Kanker Dalit Family Case उत्तर बस्तर के कांकेर जिले से सामने आया एक गंभीर मामला है। यहां एक दलित परिवार ने आरोप लगाया है कि गांव के कुछ लोगों ने उनके पिता के अंतिम संस्कार का विरोध किया, उन्हें अपनी जमीन पर दाह संस्कार नहीं करने दिया और जान से मारने की धमकी दी। पीड़ित परिवार का यह भी आरोप है कि शिकायत के बावजूद प्रशासन ने प्रभावी कार्रवाई नहीं की। मामले को लेकर परिवार ने राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) सहित स्थानीय प्रशासन के समक्ष न्याय की मांग की है। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और संबंधित अधिकारियों की ओर से इस संबंध में विस्तृत सार्वजनिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
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Kanker Dalit Family Case में क्या है पूरा मामला?
पीड़ित उत्तम कुमार साहू ने बताया कि वे कांकेर जिले के ग्राम उड़कुड़ा, थाना चारामा के निवासी हैं। उनके अनुसार, 3 सितंबर 2024 को उनके पिता महराजी साहू के निधन के बाद गांव के कुछ प्रभावशाली लोगों ने गांव और उनकी निजी भूमि पर अंतिम संस्कार करने से रोक दिया।
परिवार का आरोप है कि विरोध के दौरान शव को हटाने और जमीन से बेदखल करने की धमकी भी दी गई। शिकायत में गांव के कुछ लोगों के नाम भी शामिल किए गए हैं। हालांकि इन आरोपों की जांच और सत्यता का अंतिम निर्णय संबंधित जांच एजेंसियों द्वारा किया जाना बाकी है।
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Kanker Dalit Family Case में प्रशासन को दी गई शिकायत
उत्तम कुमार साहू के अनुसार, उन्होंने उसी दिन थाना चारामा में शिकायत दर्ज कराई। इसके बाद अनुविभागीय अधिकारी (एसडीएम) और तहसीलदार को भी अंतिम संस्कार की अनुमति और सुरक्षा के लिए आवेदन दिया गया।
परिवार का दावा है कि अधिकारियों ने कार्रवाई का आश्वासन दिया और गांव में समझाइश भी दी, लेकिन समस्या का समाधान नहीं हो सका।
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जान से मारने की कोशिश का भी आरोप
परिवार का आरोप है कि उसी रात शव की सुरक्षा के लिए जा रहे दो लोगों के साथ रास्ते में मारपीट और जान से मारने की कोशिश की गई। इसके बाद उन्होंने थाना चारामा पहुंचकर लिखित शिकायत देकर सुरक्षा की मांग की।
अगले दिन गांव में आयोजित बैठक के दौरान भी गाली-गलौज, धमकी और सामाजिक दबाव बनाने के आरोप लगाए गए हैं। परिवार का कहना है कि इन परिस्थितियों के कारण उन्हें लगभग 25 से 30 किलोमीटर दूर नगर पंचायत चारामा में अंतिम संस्कार करना पड़ा।
Kanker Dalit Family Case में सामाजिक बहिष्कार का आरोप
पीड़ित परिवार का आरोप है कि घटना के बाद उन्हें गांव में सामाजिक रूप से अलग-थलग कर दिया गया। उनके अनुसार—
- राशन-पानी बंद कर दिया गया।
- सरकारी योजनाओं के लाभ से वंचित किया जा रहा है।
- धार्मिक कार्यक्रमों में भाग लेने से रोका जा रहा है।
- जान से मारने की धमकी दी जा रही है।
इन सभी आरोपों की आधिकारिक पुष्टि फिलहाल नहीं हुई है।
राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग तक क्यों पहुंचा मामला?
परिवार ने अपनी शिकायत राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) को भेजी है। इसके अलावा तहसीलदार, एसडीएम, थाना चारामा और कलेक्टर कार्यालय में भी आवेदन देने की बात कही गई है।
यदि आयोग इस मामले को संज्ञान में लेता है, तो संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों से रिपोर्ट मांगी जा सकती है और तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जा सकती है।
संविधान क्या कहता है?
भारतीय संविधान प्रत्येक नागरिक को समानता और गरिमा के साथ जीवन जीने का अधिकार देता है।
- अनुच्छेद 14 – कानून के समक्ष समानता।
- अनुच्छेद 15 – धर्म, जाति, लिंग आदि के आधार पर भेदभाव का निषेध।
- अनुच्छेद 17 – अस्पृश्यता का उन्मूलन।
- अनुच्छेद 25 से 28 – धर्म की स्वतंत्रता का अधिकार।
यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं, तो संबंधित कानूनों के तहत कार्रवाई की जा सकती है।
Kanker Dalit Family Case ने ग्रामीण क्षेत्रों में सामाजिक न्याय, प्रशासनिक संवेदनशीलता और संवैधानिक अधिकारों को लेकर कई गंभीर सवाल खड़े किए हैं। फिलहाल यह मामला शिकायत और आरोपों के स्तर पर है तथा परिवार ने राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग सहित संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों से न्याय की मांग की है। मामले की वास्तविक स्थिति जांच और आधिकारिक रिपोर्ट के बाद ही स्पष्ट होगी। Kanker Dalit Family Case पर अब सभी की नजर प्रशासन और जांच एजेंसियों की अगली कार्रवाई पर है।
