Manoj Jarange Patil Hunger Strike आखिरकार 20 दिन बाद खत्म हो गई है। मराठा आरक्षण की मांग को लेकर अनशन कर रहे मनोज जरांगे पाटील ने महाराष्ट्र सरकार को अपनी मांगों पर कार्रवाई के लिए तीन महीने का समय दिया है। यह फैसला बीड जिले के पाटोदा में सरकार के प्रतिनिधिमंडल के साथ बातचीत के बाद सामने आया।
जरांगे पाटील ने 29 अगस्त को अनशन शुरू किया था। इसके बाद उन्होंने मुंबई की ओर मार्च करने की घोषणा की थी, लेकिन रास्ते में स्वास्थ्य खराब होने के कारण उनका काफिला पाटोदा में रुक गया। रिपोर्टों के मुताबिक, इसी दौरान सरकार और जरांगे के बीच बातचीत हुई।
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Manoj Jarange Patil Hunger Strike क्यों खत्म हुई?
जरांगे पाटील ने समर्थकों को बताया कि लंबे समय तक भूख हड़ताल के कारण उनकी शारीरिक स्थिति कमजोर हो गई है। उन्होंने कहा कि ऐसी हालत में हजारों लोगों के साथ लंबी यात्रा करना उनके लिए मुश्किल है।
रिपोर्टों के अनुसार, सरकार के प्रतिनिधिमंडल ने उनसे बातचीत कर उनकी मांगों पर प्रक्रिया आगे बढ़ाने के लिए समय मांगा। इसके बाद जरांगे ने तीन महीने की मोहलत देने का फैसला किया।
उन्होंने समर्थकों से भी अपील की कि वे उनके वाहन के साथ बड़ी संख्या में आगे न बढ़ें और निर्धारित स्थानों पर ही उनसे मिलें। इससे फिलहाल मुंबई की ओर प्रस्तावित बड़े काफिले पर विराम लगा है।
पाटोदा में सरकार से क्या बातचीत हुई?
सरकारी प्रतिनिधिमंडल में मंत्री राधाकृष्ण विखे पाटील, दादा भुसे, एमएलसी प्रसाद लाड, विधायक सुरेश धस और वरिष्ठ अधिकारी शामिल थे। बातचीत में मराठा समुदाय के लिए कुणबी प्रमाणपत्र और ऐतिहासिक दस्तावेजों से जुड़े मुद्दों पर चर्चा हुई।
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की ओर से भी कहा गया कि सरकार ने जरांगे की 13 मांगों में से 12 पर कार्रवाई को स्वीकार किया है, जबकि एक मांग से जुड़े कानूनी पहलुओं पर प्रक्रिया जारी है। यह सरकार का पक्ष है।
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Manoj Jarange Patil की 58 लाख रिकॉर्ड वाली मांग
जरांगे पाटील का कहना है कि करीब 58 लाख पुराने कुणबी रिकॉर्ड सामने आए हैं। उनके अनुसार, इन ऐतिहासिक दस्तावेजों के आधार पर पात्र मराठा परिवारों को कुणबी प्रमाणपत्र मिलने का रास्ता खुल सकता है।
उन्होंने सरकार से इन रिकॉर्ड को सुरक्षित रखने और संबंधित ऐतिहासिक दस्तावेजों को आधिकारिक रूप से मान्यता देने की मांग की है। सरकार ने इस प्रक्रिया में कानूनी और प्रशासनिक पहलुओं की बात कही है।
महाराष्ट्र सरकार के आधिकारिक जिला पोर्टलों पर भी कुणबी-मराठा पुराने रिकॉर्ड से संबंधित दस्तावेज उपलब्ध हैं। छत्रपति संभाजीनगर संभाग की वेबसाइट पर बीड, जालना, परभणी, लातूर, हिंगोली, नांदेड और धाराशिव समेत जिलों के रिकॉर्ड के लिए अलग व्यवस्था दी गई है।
सरकार को क्यों दिया 3 महीने का समय?
जरांगे पाटील ने स्पष्ट किया है कि तीन महीने की अवधि के दौरान सरकार को उनकी मांगों पर ठोस कार्रवाई करनी होगी। उनका कहना है कि यदि इस समय में अपेक्षित कदम नहीं उठाए गए तो आंदोलन फिर तेज किया जा सकता है।
इंडिया टुडे की रिपोर्ट के अनुसार, जरांगे ने सरकार को चेतावनी दी कि मांगों पर प्रगति नहीं होने की स्थिति में आंदोलन को मुंबई तक ले जाया जा सकता है।
यह फिलहाल आंदोलन की समाप्ति के बजाय तीन महीने के लिए एक अस्थायी विराम के रूप में सामने आया है।
Manoj Jarange Patil के आरोपों पर क्या स्थिति है?
जरांगे पाटील ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को लेकर कई आरोप लगाए और सरकार की नीतियों पर सवाल उठाए हैं। इनमें आंदोलन से जुड़े दस्तावेजों और उनके खिलाफ कथित साजिश जैसे दावे भी शामिल हैं।
इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध रिपोर्टों में नहीं हुई है। इसलिए इन्हें जरांगे पाटील के आरोप या दावे के रूप में ही देखा जाना चाहिए। दूसरी ओर, सरकार ने आरक्षण से जुड़े कानूनी और प्रशासनिक मुद्दों पर अपनी स्थिति अलग से रखी है।
मराठा आरक्षण आंदोलन की आगे की रणनीति
20 दिन के अनशन के बाद अब सबसे महत्वपूर्ण बात यह होगी कि सरकार अगले तीन महीनों में कुणबी प्रमाणपत्र, ऐतिहासिक गजट और रिकॉर्ड से जुड़े मुद्दों पर क्या प्रशासनिक तथा कानूनी कदम उठाती है।
महाराष्ट्र सरकार के आधिकारिक रिकॉर्ड में कुणबी और मराठा-कुणबी से संबंधित दस्तावेजों की व्यवस्था पहले से मौजूद है। इससे आने वाले समय में रिकॉर्ड की जांच और पात्रता प्रक्रिया महत्वपूर्ण हो सकती है।
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Manoj Jarange Patil Hunger Strike के 20 दिन बाद खत्म होने से फिलहाल मराठा आरक्षण आंदोलन को तीन महीने का नया चरण मिला है। जरांगे पाटील ने सरकार को समय दिया है, लेकिन साथ ही मांगें पूरी नहीं होने पर आंदोलन दोबारा तेज करने की बात भी कही है। अब नजर सरकार की कार्रवाई और कुणबी रिकॉर्ड से जुड़े अगले फैसलों पर रहेगी।
