Hemchand Yadav University Audit में दुर्ग स्थित हेमचंद यादव विश्वविद्यालय की करीब 18.87 लाख रुपये की नई कार खरीदी को लेकर गंभीर वित्तीय अनियमितताओं का खुलासा हुआ है। छत्तीसगढ़ राज्य संपरीक्षा (State Audit) की रिपोर्ट के अनुसार वाहन खरीदी प्रक्रिया में वित्तीय नियमों और भंडार क्रय नियमों के उल्लंघन से जुड़ी पांच प्रमुख आपत्तियां दर्ज की गई हैं।
ऑडिट रिपोर्ट में कहा गया है कि वाहन की खरीदी बिना वित्त विभाग की पूर्व अनुमति के की गई। साथ ही निर्धारित वित्तीय सीमा से लगभग तीन गुना अधिक राशि खर्च की गई। रिपोर्ट में संबंधित अधिकारी-कर्मचारियों से अनियमित व्यय की राशि की वसूली की अनुशंसा भी की गई है। हालांकि, अंतिम प्रशासनिक या कानूनी कार्रवाई संबंधित सक्षम प्राधिकारी द्वारा तय की जाएगी।
👉 छत्तीसगढ़ की हर बड़ी खबर सबसे पहले पाने के लिए Join करें 4thNation WhatsApp Channel:
https://whatsapp.com/channel/0029VaOjosfFHWq7ssCngl1j
Hemchand Yadav University Audit में क्या सामने आया?
Hemchand Yadav University Audit रिपोर्ट के अनुसार विश्वविद्यालय ने 18,87,956 रुपये की नई कार खरीदी। राज्य संपरीक्षा ने इस खरीद को वित्तीय संहिता और भंडार क्रय नियमों के अनुरूप नहीं माना।
ऑडिट में कहा गया है कि वाहन खरीदी के दौरान शासन द्वारा निर्धारित कई प्रक्रियाओं का पालन नहीं किया गया। इसी आधार पर रिपोर्ट में पांच प्रमुख अनियमितताओं का उल्लेख किया गया है।
पहली अनियमितता: वित्त विभाग से पूर्व अनुमति नहीं ली गई
ऑडिट रिपोर्ट के अनुसार नए वाहन की खरीदी से पहले छत्तीसगढ़ शासन के वित्त विभाग से अनिवार्य स्वीकृति नहीं ली गई।
राज्य सरकार के वित्तीय निर्देशों के अनुसार किसी भी नए वाहन की खरीदी के लिए पूर्व अनुमति आवश्यक होती है। ऑडिट ने इसे वित्तीय नियमों का उल्लंघन बताया है और जिम्मेदारी तय करने की अनुशंसा की है।
यह भी पढ़ें: Padmanabhpur Murder Case: पुरानी रंजिश में युवक की हत्या, तीन घायल, एक ही परिवार के 6 आरोपी गिरफ्तार
दूसरी अनियमितता: वाहन किसके लिए खरीदा गया, यह स्पष्ट नहीं
Hemchand Yadav University Audit में यह भी उल्लेख किया गया है कि वाहन के उपयोग को लेकर आवश्यक स्वीकृति नहीं ली गई।
रिपोर्ट के अनुसार उच्च शिक्षा संचालनालय को यह नहीं बताया गया कि नई कार किस अधिकारी या किस प्रशासनिक कार्य के लिए खरीदी जा रही है।
ऑडिट का कहना है कि वाहन खरीदी प्रस्ताव के साथ पात्र अधिकारी, उपलब्ध वाहनों की संख्या और उपयोग का उद्देश्य स्पष्ट करना आवश्यक होता है।
तीसरी अनियमितता: निर्धारित सीमा से लगभग तीन गुना अधिक खर्च
ऑडिट की सबसे महत्वपूर्ण आपत्तियों में वाहन की कीमत भी शामिल है।
वित्त विभाग के दिशा-निर्देशों के अनुसार पात्र अधिकारियों के लिए वाहन खरीदी की अधिकतम सीमा 6.50 लाख से 7.50 लाख रुपये निर्धारित थी।
इसके बावजूद विश्वविद्यालय ने करीब 18.87 लाख रुपये की कार खरीदी। ऑडिट ने इसे निर्धारित सीमा से काफी अधिक खर्च बताते हुए वित्तीय अनियमितता माना है।
चौथी अनियमितता: रद्दी बिक्री की राशि से खरीदी गई कार
ऑडिट रिपोर्ट में कहा गया है कि वाहन खरीदी के लिए रद्दी सामग्री की बिक्री से प्राप्त राशि का उपयोग किया गया।
रिपोर्ट के अनुसार ऐसी आय को सामान्य निधि (General Fund) में जमा किया जाना चाहिए था। ऑडिट का मत है कि इस राशि को निर्धारित पूंजीगत व्यय प्रक्रिया का पालन किए बिना वाहन खरीद में खर्च किया गया, जो वित्तीय पारदर्शिता के सिद्धांतों के अनुरूप नहीं है।
