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Chief Minister Sports Mission से गांवों की प्रतिभाओं को मिलेगा अवसर

छत्तीसगढ़ में Chief Minister Sports Mission के माध्यम से खेल प्रतिभाओं को गांवों से राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंच तक पहुंचाने की तैयारी की जा रही है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने 13 अक्टूबर 2026 को मंत्रालय महानदी भवन में मिशन की उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक की। इसमें आगामी पांच वर्षों की कार्ययोजना, वित्तीय प्रबंधन, आधुनिक प्रशिक्षण, खेल अधोसंरचना और प्रतिभाशाली खिलाड़ियों की पहचान जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा हुई।

राज्य सरकार का लक्ष्य है कि ग्रामीण, जनजातीय और दूरस्थ क्षेत्रों में मौजूद प्रतिभाशाली खिलाड़ियों को बेहतर प्रशिक्षण, विशेषज्ञ कोच और आधुनिक सुविधाएं मिलें। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को ऐसी व्यवस्था विकसित करने के निर्देश दिए, जिससे प्रतिभा की पहचान से लेकर उच्चस्तरीय प्रदर्शन तक खिलाड़ियों को लगातार सहयोग मिल सके।

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मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ में खेल प्रतिभाओं की कमी नहीं है। जरूरत उन्हें कम उम्र में पहचानने और सही दिशा में प्रशिक्षित करने की है। उन्होंने ज्ञानेश्वरी यादव और संजू देवी जैसी खिलाड़ियों का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रदेश के युवा राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उत्कृष्ट प्रदर्शन करने की क्षमता रखते हैं।

मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि खेल प्रतिभाओं की खोज केवल बड़े शहरों और स्थापित खेल अकादमियों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। गांवों, जनजातीय अंचलों और दूरस्थ क्षेत्रों के खिलाड़ियों को भी आगे बढ़ने के समान अवसर मिलने चाहिए।

तीरंदाजी और कबड्डी जैसे खेलों में ग्रामीण एवं जनजातीय क्षेत्रों के युवाओं की भागीदारी को देखते हुए प्रतिभाओं की व्यवस्थित पहचान और वैज्ञानिक प्रशिक्षण पर जोर दिया गया।

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स्कूलों से मजबूत होगी खेल संस्कृति

Chief Minister Sports Mission के तहत स्कूल स्तर से ही बच्चों को खेल गतिविधियों से जोड़ने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। मुख्यमंत्री ने व्यायाम शिक्षकों के माध्यम से नियमित खेल गतिविधियों को प्रोत्साहित करने के निर्देश दिए।

खेल बच्चों के शारीरिक विकास के साथ अनुशासन, आत्मविश्वास, नेतृत्व क्षमता और टीम भावना को भी मजबूत करते हैं। स्कूलों में प्रतिभा की पहचान होने से योग्य विद्यार्थियों को समय रहते विशेषज्ञ प्रशिक्षण से जोड़ा जा सकेगा।

इससे खेलों को केवल मनोरंजन के बजाय भविष्य में करियर के विकल्प के रूप में अपनाने के अवसर भी बढ़ सकते हैं।

फीडर सेंटर से सेंटर ऑफ एक्सीलेंस तक होगा विकास

बैठक में एथलेटिक्स, तीरंदाजी, हॉकी, मुक्केबाजी, कुश्ती, भारोत्तोलन, तैराकी, बैडमिंटन, जूडो और कबड्डी सहित प्राथमिकता वाले खेलों के विकास की योजना पर चर्चा हुई।

प्रस्तावित व्यवस्था में फीडर सेंटर, उच्च प्रदर्शन प्रशिक्षण केंद्र और सेंटर ऑफ एक्सीलेंस को आपस में जोड़ने पर जोर दिया गया। फीडर सेंटरों में ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के प्रतिभाशाली बच्चों की पहचान कर उन्हें शुरुआती प्रशिक्षण दिया जाएगा।

बेहतर प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ियों को आगे खेल अकादमियों और उच्चस्तरीय प्रशिक्षण केंद्रों से जोड़ने की योजना है। मुख्यमंत्री ने खिलाड़ियों की प्रगति का नियमित आकलन करने और उनके प्रदर्शन के आधार पर आगे बढ़ने के अवसर उपलब्ध कराने के निर्देश भी दिए।

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स्पोर्ट्स साइंस, पोषण और प्रशिक्षित कोचों पर जोर

मुख्यमंत्री ने कहा कि खिलाड़ियों को गुणवत्तापूर्ण प्रशिक्षण देने के लिए खेलवार योग्य और प्रशिक्षित कोचों की पर्याप्त उपलब्धता जरूरी है। जिन क्षेत्रों में किसी विशेष खेल की संभावनाएं अधिक हैं, वहां उसी के अनुरूप प्रशिक्षकों और सुविधाओं की व्यवस्था की जानी चाहिए।

