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Vishnubhog Rice: आधे घंटे में 45 हजार रुपये की रिकॉर्ड बिक्री, महिलाओं की मेहनत बनी सफलता की मिसाल

Vishnubhog Rice ने छत्तीसगढ़ के गौरेला-पेंड्रा-मरवाही (जीपीएम) जिले में महिला सशक्तिकरण की एक नई कहानी लिख दी है। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (बिहान) से जुड़ी महिला स्व-सहायता समूहों द्वारा तैयार किए गए इस जैविक चावल ने महज 30 मिनट में 45 हजार रुपये से अधिक की रिकॉर्ड बिक्री दर्ज कर नई उपलब्धि हासिल की है। यह सफलता महिलाओं की मेहनत, जैविक खेती और प्रभावी विपणन का परिणाम मानी जा रही है।

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Vishnubhog Rice ने बनाया रिकॉर्ड

पेंड्रा स्थित असेंबली हॉल में आयोजित स्थानीय जनसंवाद कार्यक्रम के दौरान Vishnubhog Rice की जबरदस्त मांग देखने को मिली। कार्यक्रम में मौजूद जनप्रतिनिधियों और नागरिकों ने महिला स्व-सहायता समूहों से सीधे चावल खरीदकर स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा दिया।

केवल 30 मिनट के भीतर 45 हजार रुपये से अधिक मूल्य का Vishnubhog Rice बिक गया। यह जिले के लिए एक बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है।


Vishnubhog Rice से महिलाओं को मिली आर्थिक मजबूती

राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (बिहान) के तहत गठित महिला स्व-सहायता समूह जैविक खेती, प्रसंस्करण, पैकेजिंग और विपणन का कार्य कर रहे हैं।

Vishnubhog Rice की बढ़ती मांग से समूहों की महिलाओं की आय में लगातार वृद्धि हो रही है। इससे महिलाओं का आत्मविश्वास बढ़ा है और वे आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रही हैं।

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जनप्रतिनिधियों ने खरीदा Vishnubhog Rice

कार्यक्रम में कौशल विकास, तकनीकी शिक्षा एवं रोजगार मंत्री गुरु खुशवंत साहेब, मरवाही विधायक प्रणव कुमार मरपची और कोटा विधायक अटल श्रीवास्तव ने स्वयं Vishnubhog Rice खरीदकर महिला समूहों का उत्साह बढ़ाया।

वहीं स्थानीय नागरिक पंकज तिवारी ने एक साथ 200 किलोग्राम Vishnubhog Rice खरीदकर अब तक के सबसे बड़े खरीदार बनने का गौरव हासिल किया। उनके इस कदम से अन्य लोगों को भी स्थानीय उत्पाद खरीदने की प्रेरणा मिली।


जैविक खेती और आधुनिक ब्रांडिंग से बढ़ी पहचान

महिला फार्मर प्रोड्यूसर कंपनी (एफपीओ) द्वारा Vishnubhog Rice का वैज्ञानिक तरीके से प्रसंस्करण किया जा रहा है। आकर्षक पैकेजिंग, गुणवत्तापूर्ण ब्रांडिंग और आधुनिक विपणन रणनीति के कारण इस उत्पाद की बाजार में अलग पहचान बन रही है।

इस पहल से किसानों और महिला उत्पादकों को उनकी उपज का बेहतर मूल्य मिल रहा है। साथ ही जैविक खेती को भी बढ़ावा मिल रहा है।


राष्ट्रीय बाजार की ओर बढ़ रहा Vishnubhog Rice

जिला प्रशासन के अनुसार इस पहल को आगे बढ़ाने में कलेक्टर डॉ. संतोष कुमार देवांगन और जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी मुकेश रावटे की महत्वपूर्ण भूमिका रही है।

राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के जिला प्रबंधक दुर्गाशंकर सोनी ने बताया कि जिले में 179 सीएमएसए (Community Managed Sustainable Agriculture) गांवों का चयन किया गया है। इस वर्ष 250 एकड़ से अधिक क्षेत्र में Vishnubhog Rice उत्पादन का लक्ष्य रखा गया है।

इससे अधिक महिलाओं को लखपति दीदी अभियान से जोड़ने और जैविक खेती को नई दिशा देने की योजना है।


महिला सशक्तिकरण का मजबूत मॉडल

Vishnubhog Rice अब केवल एक कृषि उत्पाद नहीं रहा, बल्कि यह छत्तीसगढ़ की महिला उद्यमिता और ग्रामीण अर्थव्यवस्था का मजबूत प्रतीक बन चुका है।

महिला स्व-सहायता समूहों की मेहनत, सरकारी सहयोग और उपभोक्ताओं के बढ़ते विश्वास ने इस उत्पाद को स्थानीय बाजार से राष्ट्रीय पहचान की ओर बढ़ा दिया है।


Vishnubhog Rice की रिकॉर्ड बिक्री यह साबित करती है कि यदि महिलाओं को प्रशिक्षण, वित्तीय सहायता और बेहतर बाजार उपलब्ध कराया जाए तो वे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई ऊंचाइयों तक पहुंचा सकती हैं। बिहान मिशन के माध्यम से जीपीएम जिले की महिलाओं ने आत्मनिर्भरता की प्रेरणादायक मिसाल पेश की है। आने वाले समय में Vishnubhog Rice छत्तीसगढ़ की जैविक कृषि और महिला सशक्तिकरण का राष्ट्रीय ब्रांड बन सकता है।

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