पांचवीं अनियमितता: खुली निविदा और क्रय समिति की प्रक्रिया का पालन नहीं
Hemchand Yadav University Audit में वाहन खरीदी प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए गए हैं।
रिपोर्ट के अनुसार वाहन के लिए काइजन टोयोटा ऑटोमोबाइल्स, रिंग रोड सरोना, रायपुर को भाव पत्र भेजा गया, लेकिन भंडार क्रय नियम 2002 के तहत 3 लाख रुपये से अधिक की खरीदी के लिए खुली निविदा (Open Tender) आवश्यक थी।
इसके अलावा 50 हजार रुपये से अधिक की खरीदी में क्रय समिति की अनुशंसा भी जरूरी होती है। ऑडिट के अनुसार इन प्रक्रियाओं का पालन नहीं किया गया।
👉 छत्तीसगढ़ और शिक्षा जगत की हर बड़ी अपडेट के लिए Join करें 4thNation WhatsApp Channel:
https://whatsapp.com/channel/0029VaOjosfFHWq7ssCngl1j
Hemchand Yadav University Audit में ऑडिट की अनुशंसा क्या है?
ऑडिट रिपोर्ट में कहा गया है कि कार्यपरिषद की स्वीकृति के आधार पर वाहन खरीदी को प्रशासनिक स्तर पर आंशिक अनुमोदन माना जा सकता है, लेकिन वित्त विभाग की पूर्व अनुमति नहीं होने के कारण पूरा व्यय नियमों के अनुरूप नहीं माना गया।
इसी आधार पर राज्य संपरीक्षा ने संबंधित अधिकारी-कर्मचारियों से खर्च की गई राशि की वसूली की अनुशंसा की है। साथ ही भविष्य में सभी खरीदी प्रक्रियाओं को वित्तीय और भंडार क्रय नियमों के अनुसार करने की सलाह दी गई है।
ध्यान देने योग्य बात यह है कि ऑडिट की अनुशंसा अंतिम दोष सिद्धि नहीं होती। आगे की कार्रवाई संबंधित सक्षम प्राधिकारी के निर्णय और प्रक्रिया पर निर्भर करेगी।
### विश्वविद्यालय प्रबंधन ने क्या कहा?
रिपोर्ट के अनुसार जब विश्वविद्यालय के जिम्मेदार अधिकारियों से इस मामले में प्रतिक्रिया मांगी गई तो किसी ने भी आधिकारिक टिप्पणी नहीं की।
विश्वविद्यालय प्रबंधन का कहना है कि यह वाहन खरीदी पूर्व कुलपति के कार्यकाल में हुई थी। वर्तमान में विश्वविद्यालय में नए कुलपति पदभार संभाल चुके हैं।
प्रबंधन ने यह स्वीकार किया कि उन्हें ऑडिट रिपोर्ट की जानकारी है, लेकिन फिलहाल इस संबंध में कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है।
वित्तीय पारदर्शिता क्यों है महत्वपूर्ण?
सरकारी विश्वविद्यालयों और सार्वजनिक संस्थानों में होने वाली सभी खरीद प्रक्रियाओं के लिए निर्धारित वित्तीय नियमों का पालन आवश्यक माना जाता है।
खुली निविदा, सक्षम स्वीकृति, क्रय समिति की अनुशंसा और पारदर्शी प्रक्रिया का उद्देश्य सार्वजनिक धन के उचित उपयोग और प्रतिस्पर्धी खरीद प्रणाली को सुनिश्चित करना होता है।
इसी कारण ऐसी ऑडिट रिपोर्टों को प्रशासनिक जवाबदेही के दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण माना जाता है।
Hemchand Yadav University Audit ने 18.87 लाख रुपये की कार खरीदी से जुड़ी पांच गंभीर प्रक्रियागत और वित्तीय आपत्तियों को उजागर किया है। रिपोर्ट में बिना पूर्व अनुमति वाहन खरीद, निर्धारित सीमा से अधिक खर्च, खुली निविदा प्रक्रिया का पालन न करने और अन्य नियमों के उल्लंघन का उल्लेख किया गया है। हालांकि, ऑडिट रिपोर्ट में दर्ज टिप्पणियां और अनुशंसाएं जांच प्रक्रिया का हिस्सा हैं। मामले में अंतिम प्रशासनिक निर्णय और संभावित कार्रवाई संबंधित सक्षम प्राधिकारी द्वारा नियमों के अनुसार की जाएगी।
