Khairagarh Dead Body Transport: शव वाहन नहीं मिलने पर पिकअप में ले जाना पड़ा शव

Khairagarh Dead Body Transport का एक मामला छत्तीसगढ़ के खैरागढ़ जिले से सामने आया है, जिसने स्वास्थ्य व्यवस्था और अंतिम संस्कार से जुड़ी सरकारी सुविधाओं पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जिले के भुरसूली गांव निवासी जेलेब गोड (50) की छत से गिरने के कारण मौत हो गई। पोस्टमॉर्टम के बाद परिजनों को शव घर ले जाने के लिए शव वाहन नहीं मिला, जिसके चलते उन्हें पिकअप वाहन का सहारा लेना पड़ा।

अस्पताल परिसर से सामने आई तस्वीरें सोशल Media पर चर्चा का विषय बनी हुई हैं। लोग सवाल उठा रहे हैं कि जब सरकार सम्मानजनक अंतिम यात्रा और शव परिवहन की व्यवस्था का दावा करती है, तब ऐसी घटनाएं क्यों सामने आती हैं।

👉 Join 4thNation WhatsApp Channel:
https://whatsapp.com/channel/0029VaOjosfFHWq7ssCngl1j

Khairagarh Dead Body Transport मामला क्या है?

जानकारी के अनुसार, भुरसूली गांव निवासी जेलेब गोड की छत से गिरने के कारण मौत हो गई थी। शव को पोस्टमॉर्टम के लिए सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र छुईखदान लाया गया।

पोस्टमॉर्टम की प्रक्रिया पूरी होने के बाद परिजन शव को गांव ले जाने के लिए अस्पताल प्रशासन से वाहन उपलब्ध कराने की प्रतीक्षा करते रहे। परिजनों का आरोप है कि काफी इंतजार के बावजूद शव वाहन उपलब्ध नहीं कराया गया।

आखिरकार समय बीतने और मजबूरी के कारण उन्हें एक मालवाहक पिकअप वाहन में शव रखकर गांव ले जाना पड़ा।

यह भी पढ़ें: CM Kanya Vivah Yojana को लेकर छिड़ी सियासी बहस

शव वाहन नहीं मिलने पर पिकअप बना सहारा

Khairagarh Dead Body Transport की इस घटना ने एक बार फिर ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं की वास्तविक स्थिति को उजागर कर दिया है।

अस्पताल परिसर से वायरल हुई तस्वीरों में साफ दिखाई दे रहा है कि शव को खुले मालवाहक वाहन में ले जाया जा रहा है। यह दृश्य न केवल परिजनों की पीड़ा को दर्शाता है, बल्कि सम्मानजनक अंतिम यात्रा की व्यवस्था पर भी प्रश्नचिह्न लगाता है।

परिजनों का कहना है कि यदि समय पर शव वाहन उपलब्ध हो जाता तो उन्हें इस स्थिति का सामना नहीं करना पड़ता।

स्थानीय लोगों ने सुनाई अपनी पीड़ा

स्थानीय निवासी कौशल साहू ने कहा कि सभी लोग देख सकते हैं कि मृतक के शव को खुले वाहन में ले जाना पड़ रहा है।

उन्होंने आरोप लगाया कि अस्पताल द्वारा मुक्तांजलि वाहन उपलब्ध नहीं कराया गया और डॉक्टरों ने अपनी सुविधा के अनुसार वाहन की व्यवस्था करने की बात कही।

वहीं स्थानीय निवासी विक्की जंघेल ने कहा कि खैरागढ़ जिले में कई बड़े सरकारी अस्पताल होने के बावजूद एक शव वाहन समय पर उपलब्ध नहीं होना दुखद स्थिति को दर्शाता है।

👉 Join 4thNation WhatsApp Channel:
https://whatsapp.com/channel/0029VaOjosfFHWq7ssCngl1j

जिले में पहले भी सामने आ चुके हैं ऐसे मामले

Khairagarh Dead Body Transport का यह पहला मामला नहीं है।

इससे पहले झूरानदी क्षेत्र में दो भाई-बहन की हत्या के बाद उनके शवों को कबाड़ ढोने वाले वाहन में गांव ले जाने की घटना सामने आई थी।

इसके अलावा मोगरा गांव के एक बच्चे की ट्रेन में मौत होने पर परिजनों को राजनांदगांव से बस के जरिए शव लेकर खैरागढ़ पहुंचना पड़ा था।

लगातार सामने आ रही ऐसी घटनाओं ने जिले में शव परिवहन व्यवस्था को लेकर गंभीर चिंताएं पैदा कर दी हैं।

CMHO ने क्या सफाई दी?

मामले को लेकर जिला स्वास्थ्य विभाग ने अलग पक्ष रखा है।

CMHO डॉ. आशीष शर्मा ने कहा कि मृतक का शव पोस्टमॉर्टम के लिए सिविल अस्पताल छुईखदान लाया गया था और पोस्टमॉर्टम पूरा होने के बाद मुक्तांजलि वाहन की व्यवस्था की जा रही थी।

उनके अनुसार वाहन खैरागढ़ से भेजी जा रही थी, लेकिन इसी बीच परिजनों ने समय की आवश्यकता को देखते हुए निजी वाहन की व्यवस्था कर ली और शव को गांव ले जाने का निर्णय लिया।

स्वास्थ्य विभाग का दावा है कि मुक्तांजलि वाहन उपलब्ध कराने की प्रक्रिया जारी थी और वाहन रवाना की जा चुकी थी।

Khairagarh Dead Body Transport पर उठ रहे बड़े सवाल

क्या ग्रामीण क्षेत्रों में पर्याप्त शव वाहन उपलब्ध हैं?

यह घटना ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं की तैयारी और संसाधनों की उपलब्धता पर सवाल खड़े करती है।

विशेषज्ञों का मानना है कि प्रत्येक सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र और सिविल अस्पताल में पर्याप्त शव वाहन उपलब्ध होने चाहिए ताकि किसी भी परिवार को ऐसी परिस्थितियों का सामना न करना पड़े।

सम्मानजनक अंतिम यात्रा की व्यवस्था कितनी प्रभावी?

सरकार द्वारा अंतिम संस्कार और शव परिवहन के लिए विभिन्न योजनाएं संचालित की जाती हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर उनकी उपलब्धता और प्रभावशीलता को लेकर लगातार सवाल उठते रहे हैं।

खैरागढ़ की यह घटना भी उसी बहस को फिर से सामने लेकर आई है।

👉 Join 4thNation WhatsApp Channel:
https://whatsapp.com/channel/0029VaOjosfFHWq7ssCngl1j

Khairagarh Dead Body Transport का यह मामला केवल एक परिवार की परेशानी नहीं, बल्कि ग्रामीण स्वास्थ्य व्यवस्था की चुनौतियों को भी उजागर करता है। शव वाहन नहीं मिलने के कारण परिजनों को पिकअप वाहन में शव ले जाना पड़ा, जिससे सरकारी व्यवस्थाओं पर सवाल खड़े हो गए हैं। हालांकि स्वास्थ्य विभाग का दावा है कि मुक्तांजलि वाहन भेजी जा रही थी, लेकिन यह घटना बताती है कि आपात स्थिति में त्वरित और सम्मानजनक शव परिवहन व्यवस्था सुनिश्चित करना आज भी एक बड़ी चुनौती बनी हुई है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *