Ambikapur News — छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले की एक साधारण महिला ने असाधारण काम करके पूरे इलाके में मिसाल कायम की है। रामावती यादव, जो अब “पान वाली दीदी” के नाम से पहचानी जाती हैं, जलजली टूरिस्ट स्पॉट पर एक पेड़ की छांव में अपनी छोटी-सी दुकान चलाती हैं।
महज 3–4 महीने पहले शुरू किया यह सफर आज न केवल उनके परिवार का सहारा बना है, बल्कि सैकड़ों महिलाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत भी है।
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परिवार की जरूरत बनी प्रेरणा
घर चलाना हो रहा था मुश्किल
Ambikapur News: रामावती के पति मिस्त्री का काम करते हैं। सीमित आमदनी में दो बच्चों की पढ़ाई और घर का खर्च चलाना लगातार कठिन होता जा रहा था। ऐसे हालात में रामावती ने हार मानने की बजाय खुद कुछ करने का फैसला किया।
उन्होंने बातचीत में बताया, “घर के बढ़ते खर्चों को देखते हुए मन में विचार आया कि मुझे भी कुछ काम करना चाहिए।” यही सोच उनकी जिंदगी बदलने वाली थी।
YouTube से सीखा पान बनाने का हुनर
Ambikapur News: बिना ट्रेनिंग, बस लगन से सीखा
रामावती ने कोई औपचारिक प्रशिक्षण नहीं लिया। उन्होंने मोबाइल पर YouTube वीडियो देखकर पान बनाने की बारीकियां सीखीं। कम पढ़ी-लिखी होने के बावजूद उन्होंने खुद पर भरोसा रखा।
पान में उपयोग होने वाली सामग्री:
रामावती मीठा पान और जरदा पान दोनों बनाती हैं। उनके पान में बंगला पत्ता, गुलकंद, गोपाल चटनी, सुपारी, नारियल चूरा, चौड़ी पत्ती, इमाम और चूना शामिल होता है। इन्हीं सामग्रियों के सही मेल से उनका पान ग्राहकों का पसंदीदा बन गया है।
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Ambikapur News: जलजली में जमाया कारोबार
जलजली सरगुजा जिले का प्रसिद्ध पर्यटन स्थल है जहां रोजाना सैकड़ों की संख्या में पर्यटक आते हैं। रामावती ने इसी भीड़ को अपना अवसर बनाया। एक पेड़ के नीचे बैठकर वे रोज अपना पान का स्टॉल लगाती हैं।
पर्यटकों की आमद और स्थान का सही चुनाव उनके व्यवसाय की नींव बना। सप्ताहांत पर जब पर्यटकों की संख्या बढ़ती है, तो उनकी कमाई भी दोगुनी हो जाती है।
रोजाना ₹500–₹1000 की कमाई
रविवार-सोमवार को होती है सबसे ज्यादा आमदनी
Ambikapur News: रामावती के अनुसार सामान्य दिनों में उनकी बिक्री ₹500–₹600 तक होती है। रविवार और सोमवार को जब जलजली में पर्यटकों की भारी भीड़ होती है, तब उनकी कमाई ₹1000 तक पहुंच जाती है।
यह आमदनी भले ही बड़ी न लगे, लेकिन एक ऐसे परिवार के लिए जो पहले अकेले एक मिस्त्री की आय पर निर्भर था — यह किसी वरदान से कम नहीं।
पति का साथ रहा सबसे बड़ा बल:
रामावती बताती हैं कि उनके पति ने इस काम में पूरा समर्थन दिया। उन्होंने कभी नहीं रोका, बल्कि लगातार प्रोत्साहित करते रहे। पारिवारिक सहयोग ने उनका आत्मविश्वास और मजबूत बनाया।
बच्चों की पढ़ाई: सबसे बड़ा सपना
रामावती के दो बच्चे कमलेश्वरपुर में पढ़ाई कर रहे हैं — एक दसवीं कक्षा में और दूसरा सातवीं कक्षा में। वे चाहती हैं कि उनके बच्चे पढ़-लिखकर बेहतर जिंदगी जिएं।
यही सपना उन्हें हर सुबह उठकर मेहनत करने की ताकत देता है। बच्चों का उज्ज्वल भविष्य — यही रामावती की सबसे बड़ी प्रेरणा है।
Ambikapur News: आत्मनिर्भर भारत की असली मिसाल
3–4 महीने में बनाई अपनी पहचान
रामावती ने सिर्फ 3–4 महीने के अंदर अपने दम पर पहचान बनाई है। न कोई सरकारी मदद, न कोई बड़ी पूंजी — बस लगन, मेहनत और परिवार का प्यार।
उनकी कहानी उन तमाम महिलाओं के लिए एक संदेश है जो हालातों के आगे हार मान लेती हैं। रामावती ने साबित किया कि अगर इरादा पक्का हो, तो रास्ता खुद बन जाता है।
केंद्र सरकार की आत्मनिर्भर भारत योजना और महिला सशक्तिकरण अभियानों का असली चेहरा रामावती जैसी महिलाओं में ही दिखता है।
Ambikapur News की यह खबर सिर्फ एक महिला की कहानी नहीं, बल्कि आज के दौर में डिजिटल टूल्स और दृढ़ इच्छाशक्ति से बदलाव लाने की मिसाल है। रामावती यादव ने YouTube जैसे मुफ्त संसाधन का इस्तेमाल करके अपने परिवार को आर्थिक संबल दिया और “पान वाली दीदी” बनकर अपनी अलग पहचान बनाई।
छत्तीसगढ़ की महिलाओं की यह शक्ति और संघर्ष हर किसी के लिए प्रेरणादायक है। जलजली के इस छोटे से पान स्टॉल से निकली रामावती की यह कहानी — Ambikapur News की सबसे यादगार कहानियों में से एक है।
