Gyanesh Kumar CEC को लेकर सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका पर 29 सितंबर 2026 को महत्वपूर्ण घटनाक्रम सामने आया। सुप्रीम कोर्ट ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ दायर याचिका को अगले सप्ताह सूचीबद्ध करने पर सहमति जताई है। याचिका में उनके पद पर रहते हुए कार्य करने पर रोक लगाने और निर्वाचन आयोग के फैसलों को कथित तौर पर एकतरफा लेने के आरोपों की न्यायिक जांच की मांग की गई है।
यहां यह स्पष्ट करना जरूरी है कि सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल ज्ञानेश कुमार को निलंबित करने का आदेश नहीं दिया है। अदालत ने केवल याचिका को अगले सप्ताह सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करने पर सहमति जताई है।
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Gyanesh Kumar CEC याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में क्या हुआ?
याचिकाकर्ता राकेश कुमार सिंह की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता विकास सिंह और अधिवक्ता मुदित गुप्ता ने मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत के समक्ष मामले की जल्द सुनवाई के लिए मौखिक उल्लेख किया।
याचिका में मांग की गई है कि अंतिम सुनवाई तक ज्ञानेश कुमार को मुख्य निर्वाचन आयुक्त के कार्यों का इस्तेमाल करने से रोका जाए। मुख्य न्यायाधीश ने मामले को अगले सप्ताह सूचीबद्ध करने पर सहमति जताई।
इस मामले की अगली सुनवाई में अदालत के सामने याचिका में उठाए गए कानूनी सवालों पर विचार होना है। फिलहाल याचिका में लगाए गए आरोप न्यायिक रूप से सिद्ध तथ्य नहीं हैं।
Gyanesh Kumar CEC पर क्या आरोप लगाए गए हैं?
याचिका में आरोप लगाया गया है कि निर्वाचन आयोग के कुछ निर्णय मुख्य निर्वाचन आयुक्त द्वारा कथित तौर पर अकेले लिए गए। याचिकाकर्ता ने दावा किया है कि अक्टूबर 2025 से अगस्त 2026 के बीच निर्वाचन आयुक्तों सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने कम से कम 14 मामलों में आपत्तियां दर्ज की थीं।
याचिका में इन दावों के आधार पर यह कानूनी सवाल उठाया गया है कि क्या CEC, आयोग के अध्यक्ष के रूप में, निर्वाचन आयोग के सामूहिक अधिकार का इस्तेमाल अकेले कर सकते हैं।
यह ध्यान रखना जरूरी है कि ये याचिकाकर्ता के आरोप और कानूनी दलीलें हैं। अदालत ने अभी इन आरोपों पर अंतिम निष्कर्ष नहीं दिया है।
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Gyanesh Kumar CEC मामले में ECI के सामूहिक फैसले का सवाल
याचिका में संविधान के अनुच्छेद 324 और 2023 के संबंधित कानून की धारा 18 का हवाला दिया गया है। याचिकाकर्ता का तर्क है कि निर्वाचन आयोग एक सामूहिक निकाय है और उसके फैसले निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार होने चाहिए।
याचिका में यह भी कहा गया है कि यदि मुख्य निर्वाचन आयुक्त और अन्य निर्वाचन आयुक्त किसी विषय पर अलग-अलग राय रखते हैं, तो कानून में बहुमत के आधार पर निर्णय लेने की व्यवस्था है।
इसलिए सुप्रीम कोर्ट के सामने मुख्य कानूनी प्रश्नों में से एक यह होगा कि आयोग की निर्णय प्रक्रिया में CEC की व्यक्तिगत और सामूहिक शक्तियों की सीमा क्या है।
रिकॉर्ड सुरक्षित रखने की भी मांग
याचिका में निर्वाचन आयोग को संबंधित दस्तावेज और इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड सुरक्षित रखने का निर्देश देने की मांग भी की गई है। इसमें बैठक के मिनट्स, एजेंडा, फाइल नोटिंग, अप्रूवल शीट, पत्राचार और कार्य-वितरण से जुड़े रिकॉर्ड शामिल हैं।
इसके अलावा IT एक्सेस रिकॉर्ड, सर्वर लॉग, ऑडिट ट्रेल, डेटाबेस में बदलाव और सॉफ्टवेयर से जुड़े रिकॉर्ड सुरक्षित रखने की मांग की गई है। याचिका में 1 अक्टूबर 2025 से अब तक की अवधि से जुड़े रिकॉर्ड का उल्लेख किया गया है।
Form-6 और मतदाता सूची का मुद्दा
याचिका में Form-6 में किए गए बदलावों और मतदाता सूची के Special Intensive Revision (SIR) से संबंधित मुद्दे भी उठाए गए हैं।
याचिकाकर्ता ने मांग की है कि Form-6 में आगे कोई महत्वपूर्ण बदलाव न किया जाए और किसी पात्र नागरिक को केवल विवादित जानकारी उपलब्ध नहीं कराने के आधार पर मतदाता सूची में शामिल होने से वंचित न किया जाए।
यह मुद्दा मतदाता सूची की प्रक्रिया और निर्वाचन आयोग की कार्यप्रणाली से जुड़ा होने के कारण मामले के कानूनी दायरे को व्यापक बनाता है।
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आगे क्या होगा?
सुप्रीम कोर्ट की आधिकारिक वेबसाइट पर 29 सितंबर 2026 की मौखिक उल्लेख सूची और संबंधित लिस्टिंग सूचनाएं उपलब्ध हैं। अदालत ने याचिका को अगले सप्ताह सूचीबद्ध करने पर सहमति जताई है।
आगे की सुनवाई में अदालत यह तय कर सकती है कि याचिका में उठाए गए मुद्दों पर विस्तृत सुनवाई की आवश्यकता है या नहीं। जब तक अदालत कोई आदेश नहीं देती, CEC को निलंबित किए जाने की खबर को सही मानना उचित नहीं होगा।
Gyanesh Kumar CEC से जुड़ा यह मामला अब सुप्रीम कोर्ट के सामने पहुंच चुका है। याचिका में CEC की कथित एकतरफा कार्यप्रणाली, निर्वाचन आयोग की सामूहिक निर्णय प्रक्रिया, SIR और Form-6 से जुड़े कई सवाल उठाए गए हैं। 29 सितंबर को अदालत ने मामले को अगले सप्ताह सूचीबद्ध करने पर सहमति जताई है। अब आगे की सुनवाई में अदालत की टिप्पणियों और आदेश से इस मामले की दिशा स्पष्ट होगी।
