Skip to main content

4thnation

Snakebite Compensation Scam: बिलासपुर में 17.24 करोड़ के कथित मुआवजा घोटाले का खुलासा, डॉक्टर समेत 17 गिरफ्तार

Snakebite Compensation Scam को लेकर छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले में बड़ा खुलासा हुआ है। पुलिस ने पिछले एक महीने में कार्रवाई करते हुए पूर्व महिला डॉक्टर, राजस्व विभाग के कर्मचारियों, वकीलों, बैंक कर्मचारी और अन्य आरोपियों सहित कुल 17 लोगों को गिरफ्तार किया है। आरोप है कि सरकारी मुआवजा हासिल करने के लिए फर्जी पोस्टमार्टम रिपोर्ट, राजस्व अभिलेख और अन्य सरकारी दस्तावेज तैयार किए गए। इस कथित घोटाले की अनुमानित राशि 17.24 करोड़ रुपये बताई जा रही है।

👉 4thNation WhatsApp चैनल से जुड़ें: https://whatsapp.com/channel/0029VaOjosfFHWq7ssCngl1j


Snakebite Compensation Scam का खुलासा कैसे हुआ?

इस मामले ने तब तूल पकड़ा जब बेलतरा विधायक सुशांत शुक्ला ने विधानसभा के पिछले सत्र में कथित अनियमितताओं का मुद्दा उठाया।

प्रस्तुत आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, बिलासपुर जिले में तीन वर्षों के दौरान 431 सर्पदंश से मौत के मामले दर्ज किए गए, जिनके आधार पर 17.24 करोड़ रुपये का मुआवजा स्वीकृत किया गया।

इसके बाद पुलिस ने जांच शुरू की और कई मामलों में रिकॉर्ड, पोस्टमार्टम रिपोर्ट और राजस्व दस्तावेजों में गंभीर गड़बड़ियां मिलने का दावा किया।

यह भी पढ़ें: Ken-Betwa Link Project Protest: मध्य प्रदेश में ‘चिता आंदोलन’ तेज, पुलिस ने धरना हटाया, विस्थापन को लेकर बढ़ा विवाद


Snakebite Compensation Scam में सामने आए चौंकाने वाले मामले

पुलिस जांच में ऐसे कई मामले सामने आए, जिनमें मौत का वास्तविक कारण बदलकर सर्पदंश (Snakebite) दर्शाया गया।

आत्महत्या को बताया गया सर्पदंश

सरकंडा थाना क्षेत्र के एक मामले में एक व्यक्ति की मौत आत्महत्या (फांसी) से हुई थी।

पुलिस के अनुसार, बाद में उसी पंचनामा (Inquest) नंबर का दोबारा उपयोग कर कथित तौर पर फर्जी पोस्टमार्टम रिपोर्ट तैयार की गई, जिसमें मौत का कारण सर्पदंश बताया गया। जांच में कथित लाभार्थी की पहचान भी संदिग्ध पाई गई।


हार्ट अटैक और जहर से मौत को भी बनाया सर्पदंश

जांच में ऐसे मामले भी सामने आए, जिनमें हार्ट अटैक और जहर सेवन से हुई मौतों को कथित रूप से सर्पदंश बताकर मुआवजा लेने का प्रयास किया गया।

पुलिस का आरोप है कि फर्जी मेडिकल दस्तावेज तैयार कर सरकारी सहायता राशि जारी कराई गई।


Snakebite Compensation Scam में किन-किन की गिरफ्तारी हुई?

बिलासपुर पुलिस के अनुसार अब तक 17 लोगों को गिरफ्तार किया गया है।

इनमें शामिल हैं—

  • पूर्व CIMS महिला डॉक्टर
  • राजस्व विभाग के तीन कर्मचारी
  • वकील
  • बैंक कर्मचारी
  • अन्य कथित सहयोगी

बिलासपुर एसपी रजनेश सिंह के अनुसार, विभिन्न थानों में 16 एफआईआर दर्ज की गई हैं और एक डॉक्टर अभी भी फरार है।


पुलिस जांच में क्या सामने आया?

पुलिस का दावा है कि यह कथित नेटवर्क वर्ष 2018 से सक्रिय था और अधिकांश संदिग्ध मामले 2018 से 2024 के बीच के हैं।

जांच एजेंसियों के अनुसार यह एक संगठित गिरोह हो सकता है, जिसमें—

  • डॉक्टर
  • राजस्व कर्मचारी
  • वकील
  • बैंक कर्मचारी
  • बिचौलिए

मिलकर कथित तौर पर फर्जी दस्तावेज तैयार करते थे।

पुलिस यह भी जांच कर रही है कि क्या सरकारी लॉगिन आईडी का दुरुपयोग कर ऑनलाइन रिकॉर्ड तैयार किए गए और मुआवजा राशि लाभार्थियों के खातों में भेजने के बाद उसे अन्य लोगों तक पहुंचाया गया।


मुआवजा योजना का कैसे हुआ कथित दुरुपयोग?

राज्य सरकार के नियमों के अनुसार, सर्पदंश से मृत्यु होने पर मृतक के परिजनों को 4 लाख रुपये की आर्थिक सहायता दी जाती है।

पुलिस का आरोप है कि इसी योजना का दुरुपयोग करते हुए कथित रूप से मौत का कारण बदलकर फर्जी दावे तैयार किए गए और सरकारी राशि प्राप्त की गई।

हालांकि, जांच अभी जारी है और आरोपों की न्यायिक प्रक्रिया में पुष्टि होना बाकी है।


जांच अभी जारी, और गिरफ्तारियां संभव

पुलिस फिलहाल लगभग 15 संदिग्ध मामलों की विस्तृत जांच कर रही है।

इसके अलावा कई अन्य डॉक्टरों द्वारा जारी पोस्टमार्टम रिपोर्टों की भी जांच की जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि जांच के आधार पर आगे और गिरफ्तारियां हो सकती हैं।


Snakebite Compensation Scam ने सरकारी मुआवजा योजनाओं के क्रियान्वयन और निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। पुलिस का दावा है कि फर्जी पोस्टमार्टम रिपोर्ट और सरकारी रिकॉर्ड के जरिए करोड़ों रुपये का कथित फर्जीवाड़ा किया गया। फिलहाल जांच जारी है और अंतिम सच्चाई न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगी। यदि आरोप सिद्ध होते हैं, तो यह छत्तीसगढ़ के सबसे बड़े कथित मुआवजा घोटालों में से एक माना जाएगा।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *