जीआरपी और रेलवे प्रबंधन ने किया मानवता को शर्मसार, मां भटकती रही किशोर पुत्र के शव को लेकर

ट्रेन में सफर के दौरान अपने किशोर पुत्र की मौत से गमजदा मां को टीसी से शव के साथ ट्रेन से उतार दिया। रेलवे स्टेशन पर सहायता के लिए वह घंटो भटकती रही। इस संवेदनशील मामले में जीआरपी और रेलवे प्रबंधन उन्हें तत्काल सहायता मुहैया कराने की बजाए खानापूर्ति करता रहा। बेटे के शव को अस्पताल ले जाने के लिए व्यवस्था करने में रेलवे प्रबंधन को दो घंटे लग गए। जिला अस्पताल में चिकित्सकीय कार्रवाई में मां उलझकर दिन भर भटकती रही। इसके बावजूद उन्हें अपने लाडले का शव प्राप्त करने कल का इंतजार करना होगा।

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दुर्ग(छत्तीसगढ़)। मानवता को शर्मशर करने का यह किस्सा दुर्ग रेलवे स्टेशन का है। रायगढ़ निवासी सविता शर्मा अपने 17 वर्षीय पुत्र नितिन के साथ हिसार से रायगढ जाने के लिए गोंडवना एक्सप्रेस में सफर कर रही थी। सफर के दौरान रास्ते में पुत्र की तबीयत बिगडने लगी, टे्रन में उपचार नहीं मिलने पर उसकी मौत हो गई। जिसकी जानकारी सविता द्वारा टे्रन में मौजूद टीसी को दी गई। साथ ही टीसी से उन्हें रायपुर रेलवे स्टेशन में उतारने का अनुरोध किया। इसके बावजूद टीसी ने इस संबंध में दुर्ग रेलवे प्रबंधन को जानकारी देकर सविता व उसके बेटे के शव को दुर्ग रेलवे स्टेशन पर उतार दिया। लगभग डेढ़ बजे दुर्ग रेलवे स्टेशन पर उतरने के बाद बेटे के शव के साथ मदद की गुहार लगाती रही, लेकिन जीआरपी और रेलवे प्रबंधन खानापूर्ति करता रहा। बीच में बुलावें पर एम्बुलेंस 108 आई, लेकिन उसने शव को ले जाने से इंकार कर दिया। लगभग दो घंटे बाद मां और उसके किशोर बेटे के शव को आटो से जिला अस्पताल पहुंचाया जा सका।
जिला अस्पताल में मौजूद चिकित्सकों ने जांच के बाद किशोर को मृत घोषित कर दिया। वहीं इस प्रक्रिया में देर शाम हो जाने के कारण शव का चिकित्सकीय परीक्षण नहीं हो पाया। जिला अस्पताल में शव को मरच्यूरी में रखवाया गया है। कल गुरुवार की सबेरे शव के चिकित्सकीय परीक्षण के बाद किशोर के शव को परिजनों को सौंपा जा सकेगा।