बैठक में आधुनिक स्पोर्ट्स साइंस सुविधाओं के विकास पर भी चर्चा हुई। इसमें खिलाड़ियों के पोषण, स्वास्थ्य परीक्षण, मानसिक सहयोग, फिटनेस, चोट से बचाव और पुनर्वास जैसी सुविधाओं को प्रशिक्षण व्यवस्था का हिस्सा बनाने पर विचार किया गया।

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिस्पर्धा के लिए केवल अभ्यास पर्याप्त नहीं होता। वैज्ञानिक प्रशिक्षण, उचित पोषण और चोटों से उबरने की सुविधाएं भी खिलाड़ी के प्रदर्शन को बेहतर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।

बिलासपुर स्पोर्ट्स सेंटर की क्षमता 300 करने की योजना

बैठक में बिलासपुर स्थित स्पोर्ट्स एक्सीलेंस सेंटर के विस्तार की योजना की समीक्षा की गई। यहां आवासीय खिलाड़ियों की वर्तमान क्षमता 165 से बढ़ाकर 300 करने तथा संचालित खेल विधाओं का विस्तार करने की योजना है।

इसके साथ ही मुख्यमंत्री ने प्रदेश में पहले से उपलब्ध स्टेडियमों, खेल मैदानों और प्रशिक्षण केंद्रों का बेहतर उपयोग सुनिश्चित करने को कहा। मौजूदा अधोसंरचना के नियमित रखरखाव और आवश्यकतानुसार उन्नयन पर भी जोर दिया गया।

यह कदम खिलाड़ियों को उपलब्ध संसाधनों का अधिक प्रभावी लाभ दिलाने की दिशा में महत्वपूर्ण हो सकता है।

टैलेंट हंट और मुख्यमंत्री ट्रॉफी से मिलेगा मंच

खिलाड़ियों को अपनी प्रतिभा दिखाने के लिए नियमित प्रतियोगिताएं उपलब्ध कराने पर भी चर्चा हुई। इसके तहत टैलेंट हंट और मुख्यमंत्री ट्रॉफी के माध्यम से विकासखंड, जिला और राज्य स्तर पर प्रतियोगिताएं आयोजित करने की प्रस्तावित व्यवस्था की समीक्षा की गई।

इन प्रतियोगिताओं से दूरस्थ क्षेत्रों के खिलाड़ियों को अपनी क्षमता साबित करने का अवसर मिल सकता है। उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ियों को उच्चस्तरीय प्रशिक्षण और आगे की प्रतियोगिताओं में भागीदारी के लिए चुना जा सकेगा।

महिला और दिव्यांग खिलाड़ियों को मिलेगा प्रोत्साहन

मुख्यमंत्री ने महिला खिलाड़ियों और दिव्यांग खिलाड़ियों के लिए विशेष प्रयास करने के निर्देश दिए। बैठक में महिला खिलाड़ियों के प्रशिक्षण शिविर, पैरा स्पोर्ट्स के विकास और राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं की तैयारी से जुड़े प्रस्तावों पर विचार-विमर्श हुआ।

मुख्यमंत्री ने कहा कि खिलाड़ियों को सुरक्षित वातावरण, गुणवत्तापूर्ण प्रशिक्षण और पर्याप्त प्रतिस्पर्धात्मक अवसर मिलने चाहिए, ताकि वे अपनी क्षमता के अनुरूप प्रदर्शन कर सकें।

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अगले पांच वर्षों की कार्ययोजना और वित्तीय प्रबंधन

मुख्यमंत्री ने मिशन के लिए आगामी पांच वर्षों की स्पष्ट, व्यावहारिक और परिणामोन्मुख कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए। बैठक में वित्तीय प्रबंधन और विभिन्न घटकों के क्रियान्वयन पर भी विस्तृत मंथन हुआ।

उन्होंने खेल एवं युवा कल्याण विभाग के साथ स्कूल शिक्षा, उच्च शिक्षा, स्वास्थ्य, नगरीय प्रशासन और अन्य संबंधित विभागों के बीच बेहतर समन्वय पर जोर दिया।

Chief Minister Sports Mission छत्तीसगढ़ में खेल प्रतिभाओं को पहचानने, निखारने और उन्हें उच्चस्तरीय प्रतियोगिताओं के लिए तैयार करने की व्यापक पहल है। फीडर सेंटरों, आधुनिक प्रशिक्षण, स्पोर्ट्स साइंस, प्रतियोगिताओं और बेहतर खेल अधोसंरचना पर केंद्रित पांच वर्षीय कार्ययोजना से खिलाड़ियों को आगे बढ़ने के अवसर मिल सकते हैं। योजना की सफलता प्रभावी क्रियान्वयन, पर्याप्त संसाधनों और प्रतिभाशाली खिलाड़ियों तक सुविधाएं पहुंचाने पर निर्भर करेगी।

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