ता और सामाजिक भागीदारी को भी नई दिशा मिलेगी।