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Munga Plantation Campaign: छत्तीसगढ़ में सवा करोड़ पौधे लगाने की तैयारी

Munga Plantation Campaign: छत्तीसगढ़ में पर्यावरण संरक्षण और पोषण को बढ़ावा देने के लिए घर-घर मुनगा लगाने की तैयारी की जा रही है। राज्य में घरों, स्कूलों, अस्पतालों, बस्तियों और सार्वजनिक स्थानों पर सवा करोड़ मुनगा यानी सहजन के पौधे लगाए जाएंगे। इस अभियान के तहत वन विभाग 60 लाख और उद्यानिकी विभाग 65 लाख पौधे उपलब्ध कराएगा। पौधरोपण के साथ उनकी देखभाल और नियमित निगरानी पर भी जोर दिया जाएगा।

प्रस्तावित अभियान का नाम ‘हर घर मुनगा, घर-घर मुनगा’ रखा गया है। इसकी शुरुआत फरवरी 2027 से की जाएगी, लेकिन पौधे लगाने के लिए उपयुक्त जगह तलाशने के निर्देश अभी से जारी कर दिए गए हैं। अभियान में आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं की महत्वपूर्ण भूमिका होगी।

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Munga Plantation Campaign की शुरुआत फरवरी 2027 से

राज्य में मुनगा पौधों की संख्या बढ़ाने के लिए व्यापक स्तर पर तैयारी की जा रही है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, प्रदेश में पहले से ही 16 लाख से अधिक मुनगा पौधे मौजूद हैं। इनमें से ज्यादातर घरों और बस्तियों की खाली जमीन पर लगाए गए हैं।

अब प्रस्तावित अभियान के तहत सवा करोड़ नए पौधे लगाने की योजना है। इसके लिए घरों के आंगन, कॉलोनियों, गली-मोहल्लों और बस्तियों में उपलब्ध खाली जगहों का उपयोग किया जाएगा। सड़क किनारे मौजूद खाली सरकारी जमीन पर भी पौधरोपण के लिए विचार किया जा रहा है।

हालांकि, खासकर शहरी क्षेत्रों में पौधों के लिए सुरक्षित और उपयुक्त जगह तलाशना चुनौतीपूर्ण हो सकता है। पौधों को लगाने के बाद उनकी सुरक्षा और नियमित देखभाल सुनिश्चित करना भी अभियान की सफलता के लिए जरूरी होगा।

Munga Plantation Campaign में आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं की अहम भूमिका

इस अभियान में प्रदेश की लगभग सवा लाख आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को जिम्मेदारी दिए जाने की जानकारी सामने आई है। कार्यकर्ता आंगनबाड़ी केंद्रों में आने वाले बच्चों और गर्भवती महिलाओं के घरों तक पहुंचेंगी और वहां पौधे लगाने की संभावनाएं देखेंगी।

जिन घरों में पर्याप्त जगह होगी, वहां आंगन में मुनगा लगाया जा सकता है। जिन परिवारों के घरों के आसपास उपयुक्त स्थान उपलब्ध होगा, वहां भी पौधरोपण किया जाएगा। इसके अतिरिक्त बस्तियों, मोहल्लों और कॉलोनियों की खाली जमीन पर पौधे लगाने की योजना है।

कार्यकर्ताओं को केवल पौधे लगवाने तक सीमित नहीं रखा जाएगा। उन्हें यह भी देखना होगा कि पौधे सुरक्षित हैं या नहीं और उनकी वृद्धि कैसी हो रही है। इस तरह पौधरोपण के साथ निगरानी को भी अभियान का हिस्सा बनाया गया है।

मोबाइल एप से होगी पौधों की निगरानी

हर हफ्ते फोटो अपलोड करने की व्यवस्था

मुनगा पौधों की स्थिति पर नजर रखने के लिए ‘मुनगा एप’ तैयार किया गया है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, यह एप आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के मोबाइल फोन पर उपलब्ध कराया गया है।

