Raipur News — छत्तीसगढ़ से एक ऐसी खबर सामने आई है जो पूरे देश की स्वास्थ्य व्यवस्था को हिलाकर रख देती है। राज्य में मध्य और पूर्वी एशियाई देशों से MBBS की डिग्री लेकर लौटे 3000 से अधिक विदेशी प्रशिक्षित डॉक्टरों के FMGE (Foreign Medical Graduate Examination) सर्टिफिकेट फर्जी होने का संदेह है।
छत्तीसगढ़ मेडिकल काउंसिल (CMC) ने राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (NMC) और राज्य चिकित्सा शिक्षा निदेशालय के सहयोग से इन सभी डॉक्टरों की जांच शुरू कर दी है। यह मामला न केवल एक प्रशासनिक घोटाले का है, बल्कि लाखों मरीजों की जान से सीधे जुड़ा हुआ है।
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FMGE क्या होता है और क्यों है यह जरूरी?
Raipur News: FMGE (Foreign Medical Graduate Examination) वह अनिवार्य स्क्रीनिंग परीक्षा है जो National Board of Examinations (NBE) द्वारा आयोजित की जाती है। यह परीक्षा उन भारतीय छात्रों के लिए अनिवार्य है जिन्होंने विदेश से MBBS की डिग्री प्राप्त की हो और भारत में चिकित्सा अभ्यास करना चाहते हों।
FMGE पास करने के बाद ऐसे स्नातकों को किसी मान्यता प्राप्त सरकारी मेडिकल कॉलेज या अस्पताल में एक साल की अनिवार्य इंटर्नशिप पूरी करनी होती है। इसके बाद NMC उन्हें भारत में प्रैक्टिस के लिए पंजीकरण प्रदान करता है।
यह प्रक्रिया इसलिए बनाई गई है ताकि विदेशी डिग्री धारक डॉक्टरों की योग्यता सुनिश्चित की जा सके और मरीजों को सही इलाज मिले। लेकिन इस पूरी व्यवस्था में जो घोटाला सामने आया है, वह चिंताजनक है।

Chhattisgarh में 3000 डॉक्टरों पर संदेह – Raipur News का बड़ा खुलासा
Raipur News की इस बड़ी रिपोर्ट के अनुसार, पिछले एक साल में CMC और NMC के अधिकारियों ने राज्य के सरकारी अस्पतालों में इंटर्नशिप कर रहे कुछ विदेशी मेडिकल स्नातकों में गंभीर नैदानिक ज्ञान की कमी देखी।
अधिकारियों के अनुसार, कुछ इंटर्न डॉक्टर बुनियादी मेडिकल विषयों की समझ में बेहद कमज़ोर पाए गए। यहां तक कि कुछ सामान्य सर्जिकल उपकरणों को भी पहचानने में असमर्थ थे — जो एक MBBS ग्रेजुएट के लिए पूरी तरह अस्वीकार्य है।
इसके बाद अधिकारियों ने पाया कि कई स्नातकों ने संदिग्ध तरीके से प्राप्त FMGE सर्टिफिकेट के जरिए सरकारी अस्पतालों में इंटर्नशिप हासिल की थी। इस खुलासे ने पूरी जांच की नींव रखी।
Rajasthan SOG की गिरफ्तारियां – घोटाले की पूरी परत उघड़ी
Raipur News: यह मामला तब और गंभीर हो गया जब Rajasthan Police की Special Operations Group (SOG) ने 18 लोगों को गिरफ्तार किया। इनमें Rajasthan Medical Council (RMC) के एक पूर्व रजिस्ट्रार और पूर्व नोडल अधिकारी भी शामिल थे।
गिरफ्तार किए गए 15 उम्मीदवार वे लोग थे जिन्होंने विदेश से MBBS की डिग्री ली थी लेकिन FMGE परीक्षा पास नहीं कर पाए थे। इसके बावजूद उन्होंने फर्जी FMGE सर्टिफिकेट के जरिए मेडिकल काउंसिल से प्रोविजनल रजिस्ट्रेशन और अस्पतालों में इंटर्नशिप हासिल कर ली।
SOG के अतिरिक्त महानिदेशक Vishal Bansal ने कहा कि पूर्व RMC रजिस्ट्रार इस पूरे मामले में मुख्य आरोपी है, जिसने अनिवार्य सत्यापन जांचों को दरकिनार करते हुए नकली सर्टिफिकेट धारकों को रजिस्ट्रेशन दिलाया।
₹20-25 लाख में बिकते थे फर्जी सर्टिफिकेट – घोटाले का भयावह गणित
इस Raipur News से जुड़े मामले में सबसे चौंकाने वाला तथ्य यह है कि प्रत्येक उम्मीदवार ने ₹20 लाख से ₹25 लाख तक इस रैकेट को भुगतान किया।
