Chhattisgarh News में इस बार एक ऐसे प्रगतिशील किसान की प्रेरणादायक कहानी है जो दूरस्थ क्षेत्र में रहकर भी आधुनिक सोच के साथ खेती कर रहे हैं।
सरगुजा संभाग के कोरिया जिले के सोनहत विकासखंड के सुंदरपुर पटेलपारा गांव के 46 वर्षीय किसान लक्ष्मी नारायण राजवाड़े ने धान की एक खास देसी किस्म ‘करहनी’ की खेती अपनाकर न केवल अपनी आर्थिक स्थिति सुधारी है, बल्कि पूरे क्षेत्र के किसानों के लिए एक मिसाल कायम की है।
करहनी चावल की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसे पारंपरिक धान की तुलना में बहुत कम पानी की जरूरत होती है। यही कारण है कि सूखाग्रस्त और कम सिंचाई वाले क्षेत्रों में भी इसकी खेती आसानी से की जा सकती है।
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10 एकड़ में खेती — सिर्फ ₹20,000 की लागत, मुनाफा जबरदस्त
लागत इतनी कम कि हैरानी हो जाए
Chhattisgarh News में यह खबर इसलिए भी खास है क्योंकि करहनी चावल की खेती की लागत बेहद कम है।
लक्ष्मी नारायण राजवाड़े बताते हैं कि एक एकड़ में मात्र ₹2,000 की लागत आती है।
इस हिसाब से 10 एकड़ की पूरी फसल पर कुल खर्च केवल ₹20,000 होता है — जो किसी भी अन्य फसल की तुलना में बेहद किफायती है।
तालाब के पानी से ही होती है सिंचाई
लक्ष्मी नारायण के खेत के पास ही एक तालाब है। वे इसी तालाब के पानी से 10 एकड़ की पूरी फसल को सींचते हैं।
बारिश न होने की स्थिति में भी फसल सिर्फ तालाब के पानी के भरोसे पककर तैयार हो जाती है। इससे रबी सीजन में सिंचाई पर होने वाला खर्च काफी कम हो जाता है।
| विवरण | आंकड़े |
|---|---|
| कुल खेती क्षेत्र | 10 एकड़ |
| प्रति एकड़ लागत | ₹2,000 |
| कुल लागत (10 एकड़) | ₹20,000 |
| खरीद मूल्य (KVK) | ₹80 प्रति किलो |
| बाजार में बिक्री मूल्य | ₹100 प्रति किलो |
| खेती का अनुभव | 5-6 वर्ष |
90-100 दिन में तैयार — कम पानी में तैयार होती है Chhattisgarh News की यह खास फसल
समय भी बचता है, पैसा भी
Chhattisgarh News में यह पहलू भी महत्वपूर्ण है कि करहनी धान मात्र 90 से 100 दिनों में पककर तैयार हो जाती है।
यह सामान्य धान की तुलना में कम समय में तैयार होने वाली किस्म है, जिससे किसान एक सीजन में जल्दी फसल पाकर अगली फसल की तैयारी कर सकते हैं।
रबी और खरीफ दोनों में होती है खेती
एक और खास बात यह है कि लक्ष्मी नारायण राजवाड़े रबी और खरीफ — दोनों सीजन में करहनी की खेती करते हैं।
पिछले 5 से 6 वर्षों से वे लगातार इस किस्म की खेती कर रहे हैं और हर बार बेहतर नतीजे पा रहे हैं।
कम पानी की जरूरत के कारण सूखा प्रभावित क्षेत्रों में भी इस फसल को उगाना संभव है — जो इसे छत्तीसगढ़ के दूरस्थ इलाकों के किसानों के लिए एक आदर्श विकल्प बनाती है।
Chhattisgarh News: करहनी चावल के स्वास्थ्य लाभ — शुगर, ब्लड प्रेशर और लकवे में फायदेमंद
औषधीय गुणों से भरपूर है करहनी चावल
Chhattisgarh News की इस रिपोर्ट में करहनी चावल का एक और बड़ा पहलू सामने आता है — इसके अद्भुत स्वास्थ्य लाभ।
कृषि विज्ञान केंद्र (KVK) कोरिया के वरिष्ठ वैज्ञानिक कमलेश सिंह के अनुसार, करहनी चावल निम्न बीमारियों के मरीजों के लिए विशेष रूप से फायदेमंद है:
- शुगर (Diabetes): ब्लड शुगर को नियंत्रित रखने में सहायक।
