Bastar Divyang Camp ने लंबे समय तक नक्सल हिंसा और बारूदी सुरंगों की विभीषिका झेल चुके बस्तर के दिव्यांगजनों के जीवन में नई उम्मीद जगाई है। जगदलपुर के धरमपुरा क्रीड़ा परिसर में आयोजित इस विशाल निःशुल्क सहायता एवं सहायक उपकरण वितरण शिविर में संभाग के जरूरतमंद लोगों को कृत्रिम अंग और अन्य उपकरण उपलब्ध कराए जा रहे हैं।
‘सेवा संकल्प अभियान’ के तहत आयोजित इस पहल में 3,800 से अधिक जरूरतमंदों का पंजीयन हुआ है। नक्सल विस्फोटों, सड़क दुर्घटनाओं और अन्य कारणों से अंग गंवाने वाले नागरिकों को कृत्रिम अंग देकर उन्हें आत्मनिर्भर बनाने का प्रयास किया जा रहा है।
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Bastar Divyang Camp में 3,800 से ज्यादा पंजीयन
जगदलपुर में आयोजित शिविर में बस्तर, कोंडागांव, नारायणपुर और कांकेर जिले के हितग्राही शामिल हो रहे हैं। पहले चरण में 5 से 7 अक्टूबर तक इन जिलों के जरूरतमंदों को सहायता दी जा रही है।
अकेले बस्तर जिले से 1,570 हितग्राही इस चरण में शामिल हैं। शिविर का उद्देश्य केवल उपकरण देना नहीं, बल्कि दिव्यांगजनों को सामाजिक सुरक्षा और आत्मनिर्भरता से जोड़ना भी है।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने वर्चुअल माध्यम से कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि बस्तर अब हिंसा के दौर से बाहर निकलकर शांति और विकास की दिशा में आगे बढ़ रहा है।
उन्होंने कहा कि यह आयोजन दिव्यांगजनों के सम्मान, आत्मनिर्भरता और सशक्तिकरण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। सरकार और समाज ऐसे पीड़ितों के साथ संवेदनशीलता से खड़े हैं।
मौके पर बन रहे आधुनिक कृत्रिम हाथ-पैर
Bastar Divyang Camp की सबसे खास विशेषता यहां स्थापित ऑन-साइट आधुनिक कार्यशाला है। विशेषज्ञ दिव्यांगजनों का व्यक्तिगत नाप लेकर मौके पर ही आधुनिक कृत्रिम हाथ, पैर और कैलिपर्स तैयार कर उन्हें लगाए जा रहे हैं।
शिविर के पहले ही दिन 70 से अधिक हितग्राहियों को कृत्रिम अंग उपलब्ध कराए गए। इसके अलावा जरूरतमंदों को व्हीलचेयर, ट्राइसाइकिल, कैलिपर्स, बैसाखी और श्रवण यंत्र भी पूरी तरह निःशुल्क दिए जा रहे हैं।
यह शिविर जिला प्रशासन और समाज कल्याण विभाग के समन्वय से भगवान महावीर विकलांग सहायता समिति जयपुर, एनएसई फाउंडेशन और भारतीय जैन संघटना के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित किया जा रहा है।
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Bastar Divyang Camp में स्वास्थ्य सेवाएं भी
शिविर में दिव्यांगजनों को उपकरण देने के साथ स्वास्थ्य संबंधी सुविधाएं भी उपलब्ध कराई जा रही हैं। स्वास्थ्य विभाग की मेडिकल टीम मौके पर हितग्राहियों का परीक्षण कर रही है।
परीक्षण के बाद जरूरतमंदों को मेडिकल सर्टिफिकेट भी उपलब्ध कराया जा रहा है। इसके साथ ही पात्र हितग्राहियों को दिव्यांग पेंशन और अन्य सामाजिक सुरक्षा योजनाओं से जोड़ने की प्रक्रिया भी शिविर स्थल पर की जा रही है।
इस व्यवस्था से हितग्राहियों को भविष्य में सरकारी कार्यालयों के अनावश्यक चक्कर लगाने से राहत मिलने की उम्मीद है।
नक्सल पीड़ितों को आत्मनिर्भर बनाने पर जोर
उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा ने कहा कि नक्सलवाद के खिलाफ लड़ाई केवल सुरक्षा कार्रवाई तक सीमित नहीं है। बारूदी सुरंगों और आईईडी विस्फोटों में अपने अंग गंवाने वाले नागरिकों को फिर से आत्मनिर्भर बनाना भी इस संघर्ष का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
उन्होंने आईईडी ब्लास्ट के शिकार ग्रामीण संतोष पोयाम तथा ड्यूटी के दौरान घायल पुलिस जवान राकेश कुमार यादव और घासीराम मांझी की जीवटता का उल्लेख किया। कृत्रिम अंगों की मदद से ये लोग अब बिना सहारे चलने के लिए तैयार हो रहे हैं।
उप मुख्यमंत्री ने कहा कि हिंसा ने भले ही लोगों को शारीरिक नुकसान पहुंचाया हो, लेकिन उनका आत्मबल आज भी मजबूत है।
दूसरे चरण में दंतेवाड़ा में होगा शिविर
भारतीय जैन संघटना के डॉ. अतुल जैन के अनुसार, शिविर पहले कवर्धा में आयोजित करने का प्रस्ताव था। लेकिन उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा के सुझाव पर बस्तर के नक्सल पीड़ितों को प्राथमिकता देते हुए इसे जगदलपुर में आयोजित किया गया।
शिविर का दूसरा चरण 15 से 17 अक्टूबर तक दंतेवाड़ा में आयोजित होगा। इसमें दंतेवाड़ा, बीजापुर और सुकमा जिले के जरूरतमंदों को लाभान्वित किया जाएगा।
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बस्तर में शांति और विकास का संदेश
कार्यक्रम में बस्तर सांसद महेश कश्यप ने ‘नर सेवा ही नारायण सेवा’ का संदेश देते हुए समाज के अंतिम व्यक्ति की मदद को सबसे बड़ी सेवा बताया।
चित्रकोट विधायक विनायक गोयल ने बस्तर को नक्सल मुक्त बनाने के संकल्प और पीड़ितों के संपूर्ण पुनर्वास को प्राथमिकता देने की बात कही।
कार्यक्रम में जगदलपुर विधायक किरण सिंह देव, जिला पंचायत अध्यक्ष वेदवती कश्यप, कमिश्नर डोमन सिंह, पुलिस महानिरीक्षक बीएन मीणा, कलेक्टर आकाश छिकारा, जिला पंचायत सीईओ तन्मय खन्ना सहित जनप्रतिनिधि, अधिकारी और बड़ी संख्या में नागरिक उपस्थित रहे।
Bastar Divyang Camp बस्तर में नक्सल हिंसा से प्रभावित नागरिकों के पुनर्वास और आत्मनिर्भरता की दिशा में महत्वपूर्ण पहल बनकर सामने आया है। कृत्रिम अंग, सहायक उपकरण, स्वास्थ्य जांच और सामाजिक सुरक्षा योजनाओं को एक ही स्थान पर उपलब्ध कराने से पीड़ितों को सीधा लाभ मिल रहा है। यह अभियान बस्तर में शांति, विश्वास, सम्मान और विकास की नई तस्वीर को मजबूत करने की दिशा में अहम कदम है।
