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एसीबी कोर्ट का फैसला : रिश्वतखोर आरआई व पटवारी को कुल 12 वर्ष कैद और सहायक को मिली 4 वर्ष कैद की सजा

दुर्ग (छत्तीसगढ़)। जमीन सीमांकन के लिए 30 हजार रुपए की मांग करने वाले राजस्व निरीक्षक और पटवारी के खिलाफ एंटी करप्शन ब्यूरो की विशेष अदालत द्वारा फैसला सुनाया गया है। दोनों आरोपियों को विभिन्न धाराओं के तहत कुल 12-12 वर्ष के कारावास व 5-5 हजार रुपए के अर्थदण्ड से दंडित किया गया है। साथ ही पटवारी के सहयोगी को 4 वर्ष कारावास व एक हजार रुपए के अर्थदण्ड से दंडित किए जाने का फैसला सुनाया गया। यह फैसला विशेष न्यायाधीश (भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम) डॉ. प्रज्ञा पचौरी की अदालत ने सुनाया है। अभियोजन पक्ष की ओर से विशेष अपर लोक अभियोजक ओमप्रकाश शर्मा ने पैरवी की थी।

मामला अहिवारा उप तहसील का है। मामले का शिकायतकर्ता राजकिशोर बेहरा ग्राम अहेरी स्थित अपने बड़े पिताजी भास्कर डाकुआ की 6 एकड़ जमीन पर आधुनिक पद्धति से खेती करना चाहता था। इसके लिए जमीन को 10 साल की लीज पर लेकर बैंक से लोन भी लिया था। जमीन पर फेंसिग लगाने के उद्देश्य से राजकिशोर ने अहेरी क्षेत्र के पटवारी गुलशन चोपड़ा (27 वर्ष) से संपर्क किया था। पटवारी गुलशन ने जमीन का खसरा नक्शा व बी-1 देने के ऐवज में 1500 रुपए की रकम ले ली थी। वहीं सीमांकन के लिए 30 हजार रुपए की मांग की जिसमें अहिवारा उप तहसील में पदस्थ राजस्व निरीक्षक (आरआई) अनिल बावनगढ़े (52 वर्ष) का भी हिस्सा शामिल था। राजकिशोर ने रिश्वत मांगे जाने के इस मामले की शिकायत एंटी करप्शन ब्यूरो (एसीबी) से की थी। शिकायत को पुख्ता करने एसीबी के अधिकारियों द्वारा राजकिशोर को टेप रिकार्डर और माइक्रो कैसेट उपलब्ध कराया गया। आरोपियों तथा शिकायतकर्ता के बीच रिश्वत की मांग संबंधी बातचीत रिकार्ड होने के बाद आरोपियों को ट्रेप किए जाने की योजना बनाई गई और शिकायतकर्ता को केमिकल लगे दो हजार व पांच सौ रुपए के नोट कुल रकम 12 हजार रुपए प्रदान किए गए। इस रकम में से बतौर रिश्वत आरआई को 7 हजार रुपए व पटवारी को 5 हजार रुपए दिए जाने थे। रकम देने के बाद एसीबी टीम को मोबाइल के मिस कॉल के माध्यम से संकेत देना था।
निर्धारित योजना के अनुसार राजकिशोर 29 मई 2017 को अहेरी खार पहुंच गया। वहीं एसीबी की टीम दूर से नजर रखे हुई थी। शाम लगभग 6 बजे आरोपी आरआई अनिल बावनगढ़े, पटवारी गुलशन चौपड़ा और उसका सहायक मौके पर पहुंचे। जहां राजकिशोर ने केमिल रंगे नोटों में से 7 हजार रुपए के नोट आरआई के हाथ में दिए। जिसे आरआई ने अपनी जेब में रख लिया। वहीं पटवारी को 5 हजार रुपए दिए जाने पर उसने यह रकम अपने सहयोगी नरेश कुर्रे के हाथ में दिलवाई। जिसके बाद संकेत मिलने पर एसीबी की टीम ने आरोपियों को दबोच लिया और उनके कब्जें से केमिकल लगें चिंहित नोटों को बरामद किया। एसीबी ने तीनों आरोपियों के खिलाफ दफा 120 बी, भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 7, 13(1) डी, सहपठित 13 (2) के तहत अपराध पंजीबद्ध कर प्रकरण को विचारण के लिए न्यायालय के समक्ष पेश किया था।
प्रकरण पर विचारण विशेष न्यायाधीश (भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम) डॉ. प्रज्ञा पचौरी की अदालत में किया गया। विचारण पश्चात अभियुक्त शंकर नगर निवासी आरआई अनिल बावनगढ़े, सिरसाकला (पुरानी भिलाई) निवासी गुलशन चौपड़ा को दोषी करार देते हुए दफा 120 (बी) के तहत 4-4 वर्ष कारावास, भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 7 के तहत 4-4 वर्ष तथा धारा 13(1) डी सहपठित धारा 13(2) के तहत 4-4 वर्ष कारावास तथा कुल 5-5 हजार रुपए के अर्थदण्ड से दंडित किया गया। दोनों अभियुक्तों की सजा साथ-साथ चलेंगी। वहीं पटवारी के सहायक ग्राम खेरथा निवासी नरेश कुर्रे को 4 वर्ष कारावास व एक हजार के अर्थदण्ड से दंडित किए जाने का फैसला सुनाया गया है।