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Small Savings Schemes की ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं, लगातार छठी तिमाही भी पुरानी दरें लागू रहेंगी

नई दिल्ली, 30 जून 2025।
वित्त मंत्रालय ने सोमवार को घोषणा की कि 1 जुलाई 2025 से शुरू होने वाली दूसरी तिमाही (जुलाई-सितंबर) के लिए छोटी बचत योजनाओं (Small Savings Schemes) की ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं किया जाएगा। यह निर्णय लगातार छठी तिमाही के लिए लिया गया है जब इन योजनाओं की दरों को यथावत रखा गया है।

प्रेस ट्रस्ट ऑफ इंडिया (PTI) की रिपोर्ट के अनुसार, वित्त मंत्रालय ने कहा है:

“वित्त वर्ष 2025-26 की दूसरी तिमाही, जो 1 जुलाई 2025 से शुरू होकर 30 सितंबर 2025 तक चलेगी, के लिए विभिन्न लघु बचत योजनाओं की ब्याज दरें पहले की तरह ही रहेंगी, जैसा कि पहली तिमाही (अप्रैल-जून) के लिए अधिसूचित किया गया था।”


📌 इन योजनाओं की ब्याज दरें इस प्रकार रहेंगी:

योजना का नामब्याज दर (जुलाई-सितंबर 2025)
सार्वजनिक भविष्य निधि (PPF)7.1%
सुकन्या समृद्धि योजना8.2%
3 वर्ष की सावधि जमा योजना7.1%
पोस्ट ऑफिस सेविंग्स डिपॉजिट4.0%
किसान विकास पत्र (KVP)7.5% (परिपक्वता अवधि: 115 महीने)
नेशनल सेविंग्स सर्टिफिकेट (NSC)7.7%
मंथली इनकम स्कीम (MIS)7.4%

🔍 पृष्ठभूमि और उद्देश्य:

छोटी बचत योजनाएं भारतीय डाक विभाग और बैंकों के माध्यम से संचालित की जाती हैं और ये योजनाएं मध्यमवर्गीय और निम्न आय वर्ग के लोगों के लिए एक सुरक्षित और स्थिर निवेश विकल्प प्रदान करती हैं।

सरकार ने पिछली बार इन योजनाओं की ब्याज दरों में बदलाव वित्त वर्ष 2023-24 की चौथी तिमाही (जनवरी-मार्च 2024) में किया था। इसके बाद से लगातार छह तिमाहियों से दरें अपरिवर्तित बनी हुई हैं।

रिपोर्ट के अनुसार, सरकार का उद्देश्य घरेलू बचत को प्रोत्साहित करना है, ताकि लोग जोखिम भरे विकल्पों जैसे शेयर बाजार के मुकाबले सुरक्षित निवेश को प्राथमिकता दें।


🗣️ विशेषज्ञों की राय:

वित्तीय विशेषज्ञों का मानना है कि यह निर्णय आम जनता को मुद्रास्फीति के दबाव के बीच स्थिर आय विकल्प प्रदान करने के लिहाज से उपयुक्त है। हालांकि कुछ लोग यह भी तर्क देते हैं कि ब्याज दरों में वृद्धि करके सरकार और अधिक घरेलू बचत को आकर्षित कर सकती थी।


📌 निष्कर्ष:

छोटी बचत योजनाएं जैसे PPF, NSC, KVP, सुकन्या समृद्धि योजना आदि भारत के आम नागरिकों के लिए एक विश्वसनीय निवेश माध्यम हैं। ब्याज दरों को स्थिर बनाए रखने का यह निर्णय एक ओर जहां वित्तीय स्थिरता का संकेत देता है, वहीं दूसरी ओर इससे लंबी अवधि के निवेशकों को योजना बनाने में सुविधा मिलती है।