छत्तीसगढ़ में पेसा महोत्सव: ग्राम सभा सशक्तिकरण और आदिवासी स्वशासन की जीवंत मिसाल

PESA Mahotsav Chhattisgarh: छत्तीसगढ़, भारत के प्रमुख आदिवासी बहुल राज्यों में शामिल है, जहां आज भी सामुदायिक जीवन, परंपरागत ज्ञान और सामूहिक निर्णय प्रणाली समाज की रीढ़ बनी हुई है। इसी पारंपरिक व्यवस्था को संवैधानिक मजबूती देने के लिए भारत सरकार ने पंचायती राज (अनुसूचित क्षेत्रों में विस्तार) अधिनियम, 1996, यानी पेसा अधिनियम लागू किया।

आज PESA Mahotsav Chhattisgarh इस कानून की वास्तविक भावना और ग्राम सभा की ताकत को जन-जन तक पहुंचाने का माध्यम बन रहा है।


🏛️ पेसा अधिनियम: ग्राम सभा को मिला निर्णय का अधिकार

पेसा अधिनियम के तहत छत्तीसगढ़ की ग्राम सभाओं को

  • भूमि,
  • जंगल,
  • जल स्रोत,
  • खनिज संसाधन,
  • और स्थानीय विकास योजनाओं

पर निर्णय लेने का अधिकार प्राप्त है।
किसी भी परियोजना को लागू करने से पहले ग्राम सभा की सहमति अनिवार्य है। यह व्यवस्था स्थानीय परंपराओं, जरूरतों और समुदाय की प्राथमिकताओं को केंद्र में रखती है।

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🎉 पेसा महोत्सव: संस्कृति के साथ अधिकारों का उत्सव

PESA Mahotsav Chhattisgarh केवल एक सांस्कृतिक आयोजन नहीं है, बल्कि यह
आदिवासी अधिकारों, स्वशासन और लोकतांत्रिक भागीदारी का उत्सव है।

महोत्सव में—

  • लोकगीत और पारंपरिक नृत्य
  • हस्तशिल्प और स्थानीय उत्पादों की प्रदर्शनी
  • सफल ग्राम सभाओं के अनुभव साझा
  • महिलाओं और युवाओं की सक्रिय भागीदारी

जैसे पहलू देखने को मिलते हैं, जो ग्राम स्तर पर नेतृत्व को मजबूत करते हैं।


👩‍👧‍👦 महिलाएं और युवा: पेसा की असली ताकत

पेसा महोत्सव की एक बड़ी खासियत यह है कि यह महिलाओं और युवाओं को निर्णय प्रक्रिया में आगे लाने पर जोर देता है।
जब गांव की महिलाएं और युवा खुलकर ग्राम सभा में अपनी बात रखते हैं, तब शासन अधिक न्यायपूर्ण, संवेदनशील और टिकाऊ बनता है।


⚠️ चुनौतियां भी हैं, समाधान जरूरी

हालांकि पेसा अधिनियम ने ग्राम सभा को अधिकार दिए हैं, लेकिन कुछ चुनौतियां अब भी मौजूद हैं—

  • जागरूकता की कमी
  • प्रशासनिक समन्वय का अभाव
  • क्षमता निर्माण की जरूरत

इन समस्याओं के समाधान के लिए ग्रामीण प्रशिक्षण, तकनीक आधारित पारदर्शिता, और समयबद्ध क्रियान्वयन आवश्यक है।


🌱 स्थानीय नेतृत्व से मजबूत लोकतंत्र

छत्तीसगढ़ में PESA Mahotsav Chhattisgarh यह साबित करता है कि जब स्थानीय समुदाय नेतृत्व करता है, तो शासन केवल योजनाओं तक सीमित नहीं रहता, बल्कि लोगों के जीवन से जुड़ जाता है।
यह महोत्सव आदिवासी सशक्तिकरण और सहभागी लोकतंत्र की दिशा में एक मजबूत कदम है।