Chhattisgarh Detention मामले ने अब कानूनी रूप ले लिया है। पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद के चार प्रवासी मजदूर करीब एक महीने से बिलासपुर में हिरासत में हैं। इनके नाम SIR यानी Special Intensive Revision के दौरान मतदाता सूची से हटाए गए थे और चारों ने इस फैसले को अपीलीय ट्रिब्यूनल में चुनौती दी है।
मामले में सोमवार को कलकत्ता हाईकोर्ट में सुनवाई हुई। जस्टिस कृष्ण राव ने सवाल उठाया कि जब SIR से जुड़े मामलों की सुनवाई के लिए अपीलीय ट्रिब्यूनल मौजूद है, तो क्या छत्तीसगढ़ का Foreigners Registration Office (FRO) समानांतर रूप से इन लोगों की नागरिकता तय कर सकता है।
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Chhattisgarh Detention में कौन-कौन हैं?
हिरासत में रखे गए चार लोगों की पहचान नसीरुद्दीन शेख, लल्टू शेख, सफीकुल इस्लाम और साबिर शेख के रूप में हुई है। ये सभी मुर्शिदाबाद जिले के रहने वाले हैं।
रिपोर्ट के मुताबिक, चारों के नाम पश्चिम बंगाल की SIR प्रक्रिया के दौरान मतदाता सूची से हटाए गए थे। उन्होंने इस हटाए जाने के खिलाफ निर्धारित अपीलीय ट्रिब्यूनल का रुख किया है।
इन लोगों के परिवार और याचिकाकर्ता पक्ष का कहना है कि चारों के पास भारतीय नागरिक होने से जुड़े जरूरी दस्तावेज मौजूद हैं। अदालत में यह भी बताया गया कि चारों के माता-पिता के नाम 2002 की SIR सूची में थे और चारों ने 2026 का विधानसभा चुनाव भी वोट किया था।
23 मजदूरों को लिया गया था हिरासत में
यह मामला सितंबर में सामने आया था, जब बिलासपुर पुलिस ने सिरगिट्टी क्षेत्र से 23 लोगों को संदिग्ध बांग्लादेशी नागरिक होने के संदेह में हिरासत में लिया था।
पुलिस ने उस समय दस्तावेजों और स्थायी पते की जांच की थी। अधिकारियों के मुताबिक, कुछ दस्तावेजों में दर्ज पतों को लेकर विसंगतियां सामने आई थीं और इन्हीं के आधार पर विस्तृत सत्यापन शुरू किया गया था।
इन 23 लोगों को रायपुर के होल्डिंग/डिटेंशन सेंटर भेजा गया था। बाद में पश्चिम बंगाल में उनके पते और दस्तावेजों की जांच की गई।
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Chhattisgarh Detention मामले में 19 को मिली रिहाई
पुलिस सत्यापन के बाद 23 में से 19 लोगों को रिहा कर दिया गया। बिलासपुर के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक राजनेश सिंह के अनुसार, इन लोगों को दस्तावेजों के सत्यापन के बाद छोड़ा गया।
हालांकि चार लोग अभी भी हिरासत में हैं। पुलिस का कहना है कि इन चारों के रिकॉर्ड का क्रॉस-वेरिफिकेशन जारी है और आगे की कार्रवाई सत्यापन रिपोर्ट पर निर्भर करेगी।
इस घटनाक्रम के बाद सवाल यह उठा कि अगर 19 लोगों के दस्तावेजों की जांच के बाद उन्हें भारतीय नागरिक माना गया, तो बाकी चार की हिरासत क्यों जारी है।
SIR और नागरिकता के बीच क्या है विवाद?
मामले की अहम कड़ी पश्चिम बंगाल की SIR प्रक्रिया है। चारों लोगों के नाम मतदाता सूची से हटाए गए थे और इस फैसले को उन्होंने अपीलीय ट्रिब्यूनल में चुनौती दी है।
याचिकाकर्ता पक्ष का कहना है कि जब अपील अभी लंबित है, तब केवल मतदाता सूची से नाम हटना नागरिकता पर अंतिम फैसला नहीं माना जा सकता। इसी मुद्दे पर हाईकोर्ट ने FRO की भूमिका को लेकर सवाल उठाया है।
हाईकोर्ट ने FRO की भूमिका पर उठाए सवाल
कलकत्ता हाईकोर्ट ने पूछा कि जब SIR से जुड़े मामलों पर अपीलीय ट्रिब्यूनल सुनवाई कर रहा है, तो FRO समानांतर रूप से नागरिकता का फैसला कैसे कर सकता है।
जस्टिस कृष्ण राव ने इस स्थिति को लेकर गंभीर सवाल उठाए और कहा कि अगर एक प्राधिकरण किसी व्यक्ति को भारतीय नहीं मानकर कार्रवाई करता है, तो फिर अपीलीय ट्रिब्यूनल की सुनवाई का क्या प्रभाव रह जाएगा।
अदालत ने FRO को मामले में पक्षकार बनाने को कहा है। साथ ही FRO से रिपोर्ट मांगी गई है। इस मामले की अगली सुनवाई 8 अक्टूबर को होगी।
परिवारों की नजर अब कोर्ट पर
चारों मजदूरों के परिवार उनकी रिहाई की उम्मीद कर रहे हैं। परिवारों का कहना है कि वे लंबे समय से छत्तीसगढ़ में काम कर रहे हैं और उनके पास पहचान से जुड़े दस्तावेज हैं।
इस मामले में यह भी महत्वपूर्ण है कि हिरासत में लिए गए 23 लोगों में से 19 को दस्तावेज सत्यापन के बाद छोड़ दिया गया है। अब बाकी चार के मामले में अदालत और प्रशासन की अगली कार्रवाई पर नजर है।
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Chhattisgarh Detention मामले में आगे क्या?
फिलहाल चारों मजदूरों की नागरिकता को लेकर अंतिम न्यायिक निष्कर्ष सामने नहीं आया है। पुलिस की ओर से दस्तावेजों का सत्यापन जारी है, जबकि SIR से नाम हटाए जाने के खिलाफ उनकी अपील भी लंबित है।
Chhattisgarh Detention मामले में अगली सुनवाई 8 अक्टूबर को महत्वपूर्ण हो सकती है। हाईकोर्ट की रिपोर्ट और FRO की स्थिति स्पष्ट होने के बाद यह पता चलेगा कि चारों मजदूरों की हिरासत और SIR अपील के बीच कानूनी स्थिति किस दिशा में जाती है।
Chhattisgarh Detention मामले ने SIR में मतदाता सूची से नाम हटने, नागरिकता सत्यापन और प्रशासनिक अधिकारों के बीच महत्वपूर्ण सवाल खड़े किए हैं। 23 में से 19 लोगों की रिहाई के बाद अब चार मजदूरों की हिरासत पर कलकत्ता हाईकोर्ट की नजर है। 8 अक्टूबर की सुनवाई इस मामले में अगला बड़ा कदम तय कर सकती है।
