Sukma Naxal Rehabilitation: CM विष्णु देव साय ने किया पुनर्वास केंद्र का दौरा, 2392 नक्सलियों ने थामा विकास का हाथ

सुकमा, 14 अप्रैल 2026। Sukma Naxal Rehabilitation की दिशा में छत्तीसगढ़ सरकार ने एक और ऐतिहासिक कदम उठाया है। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने सुकमा जिला मुख्यालय स्थित पुनर्वास केंद्र का दौरा कर वहां चल रही पुनर्वास एवं कौशल विकास गतिविधियों का अवलोकन किया। यह दौरा न केवल प्रशासनिक निरीक्षण था, बल्कि एक भावनात्मक संवाद भी था — जहाँ एक मुख्यमंत्री ने उन लोगों से मुलाकात की, जिन्होंने हिंसा छोड़कर जीवन की मुख्यधारा को चुना।


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मुख्यमंत्री साय का सुकमा दौरा — आत्मीय संवाद और बड़ा संदेश

मुख्यमंत्री श्री साय ने पुनर्वास केंद्र में पुनर्वासित नागरिकों से सीधे संवाद किया। उन्होंने उनके अनुभव सुने, उनकी तकलीफों को समझा और उन्हें नई जिंदगी की शुरुआत पर बधाई दी।

मुख्यमंत्री ने कहा,

“पुनर्वासितों की आंखों में दिखता आत्मविश्वास इस बात का प्रमाण है कि यदि सही अवसर और मार्गदर्शन मिले, तो हर भटका हुआ कदम नई दिशा और नया जीवन प्राप्त कर सकता है।”

उन्होंने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार भटके हुए लोगों को मुख्यधारा से जोड़कर उन्हें सम्मानजनक जीवन, रोजगार और समान अवसर देने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।


Sukma Naxal Rehabilitation में बड़ी उपलब्धि — 2392 नक्सलियों की वापसी

हिंसा की राह छोड़ी, विकास को अपनाया

राज्य सरकार की प्रभावी Sukma Naxal Rehabilitation नीति के तहत अब तक 2392 नक्सलियों ने हिंसा का रास्ता छोड़कर समाज की मुख्यधारा से जुड़ने का निर्णय लिया है।

इनमें से 361 पुनर्वासित नागरिकों ने पूरी तरह से नया जीवन शुरू कर आत्मनिर्भरता की दिशा में ठोस कदम उठाए हैं।

सरकार का लक्ष्य केवल पुनर्वास नहीं, बल्कि सम्मान

मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार का उद्देश्य केवल इन लोगों को समाज में वापस लाना नहीं है, बल्कि उन्हें स्थायी रोजगार, सम्मानजनक जीवन और बराबरी का दर्जा दिलाना है।

बस्तर क्षेत्र में यह सकारात्मक बदलाव अब स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है — जहाँ कभी बंदूकें गूंजती थीं, वहाँ आज कौशल विकास के केंद्र चल रहे हैं।


कौशल विकास से Sukma Naxal Rehabilitation को मिल रही नई ताकत

किन ट्रेडों में हो रहा है प्रशिक्षण?

सुकमा पुनर्वास केंद्र में पुनर्वासित नागरिकों को निम्नलिखित ट्रेडों में कौशल प्रशिक्षण दिया जा रहा है:

  • 🧱 राजमिस्त्री (Masonry)
  • 🧵 कपड़ा सिलाई (Tailoring)
  • 🌾 कृषि उद्यमिता (Agriculture Entrepreneurship)
  • 🚗 वाहन चालक (Driving)

ये सभी ट्रेड न केवल रोजगारोन्मुखी हैं, बल्कि इनसे पुनर्वासित नागरिक स्वरोजगार भी शुरू कर सकते हैं।

2026 में 307 हितग्राहियों को मिला प्रशिक्षण

वर्ष 2026 में अब तक 307 हितग्राहियों को कौशल विकास प्रशिक्षण प्रदान किया जा चुका है।

इसके साथ ही मुख्यधारा में लौटे 313 युवाओं को प्रतिमाह ₹10,000 का स्टाइपेंड भी दिया जा रहा है, जिससे वे अपनी जरूरतें पूरी कर सकें और आत्मनिर्भर बन सकें।


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महिलाओं की भागीदारी — Sukma Naxal Rehabilitation की नई मिसाल