इस राशि का वितरण इस प्रकार था — लगभग ₹11 लाख प्रति उम्मीदवार RMC के अधिकारियों और कर्मचारियों को दिए जाते थे, जबकि शेष राशि बिचौलियों और एजेंटों में बांटी जाती थी।
यह एक सुनियोजित और विशाल रैकेट था जिसमें डॉक्टर, अधिकारी, एजेंट और संस्थाएं सभी शामिल थीं। इस पूरे नेटवर्क ने न केवल सरकारी व्यवस्था को धोखा दिया बल्कि आम नागरिकों के स्वास्थ्य को भी खतरे में डाला।
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अस्पतालों में डॉक्टरों की अज्ञानता ने खोला भांडा
CMC के रजिस्ट्रार Dr. Rupal Purohit ने खुलासा किया कि कई विदेशी मेडिकल स्नातक अपने विदेशी संस्थानों में नियमित कक्षाओं में शारीरिक रूप से उपस्थित नहीं हुए थे। कुछ मामलों में डिग्री केवल ऑनलाइन परीक्षाओं के आधार पर पूरी कर ली गई।
जो छात्र विदेश में पढ़ने गए भी, उनकी उपस्थिति बेहद कम थी — कुछ छात्र सप्ताह में केवल एक या दो बार ही कक्षाओं में आते थे। यह स्थिति बताती है कि इन डॉक्टरों को मेडिकल शिक्षा का वास्तविक ज्ञान कभी ठीक से मिला ही नहीं।
इसी कारण जब ये इंटर्नशिप पर आए तो उनकी कमजोरियां सामने आ गईं। सर्जिकल उपकरण न पहचान पाना और बुनियादी मेडिकल ज्ञान की कमी — यही वह संकेत थे जिन्होंने पूरे घोटाले की जांच की शुरुआत की।
CMC और NMC की बड़ी जांच – क्या होगा आगे?
CMC के उपाध्यक्ष Dr. Vivek Choudhary ने पुष्टि की है कि CMC ने NMC और राज्य चिकित्सा शिक्षा निदेशालय के सहयोग से विस्तृत सत्यापन अभियान शुरू किया है।
इस अभियान के तहत 3000 से अधिक विदेशी मेडिकल स्नातकों की FMGE मार्कशीट, FMGE सर्टिफिकेट और इंटर्नशिप रिकॉर्ड की बारीकी से जांच की जाएगी। जो भी अनियमितता मिलेगी, उस पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
यह जांच केवल छत्तीसगढ़ तक सीमित नहीं रहेगी — अन्य राज्यों में भी इसी तरह के मामलों की पड़ताल की जाएगी। यह संकेत देता है कि यह घोटाला राष्ट्रीय स्तर पर फैला हुआ हो सकता है।
मरीजों की जान पर क्या है खतरा?
यह मामला केवल एक प्रशासनिक फर्जीवाड़े तक सीमित नहीं है। जो डॉक्टर FMGE पास किए बिना, या न्यूनतम चिकित्सा ज्ञान के साथ, सरकारी अस्पतालों में इंटर्नशिप और प्रैक्टिस कर रहे थे — वे मरीजों की जान के साथ खिलवाड़ कर रहे थे।
छत्तीसगढ़ के ग्रामीण और आदिवासी इलाकों में सरकारी अस्पताल ही स्वास्थ्य का एकमात्र सहारा हैं। ऐसे में अगर वहां अयोग्य डॉक्टर तैनात हों, तो इसके दुष्परिणाम अकल्पनीय हो सकते हैं।
इस Raipur News ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा किया है कि देश की मेडिकल रजिस्ट्रेशन प्रणाली में निगरानी की कितनी बड़ी खामी है — और इसे सुधारना कितना जरूरी है।
Raipur News से सामने आया यह FMGE घोटाला छत्तीसगढ़ ही नहीं, पूरे देश की चिकित्सा व्यवस्था के लिए एक गंभीर चेतावनी है। 3000 से अधिक संदिग्ध डॉक्टरों की जांच, Rajasthan में 18 गिरफ्तारियां, ₹25 लाख तक के रैकेट और फर्जी सर्टिफिकेट से मिली इंटर्नशिप — यह सब मिलकर एक ऐसे व्यापक भ्रष्टाचार की तस्वीर पेश करते हैं जिसे जड़ से उखाड़ना जरूरी है।
CMC और NMC की यह जांच यदि ईमानदारी और पारदर्शिता से की जाए, तो भविष्य में ऐसे अयोग्य डॉक्टरों को सिस्टम में घुसने से रोका जा सकता है। Raipur, Bhilai, Bilaspur, Durg समेत पूरे Chhattisgarh के मरीजों को उनका हक है — एक योग्य, प्रशिक्षित और प्रमाणित डॉक्टर। इससे कम कुछ भी स्वीकार्य नहीं।
