Narayanpur जिले का लाइवलीहुड कॉलेज अब उन लोगों के लिए नई उम्मीद का केंद्र बन गया है, जो कभी नक्सलवाद के रास्ते पर भटक गए थे। जिला प्रशासन की अनूठी पहल ने आत्मसमर्पित नक्सलियों को समाज की मुख्यधारा में लौटने का नया अवसर दिया है।
आज ये लोग हथियार छोड़कर सम्मानजनक और आत्मनिर्भर जीवन की ओर तेजी से कदम बढ़ा रहे हैं। पुनर्वास केंद्र में उन्हें रोजगार, प्रशिक्षण और सरकारी योजनाओं से जोड़ने का काम लगातार किया जा रहा है।
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वोटर आईडी से मिली नई पहचान
Narayanpur प्रशासन ने पुनर्वासित लोगों को लोकतांत्रिक व्यवस्था से जोड़ने के लिए महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। इसी कड़ी में 8 लोगों को नए वोटर आईडी कार्ड वितरित किए गए हैं।
इसके अलावा 25 लोगों का ऑनलाइन पंजीयन पूरा हो चुका है। वहीं, 40 पुनर्वासित लोगों से फॉर्म-6 भरवाकर उन्हें मतदान प्रक्रिया में शामिल करने की तैयारी की गई है।
यह पहल केवल दस्तावेज उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं है, बल्कि उन्हें एक जिम्मेदार नागरिक के रूप में पहचान दिलाने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।
लोकतंत्र से जुड़ने की बड़ी पहल
विशेषज्ञों का मानना है कि जब कोई व्यक्ति लोकतांत्रिक प्रक्रिया से जुड़ता है, तो उसमें समाज के प्रति जिम्मेदारी और विश्वास दोनों बढ़ते हैं। Narayanpur में प्रशासन इसी सोच के साथ काम कर रहा है।
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Narayanpur में शुरू हुआ ट्रैक्टर प्रशिक्षण
हाल ही में कलेक्टर ने लाइवलीहुड कॉलेज का औचक निरीक्षण किया। इस दौरान वहां रह रहे 40 आत्मसमर्पित नक्सलियों ने ट्रैक्टर चलाना सीखने की इच्छा जताई।
दिलचस्प बात यह रही कि इनमें से कई लोग ऐसे थे जिन्होंने कभी साइकिल तक नहीं चलाई थी। इसके बावजूद उन्होंने ट्रैक्टर ड्राइविंग और उसकी मरम्मत सीखने का उत्साह दिखाया।
कलेक्टर ने उनकी इच्छा को गंभीरता से लेते हुए तुरंत कार्रवाई की और सोमवार से ही ट्रैक्टर प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू करा दिया गया।
प्रशिक्षण में क्या-क्या सिखाया जा रहा है?
इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में प्रतिभागियों को कई महत्वपूर्ण तकनीकी जानकारियां दी जा रही हैं। इनमें शामिल हैं:
- ट्रैक्टर चलाने की बेसिक ट्रेनिंग
- सड़क सुरक्षा नियम
- ट्रैक्टर की मरम्मत और मेंटेनेंस
- कृषि कार्यों में मशीनों का उपयोग
- रोजगार और स्वरोजगार की जानकारी
यह कार्यक्रम केवल ड्राइविंग सिखाने तक सीमित नहीं है, बल्कि उन्हें भविष्य में रोजगार दिलाने की दिशा में भी बड़ा कदम है।
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आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ते कदम
Narayanpur का यह पुनर्वास केंद्र अब बदलाव की नई मिसाल बन रहा है। यहां रहने वाले लोग अब अपने भविष्य को लेकर सकारात्मक सोच विकसित कर रहे हैं।
ट्रैक्टर प्रशिक्षण के बाद कई लोग कृषि कार्यों और मशीनरी संचालन में रोजगार पा सकेंगे। इससे उनके परिवारों की आर्थिक स्थिति भी मजबूत होगी।
विशेषज्ञों के अनुसार स्किल डेवलपमेंट कार्यक्रम समाज में स्थायी बदलाव लाने का सबसे प्रभावी तरीका माना जाता है। Narayanpur में इसी मॉडल पर काम किया जा रहा है।
परिवारों को भी मिल रहा फायदा
पुनर्वासित लोगों के परिवारों में भी इस बदलाव का सकारात्मक असर दिखाई दे रहा है। बच्चों की पढ़ाई, स्वास्थ्य और सामाजिक जीवन में सुधार आने लगा है।
अब ये परिवार भय और अस्थिरता के माहौल से निकलकर सामान्य जीवन की ओर लौट रहे हैं।
डर से विश्वास तक का सफर
Narayanpur के पुनर्वास केंद्र में आज जो चेहरे दिखाई देते हैं, उनमें अब डर की जगह आत्मविश्वास नजर आता है।
जो लोग कभी बंदूक के साए में जी रहे थे, वे अब ट्रैक्टर और तकनीकी प्रशिक्षण के जरिए नई जिंदगी की शुरुआत कर रहे हैं।
राज्य सरकार की विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ भी उन्हें दिया जा रहा है। इससे वे समाज में सम्मानजनक तरीके से जीवन जीने के लिए प्रेरित हो रहे हैं।
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सरकार की योजनाओं का मिल रहा लाभ
Narayanpur प्रशासन द्वारा पुनर्वासित लोगों को कई सरकारी योजनाओं से जोड़ा जा रहा है। इनमें रोजगार, कौशल विकास और पहचान से जुड़ी सुविधाएं शामिल हैं।
सरकार का उद्देश्य केवल आत्मसमर्पण करवाना नहीं, बल्कि उन्हें समाज की मुख्यधारा में पूरी तरह स्थापित करना है।
इस पहल से यह संदेश भी जा रहा है कि सही अवसर मिलने पर कोई भी व्यक्ति अपने जीवन की दिशा बदल सकता है।
Narayanpur का लाइवलीहुड कॉलेज अब परिवर्तन और विश्वास का प्रतीक बन चुका है। यहां आत्मसमर्पित नक्सलियों को केवल आश्रय नहीं, बल्कि नई पहचान, रोजगार और सम्मानजनक जीवन का अवसर मिल रहा है।
वोटर आईडी, ट्रैक्टर प्रशिक्षण और कौशल विकास जैसे कदम यह साबित कर रहे हैं कि सही मार्गदर्शन और अवसर मिलने पर जिंदगी बदली जा सकती है। Narayanpur मॉडल अब पूरे राज्य के लिए प्रेरणा बनता जा रहा है।