115 महिलाएं बन रही हैं आत्मनिर्भर

Sukma Naxal Rehabilitation कार्यक्रम की सबसे प्रेरणादायक कहानी महिलाओं की है। 115 महिलाएं प्रशिक्षण एवं तकनीकी सहयोग के माध्यम से आत्मनिर्भरता की नई मिसाल पेश कर रही हैं।

जो महिलाएं कभी हिंसा और भय के माहौल में जीती थीं, वे आज अपने हाथों से अपनी जिंदगी को एक नया आकार दे रही हैं।

यह बदलाव केवल आर्थिक नहीं, बल्कि सामाजिक और मानसिक स्तर पर भी गहरा है।


रोजगार और आवास — सम्मानजनक जीवन की ठोस शुरुआत

अनुकंपा नियुक्ति से मिला सरकारी रोजगार

नक्सल हिंसा से प्रभावित परिवारों के आश्रितों को भी राहत दी गई है। अनुकंपा नियुक्ति के तहत:

  • पुलिस विभाग में 20 लोगों को रोजगार मिला।
  • जिला प्रशासन द्वारा 95 लोगों को शासकीय सेवा में अवसर दिया गया।

PM आवास योजना — 25 परिवारों को मिली छत

कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री साय ने 25 पुनर्वासित हितग्राहियों को प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत आवास की चाबियाँ सौंपकर उन्हें सम्मानित किया।

ग्राम ढोंडरा कोंटा निवासी मौसम संजना और नागारास जगरगुंडा निवासी भरत कुमार हेमला सहित अन्य हितग्राहियों को इस अवसर पर नियुक्ति पत्र भी प्रदान किए गए।

इसके अलावा शिक्षा विभाग के अंतर्गत 10 नव नियुक्त शिक्षकों को भी नियुक्ति पत्र वितरित किए गए।


डिजिटल इंडिया से जुड़ रहे Sukma Naxal Rehabilitation के लाभार्थी

जिला प्रशासन ने 107 पुनर्वासित हितग्राहियों को मोबाइल फोन वितरित किए हैं।

इसका उद्देश्य है कि ये नागरिक डिजिटल माध्यमों, सरकारी सेवाओं और संचार तकनीकों से जुड़ सकें और आधुनिक जीवनशैली की ओर अग्रसर हो सकें।

मुख्यमंत्री ने इस कदम को एक सकारात्मक पहल बताते हुए कहा कि यह परिवर्तन केवल भौतिक नहीं, बल्कि सामाजिक और मानसिक बदलाव का भी प्रतीक है।

मुख्यमंत्री ने पुनर्वासितों को राजमिस्त्री किट, मोबाइल फोन, आवास की चाबियाँ और पूर्णता प्रमाण पत्र भी वितरित किए।


‘बदलते सुकमा की बदलती तस्वीर’ — प्रेरणादायक कॉफी टेबल बुक का विमोचन

मुख्यमंत्री साय ने इस अवसर पर ‘बदलते सुकमा की बदलती तस्वीर: पुनर्वास से विकास तक’ शीर्षक कॉफी टेबल बुक का विमोचन किया।

यह पुस्तक Sukma Naxal Rehabilitation की सफलता की उन प्रेरणादायक कहानियों को दर्शाती है, जो यह सिद्ध करती हैं कि इच्छाशक्ति और सही नीति से कोई भी बदलाव संभव है।

साथ ही पुनर्वास केंद्र के कला केंद्र में कलाकारों की प्रस्तुतियों की सराहना करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि यह कला इस परिवर्तन की जीवंत अभिव्यक्ति है।

कार्यक्रम में स्वास्थ्य मंत्री श्री श्याम बिहारी जायसवाल, सांसद बस्तर श्री महेश कश्यप सहित अनेक जनप्रतिनिधि और वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।


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Sukma Naxal Rehabilitation बन रहा है राष्ट्रीय मॉडल

Sukma Naxal Rehabilitation का यह अभियान छत्तीसगढ़ सरकार की दूरदर्शी सोच और मानवीय दृष्टिकोण का जीता-जागता प्रमाण है। 2392 नक्सलियों की वापसी, 115 महिलाओं की आत्मनिर्भरता, 313 युवाओं को स्टाइपेंड, 107 को मोबाइल और 25 परिवारों को आवास — ये आंकड़े केवल संख्याएं नहीं हैं, ये हर उस इंसान की नई उम्मीद की कहानी है जिसने हिंसा छोड़कर जीवन को चुना।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय का यह संकल्प — कि कोई भी नागरिक पीछे नहीं छूटेगा — सुकमा को बस्तर की नई पहचान दे रहा है।


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