Udanti Sitanadi Tiger Reserve में चौंकाने वाली खोज: दुर्लभ Indian Giant Flying Squirrel की नियमित उपस्थिति, पारिस्थितिक स्वास्थ्य का मजबूत संकेत

गरियाबंद, 14 अप्रैल 2026। छत्तीसगढ़ के Udanti Sitanadi Tiger Reserve (USTR) से एक अत्यंत दुर्लभ और रोमांचक खबर सामने आई है। पश्चिमी घाट की मूल निवासी Indian Giant Flying Squirrel — भारतीय विशालकाय उड़न गिलहरी — अब इस रिजर्व में नियमित रूप से देखी जा रही है।

वन अधिकारियों के अनुसार, यह उपस्थिति Udanti Sitanadi Tiger Reserve के पारिस्थितिक स्वास्थ्य में हो रहे उल्लेखनीय सुधार का सशक्त प्रमाण है। Deccan Chronicle की रिपोर्ट के अनुसार, इस दुर्लभ प्रजाति की पहली झलक कुछ महीने पहले मिली थी, और तब से यह जीव रिजर्व में नियमित रूप से दिखाई दे रहा है।


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Udanti Sitanadi Tiger Reserve में दुर्लभ प्रजाति की वापसी — वन अधिकारी उत्साहित

USTR के उप-निदेशक श्री वरुण कुमार जैन ने इस सूचना की पुष्टि करते हुए कहा कि यह उपस्थिति पारिस्थितिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है।

उन्होंने बताया कि Indian Giant Flying Squirrel एक ऐसी प्रजाति है जो केवल बहुत विशिष्ट और उन्नत वन परिस्थितियों में जीवित रह सकती है। इसलिए इसकी उपस्थिति स्वयं ही इस बात का प्रमाण है कि Udanti Sitanadi Tiger Reserve का जंगल पहले से कहीं अधिक स्वस्थ, घना और जैव-विविधता से समृद्ध हो रहा है।

वन्यजीव विशेषज्ञों के अनुसार, किसी संरक्षित क्षेत्र में ऐसी संवेदनशील प्रजातियों की उपस्थिति उस क्षेत्र की समग्र पारिस्थितिक गुणवत्ता का सबसे विश्वसनीय संकेतक होती है।


Indian Giant Flying Squirrel — क्या है यह अद्भुत दुर्लभ जीव?

आम गिलहरी से बिल्कुल अलग है यह प्रजाति

Indian Giant Flying Squirrel अपने आकार, व्यवहार और जीवन शैली में आम गिलहरी से पूरी तरह भिन्न है। यह आकार में काफी बड़ी होती है और लगभग पूरी तरह वन की ऊपरी परत — यानी वृक्षों की चोटियों — में रहती है।

यह जीव जमीन पर लगभग कभी नहीं उतरता। यह शाखाओं के बीच से उड़ान भरता और ग्लाइड करता हुआ एक पेड़ से दूसरे पेड़ तक पहुंचता है।

पानी नहीं पीती — फलों से लेती है नमी

इस प्रजाति की एक और अनूठी विशेषता यह है कि यह सीधे पानी नहीं पीती। यह अपनी प्यास रसीले फलों के सेवन से बुझाती है।

यह गिलहरी जंगल के पारिस्थितिक तंत्र में बीज प्रसार में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है, जिससे वन का प्राकृतिक पुनर्जनन होता रहता है।


“Arboreal Highways” — जंगल की अदृश्य हवाई सड़कें

कैनोपी कॉरिडोर है इस प्रजाति की जीवनरेखा

वन पारिस्थितिकीविद इसे “Arboreal Highways” कहते हैं — यानी पेड़ों की चोटियों से बना वह प्राकृतिक हवाई मार्ग, जिसके सहारे Indian Giant Flying Squirrel एक स्थान से दूसरे स्थान पर जाती है।

यह कैनोपी कॉरिडोर इस प्रजाति के लिए केवल आवाजाही का माध्यम नहीं, बल्कि इसका भोजन स्थान, प्रजनन क्षेत्र और शिकारियों से सुरक्षा का एकमात्र साधन भी है।

H4: कैनोपी टूटने से मंडराता है अस्तित्व का संकट

अगर इन पेड़ों की चोटियों की निरंतरता किसी भी कारण से टूटती है — चाहे अवैध पेड़ कटाई, अतिक्रमण, सड़क निर्माण या पर्यावास विखंडन से — तो इस प्रजाति के लिए अस्तित्व का संकट खड़ा हो जाता है।

यही कारण है कि Udanti Sitanadi Tiger Reserve में कैनोपी कॉरिडोर की सुरक्षा को वन विभाग की प्राथमिकता सूची में शामिल किया गया है।


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पश्चिमी घाट की प्रजाति Udanti Sitanadi Tiger Reserve में कैसे पहुंची?

मध्य भारत है पारिस्थितिक सेतु

यह एक स्वाभाविक प्रश्न है — आखिर पश्चिमी घाट की मूल निवासी यह प्रजाति मध्य भारत के छत्तीसगढ़ तक कैसे पहुंची?

