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Durg Gurukul में दीपावली पर नुक्कड़ नाटक और रचनात्मक प्रतियोगिता

दुर्ग, 2 नवंबर 2026। Durg Gurukul में दीपावली के अवसर पर बच्चों की रचनात्मकता, कलात्मक प्रतिभा और सामाजिक जागरूकता को प्रोत्साहित करने के लिए नुक्कड़ नाटक एवं बेस्ट आउट ऑफ वेस्ट प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में बच्चों ने उत्साहपूर्वक हिस्सा लेकर पर्यावरण संरक्षण और प्रदूषण मुक्त दीपावली मनाने का संदेश दिया।

इस आयोजन का उद्देश्य बच्चों को मनोरंजन के साथ सामाजिक और पर्यावरणीय जिम्मेदारियों के प्रति जागरूक करना था। प्रतियोगिताओं के माध्यम से बच्चों को अपनी कल्पनाशीलता दिखाने और नए तरीके से अपनी प्रतिभा प्रस्तुत करने का अवसर मिला।

कार्यक्रम में बच्चों की प्रस्तुतियों ने उपस्थित लोगों का ध्यान आकर्षित किया। उन्होंने अपनी कला और विचारों के माध्यम से यह समझाने का प्रयास किया कि त्योहारों की खुशियां पर्यावरण को नुकसान पहुंचाए बिना भी मनाई जा सकती हैं।

Durg Gurukul के बच्चों ने नुक्कड़ नाटक से दिया खास संदेश

कार्यक्रम का प्रमुख आकर्षण बच्चों द्वारा प्रस्तुत नुक्कड़ नाटक रहा। इसमें बच्चों ने प्रदूषण मुक्त और पर्यावरण अनुकूल दीपावली मनाने का संदेश दिया।

नाटक के माध्यम से पटाखों से होने वाले वायु प्रदूषण और ध्वनि प्रदूषण के दुष्प्रभावों को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया गया। बच्चों ने बताया कि पटाखों का अत्यधिक उपयोग वातावरण को प्रदूषित करने के साथ लोगों के स्वास्थ्य और आसपास के वातावरण पर भी प्रतिकूल प्रभाव डाल सकता है।

अपनी प्रस्तुति के जरिए बच्चों ने लोगों से अपील की कि दीपावली का त्योहार दीपों, खुशियों और सकारात्मकता के साथ मनाया जाए। उन्होंने संदेश दिया कि त्योहार की असली खुशी दूसरों के साथ खुशियां बांटने और प्रकृति की सुरक्षा करने में है।

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बेस्ट आउट ऑफ वेस्ट प्रतियोगिता में बच्चों ने दिखाई कल्पनाशीलता

Durg Gurukul में आयोजित बेस्ट आउट ऑफ वेस्ट प्रतियोगिता भी बच्चों के लिए खास आकर्षण रही। इस प्रतियोगिता में बच्चों ने बेकार और अनुपयोगी समझी जाने वाली वस्तुओं का इस्तेमाल करके आकर्षक सजावटी सामग्री तैयार की।

बच्चों ने अपनी कल्पनाशीलता, रचनात्मक सोच और कला-कौशल का परिचय देते हुए पुरानी वस्तुओं को नए रूप में उपयोग करने का तरीका दिखाया। उनकी तैयार की गई सामग्री ने यह संदेश दिया कि थोड़ी रचनात्मकता से बेकार समझी जाने वाली चीजों को भी उपयोगी और सुंदर बनाया जा सकता है।

इस गतिविधि के माध्यम से बच्चों को पुनः उपयोग यानी Reuse की अवधारणा समझाई गई। साथ ही उन्हें संसाधनों की बचत और पर्यावरण संरक्षण के महत्व से भी परिचित कराया गया।

Durg Gurukul का उद्देश्य बच्चों में आत्मविश्वास और सामाजिक जिम्मेदारी बढ़ाना

संस्था द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य बच्चों की छिपी हुई प्रतिभाओं को सामने लाना और उन्हें अपनी क्षमताओं को प्रदर्शित करने का अवसर देना रहा।

नुक्कड़ नाटक जैसी गतिविधियां बच्चों में मंच पर अपनी बात रखने, समूह में काम करने और सामाजिक विषयों को समझने की क्षमता विकसित करने में सहायक होती हैं। वहीं, बेस्ट आउट ऑफ वेस्ट जैसी प्रतियोगिताएं उनकी रचनात्मक सोच और समस्या समाधान की क्षमता को प्रोत्साहित करती हैं।

संस्था का प्रयास बच्चों में आत्मविश्वास, कलात्मक अभिव्यक्ति और सामाजिक जिम्मेदारी की भावना विकसित करना है। ऐसे आयोजन बच्चों को पढ़ाई के साथ-साथ व्यावहारिक अनुभव और सामाजिक विषयों की समझ भी प्रदान करते हैं।

दीपावली पर पर्यावरण संरक्षण का दिया प्रेरणादायक संदेश

कार्यक्रम के माध्यम से बच्चों ने यह संदेश दिया कि दीपावली केवल सजावट और आतिशबाजी का त्योहार नहीं है, बल्कि खुशियां बांटने और सकारात्मकता फैलाने का अवसर भी है।

प्रदूषण मुक्त दीपावली का संदेश आज के समय में विशेष महत्व रखता है। पटाखों से निकलने वाला धुआं वायु गुणवत्ता को प्रभावित कर सकता है, जबकि तेज आवाज से लोगों और पशु-पक्षियों को परेशानी हो सकती है।

बच्चों ने अपनी प्रस्तुतियों के माध्यम से लोगों को पर्यावरण के प्रति संवेदनशील बनने और जिम्मेदारी के साथ त्योहार मनाने के लिए प्रेरित किया।

कार्यक्रम में संस्थापक सहित गणमान्य सदस्य और अभिभावक रहे उपस्थित

इस अवसर पर गुरुकुल संस्था के संस्थापक आशीष शर्मा, श्रीमती ममता टावरी, संजय अग्रवाल, गीतिका शर्मा, गोपाल कृष्ण शर्मा, श्रीमती सम्मी चंद्राकर, किशन माहेश्वरी और उपासना निर्मलकर सहित अन्य गणमान्य सदस्य उपस्थित रहे।

कार्यक्रम में बच्चों के साथ उनके अभिभावकों ने भी भाग लिया और बच्चों की रचनात्मक गतिविधियों को प्रोत्साहित किया। सभी की उपस्थिति ने आयोजन को उत्साहपूर्ण बनाया।

Durg Gurukul का आयोजन बना पर्यावरण जागरूकता की मिसाल

Durg Gurukul में आयोजित नुक्कड़ नाटक और बेस्ट आउट ऑफ वेस्ट प्रतियोगिता ने बच्चों की प्रतिभा को मंच देने के साथ पर्यावरण संरक्षण का महत्वपूर्ण संदेश भी दिया। बच्चों ने अपनी प्रस्तुतियों से बताया कि रचनात्मकता और जागरूकता के माध्यम से समाज में सकारात्मक बदलाव की शुरुआत की जा सकती है।

कार्यक्रम ने यह संदेश दिया कि सच्ची दीपावली वही है, जिसमें खुशियों के दीप जलें, दूसरों के चेहरे पर मुस्कान आए और पर्यावरण सुरक्षित रहे। ऐसे आयोजन बच्चों को जिम्मेदार नागरिक बनाने और समाज में पर्यावरण के प्रति जागरूकता बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

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