4thnation

130th Constitution Amendment Bill: 30 दिन जेल में रहने पर मंत्री पद खत्म करने वाले प्रावधान में बदलाव नहीं, JPC की रिपोर्ट जल्द

130th Constitution Amendment Bill को लेकर गठित संयुक्त संसदीय समिति (JPC) अपनी रिपोर्ट अंतिम रूप देने की तैयारी में है। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, समिति इस विधेयक के उस महत्वपूर्ण प्रावधान में किसी बदलाव की सिफारिश नहीं करेगी, जिसके तहत यदि प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री या कोई मंत्री किसी गंभीर अपराध में गिरफ्तार होकर लगातार 30 दिनों तक न्यायिक हिरासत में रहता है, तो उसे पद छोड़ना होगा।

रिपोर्ट के मसौदे को 10 जुलाई तक समिति के सदस्यों के बीच साझा किए जाने की संभावना है, जबकि 17 जुलाई को बैठक में इसे अंतिम रूप दिया जाएगा। इसके बाद मानसून सत्र में यह रिपोर्ट संसद के समक्ष पेश की जा सकती है।


📢 WhatsApp Channel से जुड़ें:
Join 4thNation Channel: https://whatsapp.com/channel/0029VaOjosfFHWq7ssCngl1j


130th Constitution Amendment Bill क्या है?

130th Constitution Amendment Bill का उद्देश्य सार्वजनिक पदों पर बैठे शीर्ष जनप्रतिनिधियों की जवाबदेही बढ़ाना बताया जा रहा है।

प्रस्तावित विधेयक में यह प्रावधान रखा गया है कि यदि प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री या कोई मंत्री किसी गंभीर आपराधिक मामले में गिरफ्तार होकर लगातार 30 दिनों तक हिरासत में रहता है, तो उसे अपने पद से हटाया जाएगा।

इस प्रावधान का उद्देश्य शासन व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना बताया गया है। हालांकि यह विधेयक अभी कानून नहीं बना है और संसदीय प्रक्रिया के अधीन है।

यह भी पढ़ें: Vikram Misri Extension: विदेश सचिव विक्रम मिस्री का कार्यकाल जुलाई 2027 तक बढ़ा, भारत की विदेश नीति को मिलेगी निरंतरता


JPC की रिपोर्ट में क्या रहेगा?

करीब दिसंबर 2025 से अब तक 10 दौर की बैठकों के बाद संयुक्त संसदीय समिति अपनी रिपोर्ट तैयार कर चुकी है।

सूत्रों के अनुसार, समिति का मानना है कि 30 दिनों की अवधि संबंधित व्यक्ति को न्यायालय से जमानत लेने का पर्याप्त अवसर देती है। इसलिए इस प्रावधान को प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के खिलाफ नहीं माना गया।

हालांकि रिपोर्ट में कानून के संभावित दुरुपयोग को रोकने के लिए कुछ सावधानियां (Caveats) जोड़ने की सिफारिश की जा सकती है।


📢 WhatsApp Channel से जुड़ें:
Join 4thNation Channel: https://whatsapp.com/channel/0029VaOjosfFHWq7ssCngl1j


130th Constitution Amendment Bill के इस प्रावधान पर क्यों हो रही है चर्चा?

130th Constitution Amendment Bill का सबसे चर्चित हिस्सा वही प्रावधान है जिसमें शीर्ष संवैधानिक पदों पर बैठे नेताओं के लिए 30 दिन की न्यायिक हिरासत के बाद पद छोड़ने की व्यवस्था प्रस्तावित की गई है।

समर्थकों का कहना है कि इससे शासन व्यवस्था में नैतिक जवाबदेही मजबूत होगी और गंभीर आपराधिक मामलों में संवैधानिक पदों की गरिमा बनी रहेगी।

वहीं आलोचकों का तर्क है कि केवल गिरफ्तारी के आधार पर किसी निर्वाचित प्रतिनिधि का पद समाप्त करना लोकतांत्रिक व्यवस्था और निर्दोष माने जाने के सिद्धांत पर प्रश्न खड़े कर सकता है।


विपक्ष ने क्यों जताई आपत्ति?

JPC में शामिल विपक्षी INDIA गठबंधन के अधिकांश सदस्यों ने समिति की बैठकों का बहिष्कार किया था।

विपक्ष का आरोप है कि 31 सदस्यीय समिति में सत्तारूढ़ गठबंधन के बहुमत के कारण उनके सुझावों को पर्याप्त महत्व नहीं दिया गया।

हालांकि समिति की अध्यक्षता कर रहीं भाजपा सांसद अपराजिता सारंगी के नेतृत्व में समिति ने अपनी प्रक्रिया जारी रखी और अब अंतिम रिपोर्ट तैयार कर ली है।


प्राकृतिक न्याय और कानूनी सुरक्षा पर समिति का नजरिया

समिति के भीतर हुई चर्चाओं के अनुसार, 130th Constitution Amendment Bill में 30 दिनों की अवधि इसलिए रखी गई है ताकि संबंधित जनप्रतिनिधि को न्यायालय में जमानत लेने और अपनी कानूनी दलीलें रखने का पर्याप्त अवसर मिल सके।

सूत्रों का कहना है कि समिति इस प्रावधान को प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का उल्लंघन नहीं मानती।

हालांकि संभावित दुरुपयोग रोकने के लिए अंतिम रिपोर्ट में कुछ अतिरिक्त सुरक्षा उपायों का सुझाव शामिल किया जा सकता है।


आगे क्या होगा?

समिति की अंतिम रिपोर्ट 17 जुलाई को स्वीकृत होने के बाद संसद के 20 जुलाई से शुरू होने वाले मानसून सत्र में पेश किए जाने की संभावना है।

इसके बाद सरकार रिपोर्ट पर विचार करेगी और यदि आवश्यक हुआ तो विधेयक को आगे की संसदीय प्रक्रिया के लिए प्रस्तुत किया जाएगा।

चूंकि यह अभी केवल समिति की सिफारिशों का चरण है, इसलिए अंतिम कानून बनने से पहले संसद में विस्तृत चर्चा और संभावित संशोधन भी हो सकते हैं।


130th Constitution Amendment Bill भारतीय लोकतंत्र और संवैधानिक व्यवस्था से जुड़ा एक महत्वपूर्ण प्रस्ताव है। JPC के शुरुआती संकेत बताते हैं कि 30 दिन की न्यायिक हिरासत के बाद मंत्री पद समाप्त करने वाले प्रावधान में बड़े बदलाव की संभावना नहीं है। हालांकि अंतिम निर्णय संसद में चर्चा, बहस और विधायी प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही होगा। इसलिए फिलहाल इसे प्रस्तावित विधेयक और समिति की संभावित सिफारिश के रूप में ही देखा जाना चाहिए।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *