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Raipur Durga Puja: 48 लाख का भव्य पंडाल, खास आकर्षण

छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में Raipur Durga Puja का उत्साह देखने को मिल रहा है। माना इलाके में बंगाली दुर्गा पूजा के आयोजन के लिए भव्य पंडाल तैयार किए गए हैं। कहीं पुरी के जगन्नाथ मंदिर की झलक दिखाई दे रही है, तो कहीं काशी विश्वनाथ मंदिर की तर्ज पर सजावट की गई है। आकर्षक रोशनी, पारंपरिक पूजा और भव्य पंडालों के बीच दुर्गोत्सव लोगों के लिए खास आकर्षण बन गया है।

माना कैंप की सार्वजनिक श्री श्री दुर्गा पूजा समिति और मान बाजार सार्वजनिक दुर्गा पूजा समिति वर्षों से इस परंपरा को आगे बढ़ा रही हैं। इन आयोजनों में आधुनिक सजावट के साथ बंगाली संस्कृति और धार्मिक मान्यताओं का भी ध्यान रखा जाता है।

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Raipur Durga Puja: 22 लाख में बना जगन्नाथ मंदिर जैसा पंडाल

माना कैंप की सार्वजनिक श्री श्री दुर्गा पूजा समिति ने इस वर्ष पुरी के जगन्नाथ मंदिर की थीम पर पंडाल तैयार कराया है। पंडाल की भव्यता और मंदिर की शैली इसे आकर्षक बना रही है।

समिति के अध्यक्ष रंजीत कुमार डे के अनुसार, पंडाल बनाने में करीब डेढ़ महीने का समय लगा। इसके निर्माण के लिए कोलकाता से 22 कारीगर आए थे, जिन्होंने मिलकर इसे तैयार किया।

केवल पंडाल के निर्माण पर लगभग 20 से 22 लाख रुपये खर्च किए गए हैं। आयोजन में सजावट के साथ पारंपरिक धार्मिक स्वरूप को बनाए रखने की भी कोशिश की गई है।

47 हजार से बढ़कर 48 लाख रुपये तक पहुंचा बजट

Raipur Durga Puja की भव्यता के पीछे वर्षों की मेहनत और समिति की परंपरा है। रंजीत कुमार डे ने बताया कि वर्ष 1964 में शुरू हुआ यह आयोजन समय के साथ लगातार विस्तृत होता गया।

शुरुआती वर्षों में पूजा साधारण तरीके से आयोजित की जाती थी। धीरे-धीरे पंडाल निर्माण, सजावट और रोशनी पर ध्यान बढ़ा, जिससे आयोजन का स्वरूप पहले से अधिक भव्य हो गया।

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समिति के मुताबिक, वर्ष 1995 में पूजा का बजट करीब 47 हजार रुपये था। आज यह बढ़कर लगभग 45 से 48 लाख रुपये तक पहुंच गया है। यह बदलाव आयोजन के विस्तार और समय के साथ बढ़ती तैयारियों को दर्शाता है।

पंडाल निर्माण का काम कोलकाता के कारीगरों ने किया है, जबकि सड़क पर आकर्षक रोशनी की व्यवस्था कोलकाता के चंदननगर के कारीगरों ने संभाली है।

मान बाजार में काशी विश्वनाथ मंदिर की थीम

माना क्षेत्र के मान बाजार में भी दुर्गा पूजा की तैयारियां खास हैं। यहां मान बाजार सार्वजनिक दुर्गा पूजा समिति ने इस बार काशी विश्वनाथ मंदिर की तर्ज पर पंडाल तैयार कराया है।

समिति के सचिव विष्णु नाथ पाल के अनुसार, यहां कई दशकों से दुर्गा पूजा आयोजित की जा रही है। बुजुर्गों ने करीब 50 साल पहले 1,100 से 1,200 रुपये के बजट में पूजा की शुरुआत की थी।

आज आयोजन का बजट बढ़कर लगभग 35 से 40 लाख रुपये तक पहुंच गया है। समिति का कहना है कि उसका उद्देश्य पुरानी परंपरा को बनाए रखना और आने वाली पीढ़ियों तक धार्मिक-सांस्कृतिक विरासत पहुंचाना है।

बंगाली परंपराओं के साथ तैयार होती है मां दुर्गा की प्रतिमा

Raipur Durga Puja की खासियत सिर्फ भव्य पंडाल नहीं, बल्कि इससे जुड़ी बंगाली परंपराएं भी हैं। मान्यताओं के अनुसार, मां दुर्गा की प्रतिमा तैयार करने से पहले अलग-अलग स्थानों की मिट्टी और नदियों का जल एकत्र करने की परंपरा रही है।

इस परंपरा में वेश्यालय के स्थान से मिट्टी लाने का भी उल्लेख मिलता है। इसे बंगाली दुर्गा पूजा की पारंपरिक धार्मिक मान्यताओं से जोड़कर देखा जाता है। हालांकि, इस परंपरा के पालन का विवरण अलग-अलग आयोजनों में भिन्न हो सकता है।

माना क्षेत्र में प्रतिमा निर्माण में कोलकाता से आए कारीगरों के साथ स्थानीय कलाकार बिजू घोष भी सहयोग करते हैं। इससे आयोजन में बाहरी कारीगरों के अनुभव और स्थानीय कला का संगम देखने को मिलता है।

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Raipur Durga Puja में परंपरा और आधुनिकता का संगम

माना कैंप और मान बाजार की दुर्गा पूजा समितियों के आयोजन बताते हैं कि रायपुर में यह उत्सव केवल धार्मिक कार्यक्रम तक सीमित नहीं है। इसके साथ स्थानीय समुदाय की भागीदारी, पारंपरिक कला और सांस्कृतिक विरासत भी जुड़ी हुई है।

एक ओर लाखों रुपये की लागत से मंदिरों की तर्ज पर पंडाल तैयार किए जा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर दशकों पुरानी पूजा परंपराओं को भी आगे बढ़ाया जा रहा है।

Raipur Durga Puja इस वर्ष भव्य पंडालों, आकर्षक रोशनी और बंगाली परंपराओं के कारण खास आकर्षण बन रही है। माना कैंप में जगन्नाथ मंदिर की थीम पर 20 से 22 लाख रुपये में तैयार पंडाल और मान बाजार में काशी विश्वनाथ मंदिर की शैली आयोजन को अलग पहचान दे रही है। वर्षों से चली आ रही यह परंपरा रायपुर की धार्मिक और सांस्कृतिक विविधता को दर्शाती है।

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