कार्यकर्ताओं को लगाए गए पौधों की तस्वीरें हर हफ्ते एप पर अपलोड करनी होंगी। इससे अधिकारियों को पौधों की स्थिति, उनकी सुरक्षा और वृद्धि की जानकारी मिल सकेगी।

आंगनबाड़ी केंद्रों में बच्चों की उपस्थिति, भोजन और अन्य गतिविधियों से जुड़ी जानकारी जिस तरह डिजिटल माध्यम से दर्ज की जाती है, उसी तरह मुनगा पौधों की रिपोर्टिंग भी की जाएगी।

इस व्यवस्था का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि पौधरोपण केवल औपचारिक गतिविधि बनकर न रह जाए। नियमित तस्वीरों और रिपोर्ट के माध्यम से यह पता लगाने में मदद मिल सकती है कि पौधे सुरक्षित हैं या उन्हें देखभाल की जरूरत है।

पौधों की देखभाल में स्थानीय लोगों की भागीदारी

सार्वजनिक स्थानों और बस्तियों में लगाए जाने वाले पौधों को नियमित पानी देना और उनकी सुरक्षा करना जरूरी होगा। इसके लिए स्थानीय लोगों की मदद लेने की योजना बनाई गई है।

जानकारी के अनुसार, संबंधित क्षेत्र से एक व्यक्ति को पौधों की रोजमर्रा की देखभाल में सहयोग के लिए अधिकृत किया जाएगा। इस व्यक्ति का चयन आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं द्वारा किया जाएगा।

स्थानीय व्यक्ति पानी देने और पौधों को सुरक्षित रखने में मदद करेगा, जबकि आंगनबाड़ी कार्यकर्ता उनकी स्थिति की निगरानी कर रिपोर्ट अपलोड करेंगी। इस व्यवस्था से सामुदायिक भागीदारी बढ़ाने और पौधों के सूखने या क्षतिग्रस्त होने की आशंका कम करने में मदद मिल सकती है।

मुनगा पौधे क्यों हैं उपयोगी?

मुनगा, जिसे सहजन भी कहा जाता है, पोषण की दृष्टि से उपयोगी पौधा है। इसकी पत्तियों में प्रोटीन, विटामिन और विभिन्न खनिज तत्व पाए जाते हैं। इसकी फलियों का इस्तेमाल सब्जी के रूप में किया जाता है।

घर के आसपास मुनगा लगाने से पौधे के बड़े होने पर परिवारों को पत्तियां और फलियां स्थानीय स्तर पर उपलब्ध हो सकती हैं। इससे भोजन में विविधता लाने में मदद मिल सकती है।

हालांकि, पौधों से लाभ मिलने के लिए उनका सही तरीके से विकास होना जरूरी है। इसके लिए उपयुक्त स्थान, पानी, सुरक्षा और नियमित देखभाल की आवश्यकता होगी।

सवा करोड़ पौधों का लक्ष्य, निगरानी होगी अहम

छत्तीसगढ़ का ‘हर घर मुनगा, घर-घर मुनगा’ अभियान बड़े स्तर पर पौधरोपण और पोषण जागरूकता की पहल है। वन विभाग और उद्यानिकी विभाग की ओर से कुल सवा करोड़ पौधे उपलब्ध कराने की योजना है, जबकि आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और स्थानीय लोगों को उनकी देखभाल से जोड़ने की तैयारी है।

Munga Plantation Campaign की सफलता केवल सवा करोड़ पौधे लगाने के लक्ष्य पर निर्भर नहीं करेगी, बल्कि यह भी महत्वपूर्ण होगा कि लगाए गए पौधों में से कितने सुरक्षित रहकर बड़े होते हैं। उपयुक्त स्थानों का चयन, नियमित पानी, स्थानीय लोगों की भागीदारी और मोबाइल एप के जरिए निगरानी इस अभियान को प्रभावी बनाने में अहम भूमिका निभा सकते हैं। फरवरी 2027 में प्रस्तावित शुरुआत के बाद अभियान की वास्तविक प्रगति और पौधों के संरक्षण की स्थिति महत्वपूर्ण होगी।

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