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दुर्ग शहर के प्राचीन चंडी मंदिर का कार्यालय व दान पेटी हुई सील, प्रबंधक को चार्ज देने 19 तक मोहलत

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दुर्ग (छत्तीसगढ़)। जिला प्रशासन ने न्यायालय के आदेश के बाद शहर के प्रसिद्ध व प्राचीन चंडी मंदिर पर प्रशासक नियुक्त कर दिया है। निर्देश के तहत दुर्ग तहसीलदार पार्वती ने अपने अधिनिस्थ कर्मचारियों के साथ मौके पर पहुंच कर पदाधिकारियों से चार्ज लिया। इस दौरान निवृतमान प्रबंधक की गैरमौजूदगी और अब तक का लेखा प्रस्तुत नहीं किए जाने पर तहसीलदार ने मंदिर के तीन दानपेटी और कार्यालय को सील कर दिया।
नोटिस के बाद चार्ज देने के लिए मंदिर कार्यालय में पूर्व अध्यक्ष कमल रुंगटा,  और कोषाध्यक्ष कोषाध्यक्ष-महेन्द्र सेक्सरिया, उपाध्यक्ष- बृजराज यादव, सदस्य- विमल सेक्सरिया, तोरण लाल जगबेड़ा, गिरधर शर्मा व कोमल सिंह ठाकुर उपस्थित हुए थे। पूर्व पदाधिकारियों का कहना है कि मंदिर में आय व्यय का लेखा जोखा प्रबंधक- जय शर्मा के पास है। उनके घर में शोक की वजह से वे उपस्थित नहीं हुए। इसके बाद तहसीलदार ने जय शर्मा की उपस्थिति के लिए 19 जून की तिथि निर्धारित की है।
पंजीयक लोक न्यास व दुर्ग एसडीएम खेमलाल वर्मा ने न्यायालय के फैसले को आधार बनाते हुए चंडी मंदिर के प्रशासक पद पर दुर्ग तहसीलदार को पदस्थ किए जाने का आदेश दिया था। इस आदेश के बाद मंदिर समिति के  प्रशासक के रुम में तहसीलदार मंदिर पहुंची और पूर्व पदाधिकारियों से चार्ज लिया।
आपको बता दें कि जिला न्यायालय के न्यायाधीश डी के गिलहरे ने वाद पर निर्णय  देते हुए पंजीयक लोक न्यास दुर्ग का आपेक्षित आदेश दिनांक 30 सितंबर 2010 पक्षपात पूर्ण निरुपित किया था। साथ ही इसे विधि विरुद्ध तरीके से पारित किया जाना बताते हुए न्यायालय इसे शून्य घोषित कर दिया।
पंजीयक लोक न्यायास ने आदेश दिया है कि 2010 के पूर्व सदस्य के सहयोग से एक तदर्थ समिति बनाया जाए। जिससे मंदिर का संचालन हो सके। अब मंदिर के आय व्यय और संपत्ती पर प्रशासन की नजर होगी। हर साल विधिवत आय व्यय का ऑडिट होगा। विकास और निर्माण के लिए प्रशासक की अनुमति आवश्यक होगी।