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नरेंद्र मोदी का लोकसभा में दिया गया बयान प्रधानमंत्री पद की गरिमा के प्रतिकूल, चुनाव देख आई किसान-मजदूरों की याद : राजेंद्र साहू

दुर्ग (छत्तीसगढ़)। प्रदेश कांग्रेस कमेटी के महामंत्री राजेंद्र साहू ने आज भाजपा की नीतियों पर बड़ा हमला बोला है। राजेंद्र ने कहा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा कांग्रेस को टुकड़े-टुकड़े गैंग का लीडर कहा जाना प्रधानमंत्री पद की गरिमा के खिलाफ है। प्रधानमंत्री को देश को जोड़ने वाले बयान देना चाहिए। यह दुर्भाग्यजनक है कि वे देश को तोड़ने वाले बयान दे रहे हैं। सच ये है कि मोदी सरकार ही देश को अमीर और गरीब वर्ग में बांट रही है। मोदी सरकार की नीतियों से अमीर और ज्यादा अमीर बन रहे हैं, वहीं गरीब को और ज्यादा गरीब बनाया जा रहा है।

राजेंद्र ने कहा कि पांच राज्यों में चुनाव के कारण प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अचानक किसानों, मजदूरों और गरीबों के साथ बेरोजगार युवाओं के हितों की बात करने लगे हैं। मोदी सरकार ने किसानों के आंदोलन को कुचलने के लिए जो तरीके अपनाए, उसे न किसान भूले हैं, न देश की जनता भूली है। किसानों को जीप से कुचलने, उनके रास्ते में कील लगाने, झूठे आरोपों में फंसाकर जेल में डालने और सैकड़ों किसानों की मौत के बाद भी किसानों के हित में फैसले न लेने वाली मोदी सरकार चुनाव सामने देख किसान हित की बात करने लगी है।
राजेंद्र ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कांग्रेस पर कोरोना काल में मजदूरों को भड़काने का झूठा आरोप लगाकर उनके हितैषी बन रहे हैं। मजदूरों के हित की बात करने वाले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को बताना चाहिए कि 7 साल के कार्यकाल में मजदूरों को रोजगार देने उन्होंने कितने सार्वजनिक उपक्रम, उद्योग, सरकारी संस्थान खोले हैं? सच ये है कि जीएसटी और नोटबंदी लागू कर मोदी सरकार ने लाखों मजदूरों को बेरोजगार कर दिया है।
राजेंद्र ने पूछा है कि सात साल के कार्यकाल में मोदी सरकार ने किसानों के हित में कौन से फैसले किये? किसानों की आय दुगुना करने और कर्जमाफी का वादा करने के बाद आज तक वादा पूरा क्यों नहीं किया? हर साल 2 करोड़ बेरोजगार युवकों को रोजगार देने का वादा करने के बाद मोदी सरकार ने रोजगार के अवसर पैदा करने की बजाय करोड़ों लोगों की नौकरी क्यों छीनी? इन सवालों का जवाब मोदी को देना चाहिए। कार्पोरेट घरानों का हजारों करोड़ का लोन माफ करने वाली मोदी सरकार ने किसानों का कर्ज माफ क्यों नहीं किया। छत्तीसगढ़ सरकार की तरह देश भर के किसानों कर्जमाफी और उचित मूल्य पर अनाज की खरीदी की व्यवस्था होती तो पूरे देश के किसान आर्थिक रूप से संपन्न हो जाते। इसी तरह मोदी सरकार मनरेगा का बजट हर साल कम कर रही है। इस साल भी मनरेगा के बजट में 25 प्रतिशत की कटौती की गई है। ऐसे फैसले कर मोदी सरकार ने मजदूरों का कौन सा हित किया है?
राजेंद्र ने कहा कि कोरोना काल में मोदी सरकार ने 20 लाख करोड़ का पैकेज देने की घोषणा की थी। वह पैकेज कहां गया? जनता को इसका लाभ क्यों नहीं मिला? किसानों और मजदूरों का अहित करने वाले फैसलों के साथ करोड़ों लोगों का रोजगार छीनने के बाद अचानक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा किसान, मजदूर और बेरोजगारों के हित की फिक्र करने का सच जनता समझ चुकी है। बेहतर यही होगा कि पीएम मोदी देश की जनता को बहकाने का प्रयास करना बंद करें। ऐसे प्रयास सफल नहीं होंगे।