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Aadhaar Card Age Proof: मोटर दुर्घटना मुआवजा मामलों में हाईकोर्ट का महत्वपूर्ण फैसला

Aadhaar Card Age Proof को लेकर छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि मोटर दुर्घटना मुआवजा (Motor Accident Claim) मामलों में केवल आधार कार्ड में दर्ज आयु को अंतिम और निर्णायक प्रमाण नहीं माना जा सकता। न्यायाधिकरण (MACT) को दावेदार की उम्र तय करते समय उपलब्ध सभी दस्तावेजी साक्ष्यों का समग्र मूल्यांकन करना होगा।

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Aadhaar Card Age Proof पर हाईकोर्ट ने क्या कहा?

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति सचिन सिंह राजपूत ने तीन आपस में जुड़े मोटर दुर्घटना मुआवजा अपील मामलों की सुनवाई करते हुए यह फैसला दिया।

अदालत ने कहा कि मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण (MACT) ने घायल दावेदार की आयु केवल आधार कार्ड के आधार पर 68 वर्ष मान ली थी, जबकि रिकॉर्ड में मौजूद अन्य साक्ष्य इससे अलग तस्वीर पेश कर रहे थे।

हाईकोर्ट ने माना कि केवल आधार कार्ड पर निर्भर रहना कानूनी रूप से उचित नहीं था।


सुप्रीम कोर्ट के फैसले का दिया हवाला

हाईकोर्ट ने अपने फैसले में Saroj and Others vs IFFCO Tokio General Insurance Co. and Others (2024) मामले में सुप्रीम कोर्ट के निर्णय का उल्लेख किया।

अदालत ने कहा कि आधार कार्ड एक महत्वपूर्ण दस्तावेज जरूर है, लेकिन यह उम्र का अंतिम और निर्णायक प्रमाण नहीं माना जा सकता। यदि अन्य विश्वसनीय दस्तावेज उपलब्ध हों तो उनका भी समान रूप से मूल्यांकन किया जाना चाहिए।

इसी आधार पर हाईकोर्ट ने दावेदार की आयु 61 से 65 वर्ष के आयु वर्ग में मानी।

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Aadhaar Card Age Proof मामले में क्या था पूरा विवाद?

यह मामला 19 अप्रैल 2019 को महासमुंद जिले में हुए सड़क हादसे से जुड़ा है। दुर्घटना में दो मोटरसाइकिल सवारों की मौत हो गई थी, जबकि एक व्यक्ति गंभीर रूप से घायल हो गया था।

घायल बढ़ई (कारपेंटर) का एक पैर घुटने के ऊपर से काटना पड़ा। मुआवजा तय करते समय MACT ने उसकी आयु आधार कार्ड के अनुसार 68 वर्ष मान ली थी।

हालांकि घायल ने अपने बयान में स्वयं को लगभग 58 वर्ष बताया था। वहीं दिव्यांगता प्रमाणपत्र और इलाज संबंधी दस्तावेजों में उसकी आयु लगभग 60 वर्ष दर्ज थी।

इन्हीं तथ्यों के आधार पर हाईकोर्ट ने MACT के फैसले में संशोधन किया।


मुआवजा राशि में हुआ बड़ा इजाफा

हाईकोर्ट ने उम्र के साथ-साथ घायल की आय, कार्यात्मक दिव्यांगता और अन्य तथ्यों का भी पुनर्मूल्यांकन किया।

अदालत ने—

  • मासिक आय 3,000 रुपये से बढ़ाकर 6,000 रुपये मानी।
  • कार्यात्मक दिव्यांगता 35% से बढ़ाकर 60% निर्धारित की।
  • कुल मुआवजा 96,400 रुपये से बढ़ाकर 3,90,800 रुपये किया।
  • साथ ही 2,94,400 रुपये अतिरिक्त देने का आदेश दिया।
  • अतिरिक्त राशि पर अपील दायर करने की तिथि से 6% वार्षिक ब्याज भी देने का निर्देश दिया।

Aadhaar Card Age Proof फैसले का कानूनी महत्व

यह निर्णय भविष्य में मोटर दुर्घटना मुआवजा मामलों के लिए महत्वपूर्ण मिसाल माना जा रहा है।

हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि किसी भी दावेदार की उम्र निर्धारित करने के लिए केवल आधार कार्ड पर निर्भर नहीं रहा जा सकता। मेडिकल रिकॉर्ड, दिव्यांगता प्रमाणपत्र, उपचार संबंधी दस्तावेज और अन्य विश्वसनीय साक्ष्यों का भी मूल्यांकन आवश्यक है।

इस फैसले से यह सुनिश्चित होगा कि मुआवजा निर्धारण अधिक न्यायसंगत और तथ्यों पर आधारित हो।


आम लोगों के लिए क्या है संदेश?

यदि किसी कानूनी प्रक्रिया में उम्र विवाद का विषय बनती है, तो केवल आधार कार्ड ही नहीं बल्कि अन्य प्रमाण भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

हालांकि यह फैसला विशेष रूप से मोटर दुर्घटना मुआवजा दावों के संदर्भ में दिया गया है। अन्य प्रकार के मामलों में अलग कानूनी प्रावधान लागू हो सकते हैं।


Aadhaar Card Age Proof को लेकर छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट का यह फैसला मोटर दुर्घटना मुआवजा मामलों में महत्वपूर्ण कानूनी मार्गदर्शन प्रदान करता है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि आधार कार्ड में दर्ज आयु उपयोगी दस्तावेज है, लेकिन उसे अंतिम प्रमाण नहीं माना जा सकता। न्यायाधिकरणों को सभी उपलब्ध साक्ष्यों का समग्र मूल्यांकन कर निष्पक्ष निर्णय देना होगा। यह फैसला भविष्य के मुआवजा मामलों में पारदर्शिता और न्याय सुनिश्चित करने की दिशा में अहम माना जा रहा है।

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