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Durg Kavi Sammelan: 58 साल पुरानी परंपरा में कविताओं का जादू

Durg Kavi Sammelan का आयोजन 17 अक्टूबर को दुर्ग के पुरानी गंज मंडी स्थित गंजपारा दुर्गोत्सव समिति, दुर्गा धाम के प्रांगण में किया गया। विगत 58 वर्षों से चली आ रही साहित्यिक परंपरा को आगे बढ़ाते हुए आयोजित इस कवि सम्मेलन में देश के अलग-अलग शहरों से आए कवियों ने अपनी रचनाओं का पाठ किया। कविता, हास्य-व्यंग्य, देशभक्ति और गीतों से सजे कार्यक्रम में श्रोताओं ने प्रस्तुतियों का आनंद लिया।

कार्यक्रम की शुरुआत अतिथियों द्वारा मां शारदे के तैलचित्र पर माल्यार्पण और दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुई। इसके बाद आमंत्रित अतिथियों और कवियों का स्वागत किया गया। आयोजन ने दुर्ग की साहित्यिक और सांस्कृतिक परंपरा को एक बार फिर मंच प्रदान किया।

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Durg Kavi Sammelan में शामिल हुए प्रमुख अतिथि

इस साहित्यिक आयोजन में छत्तीसगढ़ शासन के शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव, सांसद विजय बघेल, पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल, विधायक ललित चंद्राकर और पूर्व विधानसभा अध्यक्ष प्रेम प्रकाश पांडे प्रमुख रूप से उपस्थित रहे।

इसके अलावा पूर्व विधायक अरुण वोरा, पूर्व महापौर धीरज बाकलीवाल, कांग्रेस कमेटी के महामंत्री राजेंद्र साहू, पूर्व महापौर आर.एन. वर्मा, दुर्ग ग्रामीण जिला अध्यक्ष राकेश ठाकुर और समिति के संरक्षक संतोष रूंगटा सहित अन्य अतिथियों ने कार्यक्रम में सहभागिता की।

संजय रूंगटा, चतुर्भुज राठी, किशोर जैन, विनीत जैन, समिति अध्यक्ष रवि पिडिआर, कार्यकारी अध्यक्ष अमित यादव, कोषाध्यक्ष जितेंद्र राठी, एल्डरमैन तुलसी साहू और सुरेश गुप्ता भी आयोजन में शामिल हुए।

कार्यक्रम का संचालन मनोज शर्मा ने किया, जबकि आभार प्रदर्शन संतोष रूंगटा ने किया।

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मयंक शर्मा की कविता ने Durg Kavi Sammelan में बांधा समां

दुर्ग के युवा कवि मयंक शर्मा ने कवि सम्मेलन का संचालन करते हुए अपनी प्रस्तुति और अंदाज से श्रोताओं का ध्यान आकर्षित किया। तिरंगे के रंगों पर आधारित उनकी कविता को श्रोताओं ने खड़े होकर सराहा।

कविता में एक छात्र और शिक्षक के संवाद के माध्यम से तिरंगे के रंगों का उल्लेख किया गया। रचना की अंतिम पंक्तियों में पिता के तिरंगे में लिपटकर घर लौटने का मार्मिक दृश्य सामने आया, जिसने देशभक्ति और बलिदान की भावना को अभिव्यक्त किया।

इस प्रस्तुति ने कार्यक्रम में भावनात्मक माहौल बनाया और श्रोताओं से भरपूर सराहना प्राप्त की।

अल्पना आनंद और एकाग्र शर्मा की शानदार प्रस्तुति

बिहार के नालंदा से आईं कवयित्री अल्पना आनंद ने अपने ओढ़नी गीत के माध्यम से धार्मिक और सांस्कृतिक भावनाओं को प्रस्तुत किया। उनकी कविता में राम-सीता, शिव-सती, मीरा और मां दुर्गा के संदर्भों के जरिए ओढ़नी को अनुराग, भक्ति और शक्ति के प्रतीक के रूप में चित्रित किया गया।

इंदौर से आए कवि एकाग्र शर्मा ने भगवान शिव, श्रीराम और हनुमान से जुड़ी रचना प्रस्तुत की। उनकी कविता में हिंदी भाषा के प्रति प्रेम को हनुमान के हृदय में श्रीराम के निवास की उपमा के माध्यम से व्यक्त किया गया।

दोनों कवियों की प्रस्तुतियों ने सम्मेलन में भक्ति, संस्कृति और भाषा के प्रति सम्मान का भाव सामने रखा।

हास्य, सामाजिक संदेश और गीतों से सजी महफिल

प्रयागराज से आए हास्य कवि अखिलेश द्विवेदी ने हास्य और व्यंग्य के माध्यम से श्रोताओं का मनोरंजन किया। उनकी रचना का संदेश था कि व्यक्ति को अपने दुखों के बीच भी दूसरों के साथ खुशी बांटनी चाहिए और जीवन को सकारात्मकता के साथ जीना चाहिए।

दिल्ली से आए सुदीप भोला ने मोबाइल और सोशल मीडिया पर रील बनाने की बढ़ती प्रवृत्ति पर कविता सुनाई। उनकी रचना में बेटियों की पढ़ाई के लिए मोबाइल खरीदने और बाद में उसी मोबाइल का इस्तेमाल पढ़ाई के बजाय रील बनाने में होने के विरोधाभास को प्रस्तुत किया गया। कविता ने डिजिटल आदतों और शिक्षा के बीच संतुलन की जरूरत पर ध्यान खींचा।

मुंबई से आए गीतकार चंदन राय ने प्रेम और बदलते समय पर आधारित गीत प्रस्तुत किया। उनकी रचना में बीते रिश्तों की याद और समय के साथ लोगों के बदलते व्यवहार को भावपूर्ण अंदाज में व्यक्त किया गया।

इन विविध प्रस्तुतियों ने Durg Kavi Sammelan को देशभक्ति, भक्ति, हास्य, सामाजिक सरोकार और प्रेम के रंगों से भर दिया।

दुर्ग की साहित्यिक परंपरा को मिला नया आयाम

Durg Kavi Sammelan ने 58 वर्षों से चली आ रही साहित्यिक परंपरा को आगे बढ़ाते हुए कविता और संस्कृति के प्रति लोगों के जुड़ाव को प्रदर्शित किया। देश के विभिन्न शहरों से आए कवियों ने अपनी रचनाओं के माध्यम से श्रोताओं को कभी भावुक किया, कभी हंसाया और कभी सामाजिक विषयों पर सोचने के लिए प्रेरित किया। गंजपारा दुर्गोत्सव समिति का यह आयोजन दुर्ग की सांस्कृतिक पहचान और साहित्यिक विरासत को जीवंत बनाए रखने की दिशा में उल्लेखनीय रहा।

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