RTE Students Labour मामले ने छत्तीसगढ़ की शिक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सुरजपुर जिले के एक स्कूल में आरटीई कोटे के बच्चों से निर्माण और पेंटिंग का काम कराने की खबर सामने आई। जैसे ही यह मामला मीडिया में आया, छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने स्वतः संज्ञान लेते हुए सख्त रुख अपनाया। अदालत ने इसे बच्चों के अधिकारों से जुड़ा गंभीर विषय माना। इसलिए सोमवार को हुई सुनवाई में राज्य के स्कूल शिक्षा सचिव को व्यक्तिगत हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया गया। अब इस मामले की अगली सुनवाई 11 मार्च को होगी।
RTE Students Labour पर हाईकोर्ट का कड़ा रुख
RTE Students Labour प्रकरण पर छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने स्पष्ट कहा कि आरोप बेहद गंभीर हैं। मुख्य न्यायाधीश Ramesh Sinha और न्यायमूर्ति Ravindra Kumar Agrawal की खंडपीठ ने मीडिया रिपोर्ट का हवाला देते हुए स्वतः संज्ञान लिया।
रिपोर्ट में बताया गया कि सुरजपुर जिले के तिलसिवा स्थित Mukhya Mantri DAV Public School में आरटीई कोटे के छात्रों से सीमेंट और रेत ढुलवाने के साथ कक्षाओं की पुताई करवाई गई। इतना ही नहीं, आरोप है कि स्कूल प्राचार्य ने बच्चों को काम न करने पर स्कूल से निकालने की धमकी दी।
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जब अभिभावकों ने विरोध किया, तब कथित तौर पर प्राचार्य ने कहा कि बच्चों को मुफ्त बैग, किताबें और यूनिफॉर्म मिलती हैं, इसलिए शिकायत का कोई आधार नहीं है। अदालत ने इन दावों को गंभीर माना और कहा कि यदि यह सही है तो यह बच्चों के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन है।
राज्य की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता Shashank Thakur ने कोर्ट को बताया कि तीन सदस्यीय जांच समिति गठित की गई है। इसके बावजूद अदालत ने स्कूल शिक्षा सचिव को 11 मार्च तक व्यक्तिगत हलफनामा देने का निर्देश दिया।
अधिक जानकारी के लिए आप The Times of India की रिपोर्ट और Chhattisgarh High Court की आधिकारिक वेबसाइट देख सकते हैं।
क्या है पूरा मामला
यह पूरा मामला सुरजपुर जिले से जुड़ा है। वहां आरटीई कोटे के तहत दाखिला लेने वाले बच्चों के साथ कथित रूप से श्रम करवाने की खबर सामने आई। आरटीई यानी राइट टू एजुकेशन एक्ट का मकसद आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के बच्चों को मुफ्त और अनिवार्य शिक्षा देना है।
हालांकि, आरोप है कि स्कूल प्रशासन ने इन बच्चों से निर्माण कार्य और पेंटिंग करवाई। यह मामला तब तूल पकड़ा जब खबर सार्वजनिक हुई। इसके बाद हाईकोर्ट ने स्वतः संज्ञान लिया। पहले से लंबित जनहित याचिकाओं के साथ इसे 11 मार्च को सूचीबद्ध किया गया था। लेकिन आरोपों की गंभीरता को देखते हुए अदालत ने तत्काल सुनवाई की।
Key Facts: RTE Students Labour
- हाईकोर्ट ने स्वतः संज्ञान लेकर मामले की तत्काल सुनवाई की।
- सुरजपुर जिले के तिलसिवा स्थित स्कूल पर गंभीर आरोप लगे।
- छात्रों से सीमेंट ढुलवाने और पेंटिंग कराने का दावा।
- प्राचार्य पर बच्चों को निष्कासन की धमकी देने का आरोप।
- राज्य सरकार ने तीन सदस्यीय जांच समिति गठित की।
Impact/Reactions: शिक्षा व्यवस्था पर बड़ा सवाल
RTE Students Labour मामला सामने आने के बाद अभिभावकों में आक्रोश है। वे इसे बच्चों के सम्मान और अधिकारों पर सीधा हमला मान रहे हैं। दूसरी ओर, शिक्षा विभाग ने जांच समिति बनाकर स्थिति स्पष्ट करने की कोशिश की है।
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यदि आरोप सिद्ध होते हैं तो संबंधित जिम्मेदारों पर सख्त कार्रवाई हो सकती है। साथ ही, यह मामला राज्य की शिक्षा व्यवस्था की निगरानी प्रणाली पर भी सवाल उठाता है। अब सबकी नजर 11 मार्च की सुनवाई पर है।
अंततः RTE Students Labour प्रकरण ने यह स्पष्ट कर दिया है कि बच्चों के अधिकारों से जुड़े मामलों में अदालत कोई ढिलाई नहीं बरतती। हाईकोर्ट का सख्त रुख एक बड़ा संदेश है। अब जांच रिपोर्ट और शिक्षा सचिव के हलफनामे के बाद स्थिति साफ होगी। यदि आरोप सही साबित होते हैं, तो दोषियों पर कार्रवाई तय मानी जा रही है।

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