- ब्लड प्रेशर (High BP): रक्तचाप को संतुलित रखने में मददगार।
- लकवा (Paralysis): पैरालिसिस के मरीजों के लिए लाभकारी।
इसीलिए बढ़ रही है मांग
इन स्वास्थ्य गुणों के कारण बाजार में करहनी चावल की मांग लगातार बढ़ती जा रही है।
स्वास्थ्य के प्रति जागरूक उपभोक्ता इस चावल को प्रीमियम ऑर्गेनिक चावल के विकल्प के रूप में देख रहे हैं।
🔗 Indian Council of Agricultural Research (ICAR) — Traditional Rice Varieties
₹80 में खरीद, ₹100/kg में बिक्री — KVK कोरिया की मदद से बढ़ा बाजार
पैकेट बनाकर बेचते हैं चावल
लक्ष्मी नारायण राजवाड़े ने अपनी खेती को सिर्फ उत्पादन तक सीमित नहीं रखा — वे खेत में तैयार चावल को पैकेट बनाकर बेचते हैं।
इस Value Addition से उन्हें बाजार में बेहतर कीमत मिलती है।
KVK कोरिया की महत्वपूर्ण भूमिका
विपणन (Marketing) में कृषि विज्ञान केंद्र कोरिया उनकी भरपूर मदद कर रहा है।
KVK इस चावल को ₹80 प्रति किलो की दर से राजवाड़े से खरीदता है, जबकि बाजार में इसकी बिक्री ₹100 प्रति किलो तक होती है।
यह मूल्य श्रृंखला किसान और उपभोक्ता — दोनों के लिए फायदेमंद है।
🔗 Krishi Vigyan Kendra — ICAR Network
Chhattisgarh News: आसपास के किसान भी सीखने लगे करहनी की खेती — फैल रही प्रेरणा
खेत बन गया सीखने का केंद्र
Chhattisgarh News की इस कहानी का सबसे प्रेरणादायक पहलू यह है कि लक्ष्मी नारायण राजवाड़े की सफलता देखकर आसपास के किसान भी करहनी चावल की खेती के बारे में जानकारी लेने लगे हैं।
कई किसान सीधे उनके खेत पर आकर खेती की पद्धति समझते हैं।
एक किसान से फैलती बदलाव की लहर
यह Chhattisgarh News यह दिखाती है कि जब एक किसान नई सोच के साथ खेती करता है, तो उसका असर पूरे क्षेत्र पर पड़ता है।
सरगुजा संभाग के दूरस्थ इलाकों में जहां परंपरागत खेती के अलावा कोई विकल्प नहीं दिखता था, वहां करहनी चावल एक नई उम्मीद की किरण बन रहा है।
लक्ष्मी नारायण राजवाड़े से सीधे संपर्क किया जा सकता है — 📞 9302940224
कृषि विज्ञान केंद्र कोरिया के वैज्ञानिक की राय — करहनी को मिले बड़ा मंच
वैज्ञानिक कमलेश सिंह का दृष्टिकोण
KVK कोरिया के वरिष्ठ वैज्ञानिक कमलेश सिंह इस Chhattisgarh News के महत्वपूर्ण स्तंभ हैं।
उनके अनुसार करहनी चावल की खेती को बड़े स्तर पर बढ़ावा दिया जाना चाहिए क्योंकि:
- यह कम संसाधनों में अधिक उत्पादन देती है।
- इसके औषधीय गुण इसे एक Functional Food बनाते हैं।
- बाजार में मांग लगातार बढ़ रही है।
- सूखाग्रस्त क्षेत्रों के लिए यह एक आदर्श फसल है।
KVK के माध्यम से इस चावल की मार्केटिंग और ब्रांडिंग का काम जारी है, जिससे किसान को उचित मूल्य मिल सके।
Chhattisgarh News में किसान लक्ष्मी नारायण राजवाड़े की यह कहानी उन हजारों किसानों के लिए प्रेरणा है जो खेती में नए प्रयोग करने से डरते हैं। करहनी चावल — कम पानी, कम लागत, अधिक मुनाफा और स्वास्थ्य लाभ — इन चारों गुणों के कारण छत्तीसगढ़ की कृषि का भविष्य बदल सकने की क्षमता रखता है।
KVK कोरिया की तकनीकी और विपणन सहायता के साथ यह प्रयोग अब एक आंदोलन का रूप लेता दिख रहा है। उम्मीद है कि Chhattisgarh News में ऐसी और सफलता की कहानियां आएंगी और सरगुजा संभाग के किसान करहनी चावल को एक राष्ट्रीय पहचान दिलाने में सफल होंगे।
