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नारायणपुर में शिक्षा की नई पहल, 2,000 से अधिक बच्चों को मिला लाभ

रायपुर, 11 अक्टूबर 2026। छत्तीसगढ़ के नारायणपुर जिले में School Keenta Abhiyan और सेवा संकल्प अभियान के माध्यम से दूरस्थ क्षेत्रों के बच्चों को शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ने की महत्वपूर्ण पहल की जा रही है। इन अभियानों के तहत अब तक 2,000 से अधिक बच्चों को शिक्षा से जोड़ा जा चुका है, जबकि दुर्गम और पहुंचविहीन इलाकों में 34 नई वैकल्पिक प्राथमिक शालाएं संचालित की जा रही हैं।

घने जंगलों, पहाड़ी रास्तों और गांवों से स्कूलों की अधिक दूरी के कारण कई बच्चों के लिए नियमित पढ़ाई करना मुश्किल था। ऐसे में जिला प्रशासन ने स्थानीय परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए गांवों के नजदीक ही शिक्षा की व्यवस्था शुरू की है।

इस पहल का उद्देश्य केवल बच्चों का स्कूल में नामांकन कराना नहीं, बल्कि उन्हें नियमित पढ़ाई के अवसर उपलब्ध कराना और भविष्य में आगे बढ़ने के लिए जरूरी सुविधाओं से जोड़ना भी है।

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School Keenta Abhiyan से दूरस्थ गांवों तक पहुंची शिक्षा

नारायणपुर जिले के कई गांव भौगोलिक दृष्टि से दुर्गम क्षेत्रों में स्थित हैं। यहां रहने वाले बच्चों को प्राथमिक शिक्षा प्राप्त करने के लिए लंबी दूरी तय करनी पड़ती थी। कठिन रास्तों और आवागमन की समस्याओं के कारण उनकी पढ़ाई प्रभावित होती थी।

इन चुनौतियों को देखते हुए जिला प्रशासन ने सेवा संकल्प अभियान और स्कूल केईन्ता अभियान के माध्यम से वैकल्पिक प्राथमिक शालाओं की व्यवस्था की है।

प्रशासन की इस पहल के तहत अब तक 2,000 से अधिक बच्चों को शिक्षा से जोड़ा गया है। इसके साथ ही अत्यंत दुर्गम क्षेत्रों में 34 वैकल्पिक प्राथमिक शालाएं शुरू की गई हैं, ताकि बच्चों को अपने गांव या आसपास ही पढ़ने का अवसर मिल सके।

इस व्यवस्था से उन परिवारों को विशेष राहत मिली है, जिनके बच्चों के लिए रोजाना लंबी दूरी तय करके स्कूल पहुंचना कठिन था।

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घमंडी गांव में 10 किलोमीटर पैदल चलने की मजबूरी खत्म

स्कूल केईन्ता अभियान का प्रभाव संकुल केंद्र गारपा के अंतर्गत आने वाले घमंडी गांव में स्पष्ट रूप से दिखाई देता है। यहां के बच्चों को पहले प्राथमिक शिक्षा प्राप्त करने के लिए कोड़ेनार तक लगभग 10 किलोमीटर पैदल जाना पड़ता था।

घने जंगलों, पथरीले रास्तों और लंबी दूरी के कारण बच्चों के लिए नियमित रूप से स्कूल पहुंचना चुनौतीपूर्ण था। इस समस्या का असर उनकी पढ़ाई और शैक्षणिक निरंतरता पर पड़ता था।

बच्चों और अभिभावकों की परेशानी को समझते हुए जिला प्रशासन ने घमंडी गांव में ही वैकल्पिक प्राथमिक शाला शुरू की। अब गांव के बच्चों को शिक्षा प्राप्त करने के लिए रोजाना लंबी दूरी तय करने की मजबूरी से राहत मिली है।

यह बदलाव दिखाता है कि स्थानीय जरूरतों के अनुसार स्कूल की सुविधा उपलब्ध कराना शिक्षा तक पहुंच बढ़ाने का प्रभावी तरीका हो सकता है।

