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Chhattisgarh High Court: अवैध संबंध रखने वाली पत्नी को गुजारा भत्ता नहीं मिलेगा, हाईकोर्ट का बड़ा फैसला

Chhattisgarh High Court ने एक महत्वपूर्ण वैवाहिक विवाद में बड़ा फैसला सुनाते हुए स्पष्ट किया है कि यदि कोई विवाहित महिला अपनी इच्छा से किसी अन्य पुरुष के साथ व्यभिचार (Adultery) में रह रही है, तो वह अपने पति से गुजारा भत्ता (Maintenance) पाने की कानूनी हकदार नहीं होगी। बिलासपुर स्थित हाईकोर्ट ने जशपुर और रायपुर के एक दंपति से जुड़े मामले में यह फैसला सुनाया।

यह फैसला ऐसे मामलों में महत्वपूर्ण माना जा रहा है, जहां गुजारा भत्ता के दावे के साथ वैवाहिक निष्ठा और व्यभिचार के आरोप भी जुड़े हों।

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Chhattisgarh High Court का बड़ा फैसला

बिलासपुर स्थित Chhattisgarh High Court के मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा की एकलपीठ ने पत्नी की पुनर्विचार याचिका को खारिज करते हुए फैमिली कोर्ट के आदेश को सही ठहराया।

अदालत ने कहा कि यदि उपलब्ध साक्ष्यों से यह साबित हो जाए कि पत्नी स्वेच्छा से व्यभिचार में रह रही है, तो वह कानून के तहत पति से किसी प्रकार के गुजारा भत्ता की मांग नहीं कर सकती।

कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि प्रत्येक मामले का फैसला उसके तथ्यों और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर किया जाता है।

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क्या है पूरा मामला?

मामला जशपुर निवासी महिला और रायपुर निवासी युवक से जुड़ा है। दोनों का विवाह 19 अप्रैल 2018 को हिंदू रीति-रिवाज से हुआ था।

विवाह के कुछ समय बाद ही दोनों के बीच विवाद शुरू हो गया। लगभग आठ महीने बाद दोनों अलग रहने लगे। इसके बाद पत्नी ने पति और उसके परिवार पर दहेज प्रताड़ना तथा मानसिक एवं शारीरिक उत्पीड़न के आरोप लगाते हुए गुजारा भत्ता की मांग की।

महिला ने यह भी आरोप लगाया कि पति उसके चरित्र पर संदेह करता था और मोबाइल पर किसी से बात करने पर प्रताड़ित करता था।


पत्नी ने लगाए गंभीर आरोप

महिला ने अदालत में दावा किया कि उससे तीन लाख रुपये दहेज की मांग की गई थी। उसने यह भी आरोप लगाया कि प्रताड़ना से परेशान होकर उसने आत्महत्या का प्रयास किया था।

इन्हीं आरोपों के आधार पर उसने अदालत से मासिक गुजारा भत्ता दिलाने की मांग की।

हालांकि, मामले की सुनवाई के दौरान पति ने पत्नी के कथित अवैध संबंधों से जुड़े डिजिटल साक्ष्य अदालत के समक्ष प्रस्तुत किए।


Chhattisgarh High Court में डिजिटल साक्ष्य और AI की दलील

सुनवाई के दौरान पत्नी ने दावा किया कि उसके खिलाफ पेश की गई ऑडियो रिकॉर्डिंग और ट्रांसक्रिप्ट फर्जी हैं।

उसके वकील ने अदालत में तर्क दिया कि पति ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की मदद से नकली आवाज तैयार कर डिजिटल साक्ष्य बनाया है।

इस दावे को गंभीरता से लेते हुए अदालत के निर्देश पर डिजिटल साक्ष्यों की वैज्ञानिक जांच कराई गई।

जांच के बाद अदालत ने पाया कि रिकॉर्ड पर मौजूद साक्ष्य विश्वसनीय हैं और उनमें ऐसी कोई कमी नहीं है जिससे उन्हें अस्वीकार किया जा सके।


Chhattisgarh High Court की महत्वपूर्ण टिप्पणी

व्यभिचार की स्थिति में नहीं मिलेगा गुजारा भत्ता

Chhattisgarh High Court ने कहा कि फैमिली कोर्ट द्वारा दिए गए निर्णय में कोई कानूनी त्रुटि नहीं है।

अदालत ने माना कि उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर पत्नी के खिलाफ लगाए गए आरोप सिद्ध होते हैं।

कोर्ट ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यदि पत्नी स्वेच्छा से किसी अन्य पुरुष के साथ व्यभिचार में रह रही है, तो वह पति से वित्तीय सहायता या गुजारा भत्ता पाने की अधिकारी नहीं होगी।


साक्ष्यों के आधार पर हुआ फैसला

हाईकोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि निर्णय केवल आरोपों के आधार पर नहीं बल्कि डिजिटल और वैज्ञानिक साक्ष्यों की जांच के बाद दिया गया है।

कोर्ट ने सभी रिकॉर्ड, दस्तावेजों और प्रस्तुत साक्ष्यों का परीक्षण करने के बाद ही फैमिली कोर्ट के आदेश को बरकरार रखा।


फैसले का कानूनी महत्व

परिवार कानून के विशेषज्ञों के अनुसार, यह निर्णय उन मामलों में महत्वपूर्ण माना जाएगा जहां गुजारा भत्ता के साथ व्यभिचार के आरोप भी जुड़े हों।

हालांकि, अदालत ने किसी सामान्य सिद्धांत के बजाय इस विशेष मामले के तथ्यों, उपलब्ध साक्ष्यों और न्यायिक परीक्षण के आधार पर फैसला सुनाया है। ऐसे मामलों में प्रत्येक विवाद का निर्णय उसके अपने तथ्यों और सबूतों के अनुसार किया जाता है।


Chhattisgarh High Court के इस फैसले ने यह स्पष्ट किया है कि गुजारा भत्ता का अधिकार पूर्णतः निरपेक्ष नहीं है। यदि अदालत के समक्ष उपलब्ध साक्ष्यों से यह सिद्ध हो जाए कि पत्नी स्वेच्छा से व्यभिचार में रह रही है, तो वह पति से गुजारा भत्ता मांगने की पात्र नहीं होगी। इस मामले में हाईकोर्ट ने फैमिली कोर्ट के निर्णय को सही मानते हुए पत्नी की पुनर्विचार याचिका खारिज कर दी।

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