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FCRA Amendment Bill पर बड़ा प्रक्रियात्मक अपडेट

FCRA Amendment Bill की जांच कर रही संयुक्त संसदीय समिति (JPC) में लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने राज्यसभा के दो सदस्यों को “विशेष आमंत्रित” के तौर पर नामित किया है। लोकसभा बुलेटिन के अनुसार, समाजवादी पार्टी के जावेद अली खान और नेशनल पीपुल्स पार्टी के जेम्स पांगसांग कोंगकाल संगमा को यह जिम्मेदारी दी गई है।

यह नामांकन 31 सदस्यीय JPC की पहली बैठक से पहले किया गया है। समिति की पहली बैठक 18 सितंबर 2026 को निर्धारित है, जिसमें विदेश योगदान (विनियमन) संशोधन विधेयक, 2026 पर आगे की जांच की प्रक्रिया शुरू होगी।

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FCRA Amendment Bill की JPC में दो नई भूमिकाएं

FCRA Amendment Bill को संसद ने विस्तृत जांच के लिए संयुक्त संसदीय समिति के पास भेजा है। इस समिति की अध्यक्षता भाजपा सांसद संजय जायसवाल कर रहे हैं। समिति में कुल 31 सदस्य हैं, जिनमें 21 लोकसभा और 10 राज्यसभा सदस्य शामिल हैं।

दो नए नामित सांसद नियमित सदस्य नहीं हैं। उन्हें “विशेष आमंत्रित” के रूप में समिति की बैठकों में शामिल होने की अनुमति दी गई है। इस व्यवस्था का उद्देश्य समिति की चर्चा में विशेष रुचि या विशेषज्ञता रखने वाले सांसदों की भागीदारी सुनिश्चित करना है।

विशेष आमंत्रित सांसदों के अधिकार क्या हैं?

पूर्व लोकसभा महासचिव पी.डी.टी. आचार्य ने PTI को बताया कि लोकसभा की कार्यप्रणाली और कार्य संचालन नियमों के Rule 299 के तहत समिति के नियमित सदस्य नहीं होने वाले सांसद कुछ परिस्थितियों में समिति की कार्यवाही में उपस्थित हो सकते हैं।

हालांकि, ऐसे सांसद समिति को संबोधित नहीं कर सकते और न ही नियमित समिति सदस्यों के साथ बैठ सकते हैं। आचार्य के अनुसार, विशेष रुचि या किसी खास क्षेत्र में विशेषज्ञता रखने वाले सांसदों को विशेष आमंत्रित बनाया जा सकता है। वे बैठक के दौरान अधिकारियों के साथ बैठ सकते हैं, लेकिन समिति के सदस्यों की निर्धारित सीटों पर नहीं बैठेंगे।

इसलिए जावेद अली खान और जेम्स पांगसांग कोंगकाल संगमा की भूमिका नियमित JPC सदस्यों से अलग होगी। वे समिति की बैठकों में उपस्थित रहेंगे, लेकिन उनके अधिकार सामान्य सदस्यों के समान नहीं होंगे।

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FCRA Amendment Bill की जांच क्यों महत्वपूर्ण है?

FCRA Amendment Bill, 2026 को लोकसभा में 25 मार्च को पेश किया गया था। यह मौजूदा Foreign Contribution (Regulation) Act, 2010 में बदलाव का प्रस्ताव करता है। सरकार का कहना है कि प्रस्तावित बदलाव विदेशी योगदान के नियमन को मजबूत करने और यह सुनिश्चित करने से जुड़े हैं कि विदेशी धन का इस्तेमाल निर्धारित उद्देश्यों के लिए हो।

वहीं, बिल को लेकर राजनीतिक दलों और विभिन्न संगठनों की अलग-अलग चिंताएं सामने आई हैं। विपक्षी दलों ने बिल को वापस लेने की मांग की है और कुछ प्रावधानों को लेकर आपत्ति जताई है। सरकार ने इन आरोपों को खारिज करते हुए बिल के उद्देश्यों को नियमन और पारदर्शिता से जोड़ा है।

अब JPC इन प्रावधानों पर विस्तार से विचार करेगी और अपनी रिपोर्ट लोकसभा में पेश करेगी। समिति को रिपोर्ट शीतकालीन सत्र के पहले सप्ताह के अंतिम दिन तक सौंपने का दायित्व दिया गया है।

FCRA Amendment Bill पर आगे क्या होगा?

JPC की पहली बैठक 18 सितंबर को होगी। उपलब्ध संसदीय कार्यक्रम के अनुसार, बैठक में गृह मंत्रालय के प्रतिनिधि समिति को FCRA Amendment Bill के बारे में जानकारी देंगे। इसके बाद समिति बिल के अलग-अलग प्रावधानों, उनके प्रभाव और संबंधित पक्षों की बातों पर विचार कर सकती है।

समिति की जांच पूरी होने के बाद उसकी रिपोर्ट लोकसभा के समक्ष रखी जाएगी। इसके बाद विधेयक पर संसदीय प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। फिलहाल बिल की अंतिम स्थिति समिति की जांच और संसद में आगे की कार्यवाही पर निर्भर करेगी।

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FCRA Amendment Bill को लेकर JPC में दो राज्यसभा सांसदों को विशेष आमंत्रित के रूप में शामिल किया जाना 17 सितंबर 2026 का महत्वपूर्ण संसदीय प्रक्रियात्मक घटनाक्रम है। जावेद अली खान और जेम्स पांगसांग कोंगकाल संगमा समिति की बैठकों में विशेष आमंत्रित के तौर पर भाग लेंगे, जबकि अंतिम रिपोर्ट नियमित JPC प्रक्रिया के तहत तैयार की जाएगी।

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