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Brijmohan Agarwal Notice: IAS अमित कटारिया के खिलाफ लोकसभा अध्यक्ष को विशेषाधिकार हनन का नोटिस

Brijmohan Agarwal Notice छत्तीसगढ़ की राजनीति और प्रशासन में चर्चा का बड़ा विषय बन गया है। रायपुर लोकसभा सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने राज्य के स्वास्थ्य सचिव एवं 2004 बैच के IAS अधिकारी अमित कटारिया के खिलाफ लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को विशेषाधिकार हनन (Breach of Privilege) का औपचारिक नोटिस भेजा है। सांसद का आरोप है कि अधिकारी ने कई महीनों तक उनके आधिकारिक पत्रों का जवाब नहीं दिया और फोन पर भी कथित रूप से असम्मानजनक व्यवहार किया।

इस घटनाक्रम के बाद प्रदेश में जनप्रतिनिधियों और नौकरशाही के बीच संबंधों को लेकर नई बहस शुरू हो गई है।

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Brijmohan Agarwal Notice: सांसद ने IAS अमित कटारिया पर क्या आरोप लगाए?

शिकायत के अनुसार, सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने अपने लोकसभा क्षेत्र से जुड़े कई जनहित मामलों पर स्वास्थ्य विभाग को लगातार पत्र और अनुस्मारक (रिमाइंडर) भेजे थे। उनका आरोप है कि स्वास्थ्य सचिव अमित कटारिया ने इन पत्रों का लंबे समय तक कोई जवाब नहीं दिया।

सांसद के अनुसार, 20 मई को उन्होंने मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव सुबोध कुमार सिंह से इस विषय पर शिकायत की। इसके बाद मुख्यमंत्री कार्यालय के निर्देश पर अमित कटारिया ने उन्हें फोन किया।

बृजमोहन अग्रवाल का आरोप है कि बातचीत के दौरान अधिकारी का व्यवहार रूखा, अहंकारी और असम्मानजनक था। शिकायत में दावा किया गया है कि बातचीत के अंत में अधिकारी ने कथित तौर पर कहा, “जो करना है कर लीजिए।”


Brijmohan Agarwal Notice में लोकसभा अध्यक्ष से क्या मांग की गई?

सांसद ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को भेजे अपने नोटिस में कहा है कि यदि एक निर्वाचित सांसद के साथ ऐसा व्यवहार किया जा सकता है तो आम नागरिकों के साथ अधिकारी का रवैया कैसा होगा, इसका सहज अनुमान लगाया जा सकता है।

उन्होंने आरोप लगाया कि यह व्यवहार एक वरिष्ठ IAS अधिकारी की गरिमा, संवैधानिक मूल्यों, संसदीय परंपराओं और प्रशासनिक आचरण के मानकों के विपरीत है।

शिकायत में यह भी कहा गया है कि अधिकारी द्वारा लगातार आधिकारिक पत्रों की अनदेखी करना भारतीय संविधान के अनुच्छेद 105 के तहत सांसदों को प्राप्त विशेषाधिकारों और सांसदों के लिए निर्धारित केंद्रीय प्रोटोकॉल दिशानिर्देशों का उल्लंघन है।

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Rule 227 के तहत कार्रवाई की मांग

Brijmohan Agarwal Notice में सांसद ने लोकसभा अध्यक्ष से अनुरोध किया है कि मामले को लोकसभा नियम 227 के तहत विशेषाधिकार समिति (Committee of Privileges) को भेजा जाए।

इसके साथ ही उन्होंने अधिकारी के खिलाफ उचित विभागीय अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू करने की भी मांग की है।

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लोकसभा सचिवालय ने क्या कदम उठाया?

मामले पर प्रारंभिक कार्रवाई करते हुए लोकसभा सचिवालय ने कार्मिक, लोक शिकायत एवं पेंशन मंत्रालय (Ministry of Personnel, Public Grievances and Pensions) को पत्र भेजकर पूरे मामले पर तत्काल तथ्यात्मक रिपोर्ट (Factual Note) उपलब्ध कराने को कहा है।

फिलहाल इस शिकायत पर अंतिम निर्णय नहीं हुआ है और मामले की प्रक्रिया जारी है।

वहीं, समाचार लिखे जाने तक स्वास्थ्य सचिव अमित कटारिया की ओर से सार्वजनिक रूप से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई थी।


क्या है विशेषाधिकार हनन (Breach of Privilege)?

विशेषाधिकार हनन वह स्थिति होती है जब किसी सांसद या संसद के विशेषाधिकारों में बाधा पहुंचाने या उनकी गरिमा को प्रभावित करने का आरोप लगाया जाता है।

यदि लोकसभा अध्यक्ष प्रथम दृष्टया शिकायत को उचित मानते हैं, तो मामला विशेषाधिकार समिति को भेजा जा सकता है। समिति जांच के बाद अपनी रिपोर्ट और सिफारिशें लोकसभा के समक्ष प्रस्तुत करती है।


मामले का राजनीतिक और प्रशासनिक महत्व

यह विवाद ऐसे समय सामने आया है जब छत्तीसगढ़ में जनप्रतिनिधियों और प्रशासनिक अधिकारियों के बीच समन्वय को लेकर समय-समय पर सवाल उठते रहे हैं।

यदि यह मामला विशेषाधिकार समिति तक पहुंचता है, तो यह न केवल प्रशासनिक जवाबदेही बल्कि सांसदों और नौकरशाही के बीच अधिकारों एवं जिम्मेदारियों को लेकर भी महत्वपूर्ण मिसाल बन सकता है।


Brijmohan Agarwal Notice ने छत्तीसगढ़ की राजनीति और प्रशासन में नई बहस छेड़ दी है। सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने IAS अधिकारी अमित कटारिया पर आधिकारिक पत्रों की अनदेखी और कथित असम्मानजनक व्यवहार का गंभीर आरोप लगाते हुए लोकसभा अध्यक्ष से विशेषाधिकार हनन की कार्रवाई की मांग की है। अब सभी की नजर लोकसभा सचिवालय, विशेषाधिकार समिति और केंद्र सरकार की आगामी कार्रवाई पर टिकी है। मामले में अंतिम निष्कर्ष जांच और संबंधित पक्षों के जवाब के बाद ही स्पष्ट होगा।

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