घमंडी के स्कूल में 30 बच्चे पंजीकृत

वर्तमान में वैकल्पिक प्राथमिक शाला घमंडी में 30 बच्चे पंजीकृत हैं। गांव के स्थानीय शिक्षा दूत कोसा राम वड्डे बच्चों को नियमित अध्ययन से जोड़ने और स्कूल की व्यवस्था को सुचारू रूप से चलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।

स्थानीय स्तर पर शिक्षण व्यवस्था होने से बच्चों को पढ़ाई के लिए अधिक सुलभ वातावरण मिल रहा है। साथ ही, अभिभावकों को भी बच्चों की शिक्षा को लेकर पहले की तुलना में सुविधा मिली है।

दूरस्थ इलाकों में स्थानीय लोगों की भागीदारी शिक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने में मदद कर सकती है। इससे बच्चों की पढ़ाई में निरंतरता बनाए रखने और शिक्षा के प्रति रुचि बढ़ाने का अवसर मिलता है।

School Keenta Abhiyan: 22 बच्चों को मिले जाति प्रमाण पत्र

घमंडी गांव में शिक्षा के साथ-साथ बच्चों को जरूरी सरकारी दस्तावेज उपलब्ध कराने की दिशा में भी कदम उठाए गए हैं। वैकल्पिक प्राथमिक शाला में पिछले वर्ष नामांकित 22 बच्चों के जाति प्रमाण पत्र तैयार कर वितरित किए गए हैं।

जाति प्रमाण पत्र मिलने से बच्चों और उनके परिवारों के लिए भविष्य में पात्रता के अनुसार विभिन्न सरकारी छात्रवृत्तियों, शैक्षणिक योजनाओं और अन्य सुविधाओं का लाभ लेने का रास्ता आसान हो सकता है।

यह पहल इसलिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि दूरस्थ क्षेत्रों में रहने वाले परिवारों को कई बार आवश्यक दस्तावेज बनवाने के लिए कार्यालयों तक पहुंचने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।

स्कूल के माध्यम से शिक्षा और प्रशासनिक सुविधाओं को बच्चों के करीब लाने का प्रयास विकास को अधिक समावेशी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

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दूरस्थ क्षेत्रों में शिक्षा पहुंचाने का संकल्प

नारायणपुर जिला प्रशासन की यह पहल बताती है कि शिक्षा की राह में आने वाली भौगोलिक बाधाओं को स्थानीय स्तर पर व्यवस्था विकसित करके कम किया जा सकता है। वैकल्पिक प्राथमिक शालाओं के संचालन से उन बच्चों को पढ़ाई का अवसर मिल रहा है, जिनके लिए नियमित स्कूल तक पहुंचना मुश्किल था।

स्कूल केईन्ता अभियान के तहत बच्चों को शिक्षा से जोड़ने के साथ-साथ आवश्यक दस्तावेज उपलब्ध कराने के प्रयास भी किए जा रहे हैं। इससे उनकी आगे की पढ़ाई और सरकारी योजनाओं तक पहुंच के अवसर बेहतर हो सकते हैं।

हालांकि, इस पहल की दीर्घकालिक सफलता के लिए स्कूलों में नियमित कक्षाएं, पर्याप्त शिक्षण सामग्री, गुणवत्तापूर्ण पढ़ाई और बच्चों की निरंतर उपस्थिति सुनिश्चित करना भी आवश्यक होगा।

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School Keenta Abhiyan नारायणपुर के दूरस्थ गांवों में शिक्षा की पहुंच बढ़ाने की एक महत्वपूर्ण पहल बनकर सामने आया है। 2,000 से अधिक बच्चों को शिक्षा से जोड़ना, 34 वैकल्पिक प्राथमिक शालाओं का संचालन और घमंडी गांव में 22 बच्चों को जाति प्रमाण पत्र उपलब्ध कराना इस प्रयास के प्रमुख उदाहरण हैं। गांवों के नजदीक स्कूल उपलब्ध होने से बच्चों को लंबी दूरी तय करने की परेशानी से राहत मिली है। यदि इसी तरह शिक्षा की गुणवत्ता और नियमितता पर ध्यान दिया जाता रहा, तो यह अभियान दूरस्थ क्षेत्रों के बच्चों के बेहतर भविष्य की नींव मजबूत कर सकता है।

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