Chhattisgarh Swami Vivekanand Technical University में प्रभार व्यवस्था के भरोसे प्रशासन

Chhattisgarh Swami Vivekanand Technical University की वर्तमान प्रशासनिक स्थिति प्रदेश की तकनीकी शिक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर रही है। प्रदेश के एकमात्र तकनीकी विश्वविद्यालय में पिछले लगभग तीन वर्षों से कई महत्वपूर्ण पद स्थायी रूप से खाली पड़े हैं।

विश्वविद्यालय में न तो स्थायी परीक्षा नियंत्रक की नियुक्ति हो पाई है और न ही स्थायी कुलसचिव की। इसके अलावा शिक्षण विभाग में निदेशक का पद भी प्रभारी व्यवस्था के भरोसे संचालित किया जा रहा है।

🎓 Chhattisgarh Swami Vivekanand Technical University में बड़ा प्रशासनिक संकट
3 साल से स्थायी परीक्षा नियंत्रक और कुलसचिव नहीं।
छात्रों का भविष्य आखिर किसके भरोसे?

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Chhattisgarh Swami Vivekanand Technical University में स्थायी प्रशासन का अभाव

Chhattisgarh Swami Vivekanand Technical University में फिलहाल कई अहम पद प्रभारी अधिकारियों के भरोसे चल रहे हैं।

कटाक्षपूर्ण लेकिन दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति यह है कि प्रदेश का एकमात्र तकनीकी विश्वविद्यालय स्थायी प्रशासनिक व्यवस्था के बजाय “प्रभार व्यवस्था” से संचालित हो रहा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि तकनीकी विश्वविद्यालय जैसे बड़े संस्थान में अस्थायी व्यवस्था लंबे समय तक चलना छात्रों और शिक्षा व्यवस्था दोनों के लिए नुकसानदायक साबित हो सकता है।

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3 साल से परीक्षा नियंत्रक और कुलसचिव के पद खाली

विश्वविद्यालय में परीक्षा नियंत्रक और कुलसचिव जैसे महत्वपूर्ण पद पिछले करीब तीन वर्षों से स्थायी रूप से भरे नहीं जा सके हैं।

इन पदों का प्रभार जिन अधिकारियों को दिया गया है, उनकी नियुक्तियों को लेकर भी विवाद और जांच की स्थिति बनी हुई है।

प्रशासनिक निरंतरता पर असर

कुलसचिव और परीक्षा नियंत्रक जैसे पद अक्सर प्रतिनियुक्ति या सीमित अवधि के आधार पर संचालित होते हैं।

ऐसी स्थिति में यदि विश्वविद्यालय में नियमित सहायक कुलसचिव और उप कुलसचिव की नियुक्ति नहीं होगी, तो प्रशासनिक निरंतरता प्रभावित होना स्वाभाविक माना जा रहा है।

Chhattisgarh Swami Vivekanand Technical University में भर्ती प्रक्रिया क्यों नहीं शुरू हुई?

विश्वविद्यालय में सहायक कुलसचिव के 4 पद और उप कुलसचिव के 2 पद स्वीकृत हैं।

इसके बावजूद आज तक इन पदों पर नियमित भर्ती प्रक्रिया शुरू नहीं हो पाई है। इसे लेकर छात्रों और शिक्षाविदों के बीच लगातार सवाल उठ रहे हैं।

नियमित अधिकारियों की जरूरत क्यों?

विशेषज्ञों का कहना है कि यदि शीर्ष प्रशासनिक पद अस्थायी या प्रतिनियुक्ति आधारित हों, तब नियमित प्रशासनिक अधिकारियों की भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो जाती है।

इन अधिकारियों की जिम्मेदारी होती है:

  • परीक्षा संचालन
  • गोपनीय शाखा का प्रबंधन
  • संबद्धता संबंधी कार्य
  • स्थापना शाखा
  • छात्रहित से जुड़े निर्णय

यदि ये व्यवस्थाएं कमजोर हों तो विश्वविद्यालय का पूरा प्रशासन प्रभावित होता है।

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छात्रों की समस्याएं लगातार बढ़ रहीं

Chhattisgarh Swami Vivekanand Technical University में आए दिन परीक्षा परिणामों में त्रुटियां सामने आ रही हैं।

इसके अलावा प्रशासनिक विलंब, नियुक्तियों को लेकर विवाद और छात्रों की समस्याएं लगातार बढ़ती जा रही हैं।

तकनीकी शिक्षा की गुणवत्ता पर असर

विशेषज्ञों का मानना है कि जब विश्वविद्यालय का प्रशासनिक ढांचा कमजोर हो, तो इसका सीधा असर तकनीकी शिक्षा की गुणवत्ता पर पड़ता है।

छात्रों के रिजल्ट, डिग्री, परीक्षा प्रक्रिया और अन्य शैक्षणिक कार्य प्रभावित होने लगते हैं।

सरकार की प्राथमिकताओं पर उठे सवाल

प्रदेश में Bharatiya Janata Party की सरकार होने के बावजूद यदि राज्य का एकमात्र तकनीकी विश्वविद्यालय स्थायी प्रशासनिक नेतृत्व से वंचित रहे, तो यह तकनीकी शिक्षा के प्रति सरकार की प्राथमिकताओं पर सवाल खड़े करता है।

शिक्षा जगत से जुड़े लोगों का कहना है कि तकनीकी विश्वविद्यालयों में अनुभवी और स्थायी प्रशासनिक अधिकारियों की नियुक्ति बेहद जरूरी है।

Chhattisgarh Swami Vivekanand Technical University में नियमित भर्ती की मांग

छात्रहित और विश्वविद्यालय हित को देखते हुए अब विश्वविद्यालय में नियमित भर्ती प्रक्रिया जल्द शुरू करने की मांग तेज हो गई है।

विशेषज्ञों का कहना है कि:

  • सहायक कुलसचिव के 4 पद
  • उप कुलसचिव के 2 पद
  • परीक्षा नियंत्रक
  • कुलसचिव

जैसे महत्वपूर्ण पदों पर स्थायी नियुक्तियां तुरंत की जानी चाहिए।

इससे विश्वविद्यालय की प्रशासनिक व्यवस्था मजबूत होगी और छात्रों का भविष्य सुरक्षित हो सकेगा।

तकनीकी शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करना जरूरी

Chhattisgarh में तकनीकी शिक्षा के विस्तार के लिए मजबूत प्रशासनिक ढांचे की जरूरत मानी जा रही है।

यदि समय रहते स्थायी अधिकारियों की नियुक्ति नहीं हुई, तो आने वाले समय में छात्रों की समस्याएं और बढ़ सकती हैं।

Chhattisgarh Swami Vivekanand Technical University की मौजूदा स्थिति तकनीकी शिक्षा व्यवस्था के लिए चिंता का विषय बन चुकी है। तीन वर्षों से स्थायी प्रशासनिक अधिकारियों की कमी ने परीक्षा और प्रशासनिक कार्यों पर असर डाला है। छात्रों के भविष्य और विश्वविद्यालय की विश्वसनीयता को बनाए रखने के लिए अब स्थायी और अनुभवी अधिकारियों की नियुक्ति बेहद जरूरी हो गई है।

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