USTR के उप-निदेशक वरुण कुमार जैन ने Deccan Chronicle को दिए अपने बयान में इसका उत्तर दिया। उन्होंने बताया कि मध्य भारतीय उच्चभूमि (Central Indian Highlands) एक महत्वपूर्ण पारिस्थितिक सेतु का काम करती है।

पश्चिमी घाट, पूर्वी घाट और हिमालय को जोड़ता है यह कॉरिडोर

यह फॉनल कॉरिडोर पश्चिमी घाट, पूर्वी घाट और हिमालयी वन परिदृश्य को आपस में जोड़ता है।

इसी सुरक्षित वन गलियारे के सहारे Indian Giant Flying Squirrel जैसी दुर्लभ प्रजातियां अपनी प्राकृतिक सीमाओं का विस्तार करती हुई Udanti Sitanadi Tiger Reserve तक पहुंची हैं।

यह तथ्य इस रिजर्व की भौगोलिक और पारिस्थितिक महत्ता को और भी अधिक रेखांकित करता है।


Udanti Sitanadi Tiger Reserve में 400 गिलहरियों की अनुमानित आबादी

रिपोर्ट के अनुसार, Udanti Sitanadi Tiger Reserve में वर्तमान में Indian Giant Flying Squirrel की अनुमानित आबादी लगभग 400 है।

यह संख्या इस प्रजाति की उपस्थिति की महत्ता को और अधिक स्पष्ट करती है। एक संरक्षित क्षेत्र में इतनी संख्या में किसी दुर्लभ प्रजाति का पाया जाना वन विभाग की संरक्षण नीतियों की सफलता को दर्शाता है।

वन अधिकारियों का कहना है कि यदि मौजूदा संरक्षण प्रयास जारी रहे, तो यह संख्या आने वाले वर्षों में और बढ़ सकती है।


“Weaving Back Squirrel Canopies” — Udanti Sitanadi Tiger Reserve का अनूठा संरक्षण अभियान

बड़े पेड़ लगाकर बनाया जा रहा नया पर्यावास

Udanti Sitanadi Tiger Reserve के अधिकारियों ने इस दुर्लभ प्रजाति की उपस्थिति को देखते हुए एक समर्पित संरक्षण अभियान शुरू किया है, जिसे “Weaving Back Squirrel Canopies” नाम दिया गया है।

इस अभियान का मुख्य उद्देश्य रिजर्व में बड़े और घने पेड़ लगाना है, ताकि उड़न गिलहरी के लिए बेहतर कैनोपी कॉरिडोर और पर्यावास तैयार किया जा सके।

भविष्य की पीढ़ियों के लिए जंगल को सुरक्षित करने की पहल

यह अभियान केवल एक प्रजाति के संरक्षण तक सीमित नहीं है। घने कैनोपी के विकास से पूरे जंगल का पारिस्थितिक तंत्र मजबूत होगा।

इससे अन्य वन्यजीव प्रजातियों, पक्षियों, कीटों और पादप जीवन को भी प्रत्यक्ष लाभ मिलेगा। यह अभियान वन संरक्षण के क्षेत्र में एक प्रेरणादायक मॉडल बन सकता है।


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शिकारियों पर कड़ी कार्रवाई — 24 आरोपी गिरफ्तार, अवैध शिकार पर लगाम

पिछले एक साल में चला कड़ा अभियान

Udanti Sitanadi Tiger Reserve में इस दुर्लभ प्रजाति की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए वन विभाग ने एंटी-पोचिंग अभियान को भी काफी तेज किया है।

Deccan Chronicle की रिपोर्ट के अनुसार, पिछले एक वर्ष में लगभग आधा दर्जन मामलों में करीब 24 शिकारियों को गिरफ्तार किया गया है।

अवैध शिकार पर जीरो टॉलरेंस की नीति

वन अधिकारियों का स्पष्ट संदेश है — Indian Giant Flying Squirrel सहित रिजर्व के किसी भी वन्यजीव के अवैध शिकार को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

गश्त तेज की गई है, स्थानीय मुखबिर तंत्र को सक्रिय किया गया है और तकनीकी निगरानी के माध्यम से वन क्षेत्र की चौकसी बढ़ाई गई है।

यह कड़ी कार्रवाई ही इस दुर्लभ प्रजाति की संख्या में स्थिरता और वृद्धि का एक प्रमुख कारण बनी है।


Udanti Sitanadi Tiger Reserve बन रहा है जैव-विविधता का नया गढ़

Udanti Sitanadi Tiger Reserve में Indian Giant Flying Squirrel की नियमित उपस्थिति, 400 की अनुमानित आबादी, “Weaving Back Squirrel Canopies” अभियान और 24 शिकारियों की गिरफ्तारी — ये सभी तथ्य मिलकर एक बड़ी और सुखद तस्वीर प्रस्तुत करते हैं।

यह तस्वीर बताती है कि Udanti Sitanadi Tiger Reserve न केवल बाघों का बल्कि अनेक दुर्लभ और संवेदनशील प्रजातियों का भी सुरक्षित आश्रय बनता जा रहा है। वन विभाग की सजगता, संरक्षण के प्रति प्रतिबद्धता और “Arboreal Highways” की रक्षा के प्रयास यदि इसी तरह जारी रहे, तो यह रिजर्व पूरे मध्य भारत में जैव-विविधता संरक्षण का एक अनुकरणीय और राष्ट्रीय स्तर पर पहचाने जाने वाला मॉडल बन सकता है।

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