Sushasan Tihar: बस्तर की महिलाओं के लिए बना आत्मनिर्भरता का बड़ा मंच

Sushasan Tihar अब केवल सरकारी योजनाओं और जनसमस्याओं के समाधान तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह ग्रामीण महिलाओं के लिए रोजगार और आत्मनिर्भरता का मजबूत माध्यम बनता जा रहा है। बस्तर जिले में आयोजित शिविरों में नारी शक्ति महिला समूह स्थानीय पारंपरिक व्यंजनों के जरिए अच्छी आमदनी हासिल कर रहा है।

ग्रामीणों से लेकर अधिकारियों और कर्मचारियों तक, सभी बस्तर के पारंपरिक स्वाद का आनंद ले रहे हैं। इससे महिलाओं की आय बढ़ने के साथ-साथ स्थानीय खानपान संस्कृति को भी नई पहचान मिल रही है।

यह भी पढ़ें: Improved Rice Scheme: छत्तीसगढ़ में नई राइस नीति पर बड़ा मंथन


Sushasan Tihar में नारी शक्ति महिला समूह की खास पहल

बस्तर विकासखंड के अंतर्गत आयोजित शिविरों में Nari Shakti Mahila Samuh Bastar द्वारा स्थानीय व्यंजन उपलब्ध कराए जा रहे हैं।

समूह की महिलाएं बेहद रियायती दरों पर:

  • मड़िया पेज
  • आमट
  • तिखुर शरबत
  • उड़द दाल बोबो

जैसे पारंपरिक व्यंजन लोगों को परोस रही हैं।

लोगों को पसंद आ रहा बस्तर का स्वाद

शिविर में आने वाले ग्रामीणों के अलावा ड्यूटी पर तैनात अधिकारी और कर्मचारी भी इन व्यंजनों को पसंद कर रहे हैं।

महिलाओं का कहना है कि लोग इन व्यंजनों के स्वाद की खूब सराहना कर रहे हैं।

join 4thnation channel: https://whatsapp.com/channel/0029VaOjosfFHWq7ssCngl1j


Sushasan Tihar में हर शिविर से 7 से 8 हजार की कमाई

नारी शक्ति महिला समूह की अध्यक्ष Revati Netam ने बताया कि हर शिविर में समूह को 7 से 8 हजार रुपए तक की आमदनी हो रही है।

उन्होंने कहा कि लगातार बढ़ती बिक्री से समूह से जुड़ी महिलाओं की व्यक्तिगत आय में भी उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई है।

महिलाओं को मिला स्वरोजगार का अवसर

महिला समूह का कहना है कि पहले स्थानीय व्यंजनों को सीमित पहचान मिलती थी, लेकिन अब Sushasan Tihar के जरिए उन्हें बड़ा मंच मिला है।

इससे महिलाएं आर्थिक रूप से मजबूत हो रही हैं।


Sushasan Tihar से स्थानीय संस्कृति को बढ़ावा

समूह की सचिव Paro Baghel ने बताया कि बस्तर के पारंपरिक खानपान को लोगों से शानदार प्रतिक्रिया मिल रही है।

उन्होंने कहा कि यह पहल स्थानीय संस्कृति को संरक्षित करने में भी मददगार साबित हो रही है।

पारंपरिक व्यंजनों की बढ़ रही पहचान

बस्तर के व्यंजनों की लोकप्रियता अब शिविरों के माध्यम से तेजी से बढ़ रही है।

इससे आने वाले समय में स्थानीय उत्पादों और खाद्य संस्कृति को बड़ा बाजार मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।


महिलाओं के हुनर को मिला नया मंच

समूह की सदस्य Bhagbatti Bhadre और अन्य महिलाओं ने कहा कि Sushasan Tihar ने उन्हें अपनी पारंपरिक पाक-कला दिखाने का अवसर दिया है।

इससे:

  • महिलाओं को आर्थिक लाभ मिल रहा है
  • स्थानीय व्यंजनों को पहचान मिल रही है
  • ग्रामीण महिलाओं का आत्मविश्वास बढ़ रहा है

प्रशासन की पहल की हो रही सराहना

शिविर में पहुंचे ग्रामीणों और अधिकारियों ने भी इस पहल की सराहना की है।

उनका कहना है कि ऐसे आयोजन ग्रामीण महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।

join 4thnation channel: https://whatsapp.com/channel/0029VaOjosfFHWq7ssCngl1j


Sushasan Tihar का ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर असर

विशेषज्ञों का मानना है कि Sushasan Tihar जैसे कार्यक्रम ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में मदद कर रहे हैं।

स्थानीय उत्पादों और पारंपरिक व्यंजनों की बिक्री बढ़ने से:

  • महिला समूहों की आय बढ़ रही है
  • स्वरोजगार को बढ़ावा मिल रहा है
  • स्थानीय संस्कृति को संरक्षण मिल रहा है

यह पहल आत्मनिर्भर ग्रामीण अर्थव्यवस्था की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।


Sushasan Tihar बस्तर की महिलाओं के लिए केवल एक सरकारी शिविर नहीं, बल्कि आत्मनिर्भरता और पहचान का नया मंच बनकर उभरा है। नारी शक्ति महिला समूह ने यह साबित कर दिया है कि पारंपरिक हुनर और स्थानीय संस्कृति को सही अवसर मिले तो ग्रामीण महिलाएं आर्थिक रूप से मजबूत बन सकती हैं।

हर शिविर में हजारों रुपए की कमाई और पारंपरिक व्यंजनों की बढ़ती लोकप्रियता इस बात का संकेत है कि आने वाले समय में बस्तर की खाद्य संस्कृति को और बड़ी पहचान मिल सकती है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *