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Bhatpal Security Camp की बदली तस्वीर

Bhatpal Security Camp अब बंदूक और सुरक्षा व्यवस्था की पहचान से निकलकर शिक्षा और भविष्य की नई कहानी लिख रहा है। छत्तीसगढ़ के नारायणपुर जिले के भाटपाल में करीब 15 वर्षों तक सुरक्षा बलों का महत्वपूर्ण कैंप रहा परिसर अब आदिवासी विद्यार्थियों के छात्रावास में बदल गया है।

अब इसी परिसर में दूरस्थ और दुर्गम गांवों से आने वाले बच्चे रहकर पढ़ाई कर रहे हैं। बस्तर संभाग में किसी पूर्व सुरक्षा कैंप को इस तरह पूरी तरह शैक्षणिक आवासीय सुविधा में बदलने की यह पहली पहल बताई गई है।

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Bhatpal Security Camp में अब 153 आदिवासी छात्र

नारायणपुर जिला मुख्यालय से करीब 25 किलोमीटर दूर स्थित भाटपाल के इस परिसर में अनुसूचित जनजाति के विद्यार्थियों के लिए दो छात्रावास संचालित किए जा रहे हैं। यहां कक्षा 6वीं से 12वीं तक के छात्रों को रहने की सुविधा मिल रही है।

प्री-मैट्रिक ST बालक छात्रावास में कक्षा 6 से 10 तक के विद्यार्थियों के लिए 100 सीटें स्वीकृत हैं, जबकि वर्तमान में 114 छात्र रह रहे हैं। वहीं पोस्ट-मैट्रिक छात्रावास में कक्षा 11वीं और 12वीं के लिए 50 सीटें हैं, जिसमें 39 विद्यार्थी रह रहे हैं।

इस तरह दोनों छात्रावासों में कुल 153 विद्यार्थी वर्तमान में रहकर पढ़ाई कर रहे हैं। परिसर से कुटुल स्थित एजुकेशन सिटी से जुड़े विद्यार्थियों की आवासीय जरूरतें भी पूरी हो रही हैं।

15 साल तक सुरक्षा का केंद्र रहा था परिसर

भाटपाल का यह परिसर करीब डेढ़ दशक तक सुरक्षा बलों की तैनाती का महत्वपूर्ण केंद्र रहा। अबूझमाड़ का यह इलाका लंबे समय तक वामपंथी उग्रवाद से प्रभावित रहा, जिसके कारण यहां सुरक्षा व्यवस्था को प्राथमिकता दी जाती थी।

सुरक्षा स्थिति में सुधार के बाद कैंप खाली हुआ। जिला प्रशासन ने पुराने ढांचे को अनुपयोगी छोड़ने के बजाय उसे बच्चों की शिक्षा और आवास की जरूरत से जोड़ने का फैसला किया।

दूरदराज के बच्चों के लिए बड़ी राहत

अबूझमाड़ और आसपास के कई गांवों से विद्यार्थियों के लिए स्कूल तक रोज पहुंचना आसान नहीं था। लंबी दूरी, सीमित परिवहन और स्कूल के पास रहने की व्यवस्था नहीं होने से खासकर 10वीं के बाद पढ़ाई जारी रखना चुनौती बन जाता था।

कई परिवारों को बच्चों के लिए स्कूल के आसपास निजी कमरे की व्यवस्था करनी पड़ती थी। इससे परिवार पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ता था और कुछ विद्यार्थियों के लिए पढ़ाई जारी रखना मुश्किल हो जाता था।

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भाटपाल में बने छात्रावास ने इस समस्या को काफी हद तक कम किया है। सरकारी उच्चतर माध्यमिक विद्यालय परिसर से करीब 50 मीटर की दूरी पर है, जिससे विद्यार्थियों को लंबी दूरी तय करने की जरूरत नहीं पड़ती।

छात्रों के लिए सुरक्षित माहौल

कक्षा 9 के छात्र रितेश सोनी के अनुसार, छात्रावास में स्कूल के पास सुरक्षित माहौल मिलने से पढ़ाई आसान हुई है। वहीं कक्षा 12वीं के छात्र कोमेंद्र पहले करीब 22 किलोमीटर दूर राजबेड़ा से पढ़ाई के लिए आते थे और स्कूल के आसपास रहने की अलग व्यवस्था करनी पड़ती थी।

अब छात्रावास मिलने से ऐसे विद्यार्थियों को रहने की व्यवस्थित सुविधा मिल रही है। इससे पढ़ाई के साथ-साथ परिवारों पर पड़ने वाला आवास का खर्च भी कम हुआ है।

Bhatpal Security Camp का कलेक्टर ने किया निरीक्षण

नारायणपुर कलेक्टर नम्रता जैन ने हाल ही में छात्रावास का औचक निरीक्षण किया। उन्होंने कमरों, साफ-सफाई, भोजन और अन्य बुनियादी सुविधाओं की जानकारी ली तथा विद्यार्थियों से सीधे बातचीत की।

कलेक्टर ने हॉस्टल की रसोई में भोजन व्यवस्था का भी जायजा लिया। बच्चों को मिलने वाले भोजन की गुणवत्ता, निर्धारित मेन्यू और स्वच्छता व्यवस्था पर विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए गए।

सुरक्षा से शिक्षा तक पहुंचा अबूझमाड़

Bhatpal Security Camp का यह बदलाव केवल एक भवन के उपयोग में परिवर्तन नहीं है। यह उस क्षेत्र में बदलती प्राथमिकताओं की तस्वीर भी दिखाता है, जहां कभी सुरक्षा सबसे बड़ी जरूरत थी और अब शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क तथा आजीविका जैसी सुविधाओं पर जोर बढ़ रहा है।

राज्य सरकार की ओर से पहले भी कहा गया है कि बस्तर क्षेत्र में सुरक्षा कैंपों की उपयोगिता बदलते हालात के अनुसार पुलिस थानों, स्कूलों, अस्पतालों और अन्य सार्वजनिक सुविधाओं के लिए की जा सकती है।

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Bhatpal Security Camp आज अबूझमाड़ में बदलाव की एक सकारात्मक तस्वीर बनकर सामने आया है। करीब 15 साल तक सुरक्षा बलों का ठिकाना रहा यह परिसर अब 153 आदिवासी विद्यार्थियों के रहने और पढ़ने का स्थान है। सुरक्षा के लिए बनी अधोसंरचना का शिक्षा के लिए इस्तेमाल दूरदराज के बच्चों को बेहतर अवसर देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

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