Skip to main content

4thnation

Gujarat Farmers Protest: बिजली के पोल और हाई-टेंशन लाइन के खिलाफ किसानों का आंदोलन तेज, नई मुआवजा नीति की मांग

Gujarat Farmers Protest इन दिनों राज्य में प्रमुख राजनीतिक और कृषि मुद्दा बन गया है। गुजरात के कई जिलों में किसान अपनी कृषि भूमि पर लगाए जा रहे बिजली के पोल और हाई-टेंशन ट्रांसमिशन लाइनों का विरोध कर रहे हैं। किसानों का कहना है कि उनकी जमीन का स्थायी नुकसान हो रहा है, जबकि उन्हें मिलने वाला एकमुश्त मुआवजा पर्याप्त नहीं है। इस बीच राज्य सरकार भी किसानों की मांगों को लेकर नई मुआवजा नीति पर विचार कर रही है।

👉 Join 4thNation WhatsApp Channel: https://whatsapp.com/channel/0029VaOjosfFHWq7ssCngl1j


Gujarat Farmers Protest की शुरुआत कैसे हुई?

राज्य में सौर और पवन ऊर्जा परियोजनाओं से उत्पादित बिजली के प्रसारण के लिए कई जिलों में हाई-टेंशन ट्रांसमिशन कॉरिडोर बनाए जा रहे हैं।

इन परियोजनाओं के तहत किसानों की कृषि भूमि पर बिजली के पोल और ओवरहेड ट्रांसमिशन लाइनें स्थापित की जा रही हैं। किसानों का कहना है कि एक बार पोल लगने के बाद उस हिस्से में खेती करना कठिन हो जाता है और भूमि का बाजार मूल्य भी प्रभावित होता है।


Gujarat Farmers Protest में किसानों की मुख्य शिकायतें

किसानों का आरोप है कि बिजली कंपनियां उनकी जमीन का वर्षों तक उपयोग करती हैं, लेकिन बदले में केवल एक बार सीमित मुआवजा दिया जाता है।

उनका कहना है कि ट्रैक्टर, हार्वेस्टर और अन्य कृषि मशीनों के संचालन में भी ट्रांसमिशन लाइनें बाधा बनती हैं। इससे उत्पादन क्षमता और आय दोनों प्रभावित होती हैं।

यह भी पढ़ें: Siya Goyal Case: क्या राजा रघुवंशी केस से मिली थी कथित प्रेरणा? पुलिस जांच में सामने आए नए दावे


कई जिलों में फैल चुका है Gujarat Farmers Protest

किसानों का यह आंदोलन अब केवल एक जिले तक सीमित नहीं है।

रिपोर्टों के अनुसार, गुजरात में लगभग 100 हाई-वोल्टेज ट्रांसमिशन कॉरिडोर विकसित किए जा रहे हैं, जिनकी कुल लंबाई लगभग 500 किलोमीटर होगी। इन परियोजनाओं का उद्देश्य लगभग 135 गीगावाट बिजली के प्रसारण की क्षमता विकसित करना है।

किसान संगठनों का दावा है कि इससे करीब 5.5 लाख किसान परिवार और लगभग 3,800 हेक्टेयर कृषि भूमि प्रभावित हो सकती है। इन आंकड़ों की स्वतंत्र पुष्टि संबंधित सरकारी एजेंसियों द्वारा नहीं की गई है।


किसानों की क्या हैं प्रमुख मांगें?

मुआवजा नीति में बदलाव की मांग

किसान संगठनों ने सरकार से मुआवजा नीति में व्यापक बदलाव की मांग की है।

उनकी प्रमुख मांगों में शामिल हैं:

  • भूमि अधिग्रहण कानून, 2013 के अनुसार बाजार मूल्य का चार गुना मुआवजा।
  • प्रत्येक बिजली पोल के लिए प्रति माह 50,000 रुपये किराया।
  • प्रत्येक पोल पर 2 करोड़ रुपये का एकमुश्त भुगतान।

ये मांगें किसान संगठनों द्वारा उठाई गई हैं। सरकार ने इन्हें अभी स्वीकार नहीं किया है।


राज्य सरकार और कैबिनेट क्या कर रही है?

मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल की अध्यक्षता में हुई गुजरात कैबिनेट की बैठक में इस मुद्दे पर चर्चा की गई।

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, सरकार किसानों के प्रतिनिधियों और किसान संगठनों से बातचीत के बाद नई मुआवजा नीति तैयार करने पर विचार कर रही है। फिलहाल किसी अंतिम मुआवजा राशि या नीति की आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है।

उल्लेखनीय है कि वर्ष 2022 में गुजरात सरकार ने ट्रांसमिशन कॉरिडोर के लिए मुआवजे की दर 7.5 प्रतिशत से बढ़ाकर 15 प्रतिशत की थी। हालांकि किसान इसे अभी भी अपर्याप्त बता रहे हैं।


प्रधानमंत्री को भेजा गया ज्ञापन

आंदोलन के बीच किसान नेताओं ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भी ज्ञापन भेजा है।

ज्ञापन में मांग की गई है कि ट्रांसमिशन लाइन से संबंधित सरकारी नोटिसों में प्रभावित किसानों के नाम और संबंधित भूमि के सर्वे नंबर स्पष्ट रूप से दर्ज किए जाएं। किसान नेताओं का कहना है कि इससे पारदर्शिता बढ़ेगी और प्रभावित किसानों की सहमति सुनिश्चित होगी।


आगे क्या हो सकता है?

यदि सरकार और किसान संगठनों के बीच सहमति बनती है, तो राज्य में ट्रांसमिशन कॉरिडोर से संबंधित नई मुआवजा नीति लागू की जा सकती है।

हालांकि अंतिम निर्णय सरकार की आधिकारिक घोषणा और कानूनी प्रक्रिया के बाद ही स्पष्ट होगा।


Gujarat Farmers Protest अब केवल बिजली के पोल और ट्रांसमिशन लाइनों का मुद्दा नहीं रह गया है, बल्कि यह किसानों के मुआवजे, भूमि अधिकार और नीति सुधार से जुड़ा बड़ा विषय बन चुका है। किसान बेहतर मुआवजा और पारदर्शी प्रक्रिया की मांग कर रहे हैं, जबकि राज्य सरकार नई नीति पर विचार कर रही है। आने वाले दिनों में सरकार और किसान संगठनों के बीच होने वाली बातचीत इस आंदोलन की दिशा तय करेगी। Gujarat Farmers Protest पर देशभर की नजर बनी हुई है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *