Chhattisgarh News — छत्तीसगढ़ में आज से एक ऐतिहासिक बदलाव लागू हो गया है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की सरकार ने राज्य विधानसभा में छत्तीसगढ़ धर्म स्वातंत्र्य विधेयक-2026 पारित किया, जिसका मकसद जबरदस्ती, लालच, धोखे या गलत जानकारी देकर होने वाले धर्म परिवर्तन को रोकना है।
यह नया कानून छत्तीसगढ़ में वर्तमान में लागू छत्तीसगढ़ धर्म स्वातंत्रय अधिनियम 1968 का स्थान लेगा। पुराना कानून मौजूदा तकनीकी और सामाजिक परिस्थितियों में अपर्याप्त हो गया था।
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📌 Chhattisgarh News: नया कानून — क्या है धर्म स्वातंत्र्य विधेयक 2026?
छत्तीसगढ़ की विष्णु देव साय सरकार ने कैबिनेट बैठक में ‘छत्तीसगढ़ धर्म स्वातंत्र्य विधेयक, 2026’ को हरी झंडी दी। इस कानून का मकसद धार्मिक स्वतंत्रता की रक्षा करते हुए बल, दबाव, लालच या धोखे से होने वाले धर्म परिवर्तन पर पूरी तरह रोक लगाना है।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि पहले भी इस संबंध में कानून बना था, पर वह उतना प्रभावी नहीं था, जिस कारण अवैध धर्मांतरण कराने वाले लोग बच जाते थे।
📌 पुराने कानून की जगह क्यों आया नया विधेयक?
Chhattisgarh News: धर्मांतरण को रोकने के लिए जो कानून अब तक चल रहा था, वह साल 1968 का था — यह ‘धर्म स्वतंत्रता अधिनियम’ मध्यप्रदेश से विरासत में मिला था और राज्य बनने के समय से ही लागू था।
छत्तीसगढ़ की भौगोलिक स्थिति, सामाजिक-आर्थिक परिस्थितियों और प्रौद्योगिकी के विकास के कारण पुराने कानून के प्रावधान वर्तमान परिदृश्य में अपर्याप्त हो गए थे, इसलिए एक व्यापक कानून बनाना आवश्यक हो गया।
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📌 अवैध धर्मांतरण पर क्या-क्या हैं सजा के प्रावधान?
Chhattisgarh News: नए कानून में अपराध की गंभीरता के आधार पर कड़े दंड का प्रावधान किया गया है:
सामान्य मामलों में 7 से 10 साल की जेल और कम से कम 5 लाख रुपये जुर्माना होगा। नाबालिग, महिला या SC/ST/OBC के धर्मांतरण पर 10 से 20 साल की सजा और 10 लाख रुपये जुर्माना लगेगा। सामूहिक धर्मांतरण के लिए 10 साल से आजीवन कारावास और 25 लाख रुपये जुर्माने का प्रावधान है।
एक अपराध के बाद दोबारा अपराध करने पर दोषी को आजीवन कारावास की सजा होगी।
इस कानून के तहत आने वाले सभी अपराध संज्ञेय और अजमानतीय होंगे तथा मामलों की सुनवाई विशेष न्यायालय में की जाएगी।
📌 धर्म परिवर्तन से पहले अब 60 दिन पहले देनी होगी सूचना
Chhattisgarh News: प्रस्तावित कानून के अनुसार स्वैच्छिक धर्म परिवर्तन करने वाले व्यक्ति को कम से कम 60 दिन पहले जिला मजिस्ट्रेट को लिखित सूचना देना अनिवार्य होगा।
इसके अतिरिक्त अनुष्ठान कराने वाले पुजारी, मौलवी या पादरी को भी पूर्व सूचना देना जरूरी होगा। यदि नियमों का पालन नहीं किया गया तो उसे अवैध धर्मांतरण माना जाएगा और तत्काल गिरफ्तारी हो सकती है।
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📌 शादी के लिए धर्मांतरण — अब होगी सीधी कार्रवाई
यदि केवल विवाह करने के उद्देश्य से धर्म बदला जाता है, तो उस धर्मांतरण को कानूनी रूप से अमान्य (Void) माना जाएगा।
इस प्रावधान को ‘लव जिहाद’ जैसे मामलों को रोकने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। कानून के तहत पीड़ित के परिवार के सदस्य भी FIR दर्ज करा सकते हैं।
📌 विदेशी फंडिंग और संस्थाओं पर लगेगा शिकंजा
Chhattisgarh News: धर्मांतरण में विदेशी पैसे की भूमिका पर भी सरकार ने कड़ा रुख अपनाया है। कोई संस्था प्रलोभन या सामूहिक धर्मांतरण में शामिल पाई गई, तो उसका रजिस्ट्रेशन रद्द होगा और उस पर भारी जुर्माना लगाया जाएगा।
सरकार का दावा है कि इससे अवैध धर्मांतरण पर रोक लगेगी और धार्मिक स्वतंत्रता की रक्षा होगी, हालांकि इस पर राजनीतिक और सामाजिक बहस भी होने की संभावना है।
📌 विशेष अदालतें — 6 महीने में होगा मामलों का निपटारा
नए कानून के तहत प्रत्येक जिले में विशेष अदालतें गठित की जाएंगी। सरकार का लक्ष्य है कि ऐसे सभी मामलों का निपटारा 6 महीने के भीतर किया जाए।
इससे न केवल पीड़ितों को जल्द न्याय मिलेगा, बल्कि लंबे समय तक चलने वाले विवादों पर भी विराम लगेगा।
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📌 Chhattisgarh News: छत्तीसगढ़ में कानून की ज़रूरत क्यों पड़ी?
पिछले कुछ समय से राजनांदगांव, रायपुर, दुर्ग, कांकेर, बलरामपुर, बिलासपुर, नारायणपुर, सरगुजा, सूरजपुर, जांजगीर-चांपा, मुंगेली, बालोद, धमतरी, कबीरधाम और जशपुर में कई धर्मांतरण के मामले सामने आ चुके हैं। खुद हाईकोर्ट ने ऐसे मामलों पर टिप्पणी करते हुए इन्हें ‘सामाजिक खतरा’ बताया था।
छत्तीसगढ़ की साय सरकार ने ‘सामूहिक धर्मांतरण’ को राज्य की शांति और सुरक्षा के लिए सबसे बड़ी चुनौती माना है। सरकार का मानना है कि यह केवल धर्म का मामला नहीं, बल्कि समाज के ताने-बाने को बिगाड़ने की एक साजिश है।
विशेष रूप से बस्तर, जशपुर और रायगढ़ जैसे आदिवासी क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर धर्मांतरण के मामले सामने आते रहे हैं। नारायणपुर जैसे इलाकों में यह विवाद गुटीय संघर्ष का रूप ले चुका था।
📌 छत्तीसगढ़ में धर्म और जनसंख्या का वास्तविक चित्र
2011 की जनगणना के अनुसार छत्तीसगढ़ में 2,38,19,789 हिंदू, 5,14,998 मुस्लिम, 4,90,542 ईसाई और 68,979 सिख थे। अनुमान है कि अब राज्य की जनसंख्या 3 करोड़ 30 लाख से अधिक हो चुकी है।
राज्य में लगभग 900 से अधिक चर्च हैं, जिनमें विश्रामपुर में 1868 में बना पहला चर्च और जशपुर के कुनकुरी में एशिया का दूसरा सबसे बड़ा रोमन कैथोलिक कैथेड्रल शामिल हैं।
सरकार का कहना है कि यह विधेयक किसी की आस्था पर हमला नहीं, बल्कि सामाजिक सद्भाव और कमजोर वर्गों की सुरक्षा के लिए है।
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📌 Chhattisgarh News
Chhattisgarh News की यह खबर राज्य की राजनीति, समाज और कानून व्यवस्था के लिहाज से बेहद अहम है। छत्तीसगढ़ धर्म स्वातंत्र्य विधेयक 2026 अवैध धर्मांतरण पर अंकुश लगाने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है।
यह कानून किसी की व्यक्तिगत आस्था को ठेस पहुँचाने के लिए नहीं, बल्कि छल-कपट से होने वाले धर्मांतरण को रोकने के लिए बनाया गया है।
सरकार का दावा है कि इससे आदिवासी और कमजोर वर्गों को सुरक्षा मिलेगी, सामाजिक सद्भाव बना रहेगा और राज्य में कानून व्यवस्था मजबूत होगी। हालांकि विपक्ष ने इस कानून का विरोध भी जताया है। आने वाले दिनों में इसके क्रियान्वयन पर सबकी नजरें टिकी रहेंगी।
